कांवड़ के दोनों सिरों पर वृद्ध माता और पिता विराजमान थे, जबकि उनके पुत्र, पुत्रवधुएं और अन्य परिजन बारी-बारी से कंधों पर कांवड़ उठाकर बोल बम और हर-हर महादेव के जयघोष के साथ आगे बढ़ रहे थे। मार्ग में जहां भी यह परिवार पहुंचा, श्रद्धालु उन्हें सम्मान और कौतूहल भरी नजरों से देखते रहे।