सुल्तानगंज से उत्तरवाहिनी गंगा का पवित्र जल लेकर देवघर पहुंचे कांवरियों के जयघोष से पूरा कांवरिया पथ और मेला क्षेत्र गूंजता रहा। ‘बोल बम’, ‘हर-हर महादेव’ और ‘बाबा बैद्यनाथ की जय’ के उद्घोष के बीच श्रद्धालु कतारबद्ध होकर बाबा के दर्शन और जलार्पण के लिए आगे बढ़ते रहे।
श्रीनगर, 22 अगस्त (हि.स.)। भगवान शिव के पवित्र प्रतीक ‘छड़ी मुबारक’ को शनिवार को पारंपरिक पूजा-अर्चना के बाद श्रीनगर स्थित दशनामी अखाड़ा भवन से पहलगाम के लिए रवाना किया गया। इसके साथ ही श्री अमरनाथ की पवित्र गुफा की पारंपरिक वार्षिक यात्रा की शुरुआत हो गई।
रक्षा बंधन 2026 की तारीख को लेकर उलझन है, क्योंकि 27 अगस्त और 28 अगस्त, दोनों तारीखों का ज़िक्र हो रहा है।
नाग पंचमी श्रावण महीने के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाई जाती है।
श्रावण मास के तीसरे सोमवार और नागपंचमी के एक साथ आने से बाबा महाकाल की नगरी उज्जैन में सोमवार को आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा। वर्ष में सिर्फ एक बार 24 घंटे के लिए खुलने वाले नागचंद्रेश्वर मंदिर के पट रविवार रात 12 बजे खोले गए। इसके साथ ही भगवान महाकाल के दर्शन के लिए भी देररात से श्रद्धालुओं की कतारें लगनी शुरू हो गईं।
महाकाल मंदिर के शिखर की तीसरी मंजिल पर स्थित भगवान नागचंद्रेश्वर के दर्शन का सिलसिला जारी है। रविवार-सोमवार की दरमियानी रात से सुबह 8 बजे तक करीब 2 लाख श्रद्धालुओं ने दर्शन कर लिए थे। सोमवार रात 12 बजे मंदिर के पट एक वर्ष के लिये पुनः बैंड हो जाएंगे।
जम्मू-कश्मीर के पुंछ जिले की लोरन घाटी में पुलस्त्य नदी के किनारे स्थित हिमालयी तीर्थस्थल बूढ़ा अमरनाथ की वार्षिक यात्रा आज कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच शुरू हो गई। उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने सुबह लगभग साढ़े छह बजे स्थानीय भगवती नगर आधार शिविर से श्रद्धालुओं के प्रथम जत्थे को झंडी दिखाकर रवाना किया।
दूर-दराज के राज्यों से पहुंचे कांवरियों के साथ स्थानीय श्रद्धालु भी बाबा बैद्यनाथ के दर्शन और जलाभिषेक के लिए बड़ी संख्या में पहुंचे। कांवरिया पथ से लेकर मंदिर क्षेत्र तक भगवा वस्त्रों में श्रद्धालुओं की भीड़ दिखाई दी। लगातार ‘बोल बम’ के जयकारों से पूरा वातावरण शिवमय नजर आया।
मध्य प्रदेश के उज्जैन स्थित विश्व प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग भगवान महाकालेश्वर मंदिर के तृतीय तल पर स्थित नागचंद्रेश्वर मंदिर के पट नागपंचमी पर रविवार मध्यरात्रि 12 बजे खोल दिए गए। पट खुलते ही यहां देशभर से पहुंचे श्रद्धालुओं ने भगवान नागचंद्रेश्वर के दर्शन शुरू किए।
अधिकारियों ने बताया कि रामबन ज़िले और कश्मीर के कुछ हिस्सों में बारिश और खराब मौसम के कारण शनिवार को जम्मू से श्री अमरनाथ यात्रा रोक दी गई। मौजूदा मौसम और सड़क की स्थिति को देखते हुए एहतियात के तौर पर शनिवार को जम्मू के भगवती नगर बेस कैंप से यात्रा का कोई नया जत्था रवाना नहीं होने दिया गया।
नेपाल सरकार ने पर्यटन क्षेत्र में नई पहचान बनाने के उद्देश्य से राष्ट्रीय वेलनेस पर्यटन रणनीति 2026–2035 और पांच वर्षीय रणनीतिक कार्ययोजना 2026–2030 सार्वजनिक की है। संस्कृति, पर्यटन तथा नागरिक उड्डयन मंत्रालय की इस रणनीति का लक्ष्य नेपाल को एक उत्कृष्ट और बहुआयामी वेलनेस टूरिज्म डेस्टिनेशन के रूप में विकसित करना है।
रांची। सावन का पवित्र महीना भगवान शिव की आराधना और भक्ति के लिए विशेष माना जाता है। इन दिनों देशभर में शिव मंदिरों में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ रही है। भक्त भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक कर सुख-समृद्धि और परिवार की खुशहाली की कामना कर रहे हैं। सावन के सोमवार को विशेष रूप से भगवान शिव की पूजा और व्रत का महत्व माना जाता है।
पंडा-पुरोहितों के अनुसार, सावन शिवरात्रि गुरुवार, 11 अगस्त 2026 को मनाई जाएगी।
जम्मू-कश्मीर में पांच अगस्त को अनुच्छेद 370 व 35ए को हटाए जाने की सातवीं बरसी पर बुधवार को सुरक्षा कारणों से एक दिन के लिए रोकी गईवार्षिक श्री अमरनाथ यात्रा गुरुवार को फिर शुरू हो गई। जम्मू के भगवती नगर स्थित संयुक्त पुलिस कंट्रोल रूम के अनुसार, तीर्थयात्रियों का 28वां जत्था कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच तड़के 2:45 बजे भगवती नगर यात्री निवास से बालटाल बेस कैंप के लिए रवाना हुआ।
देश भर में विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी और स्वस्थ आयु, वैवाहिक सुख और अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद पाने के लिए मंगला गौरी व्रत रखती हैं।
सावन मास के शुरू होते ही फतेहपुर जनपद के शिव मंदिरों में भक्तों की भीड़ जुटनी शुरू हो जाती है। शहर मुख्यालय स्थित अति प्राचीन सिद्धपीठ ताम्बेश्वर बाबा के मंदिर के महात्म्य को भक्ति व आस्था से भाव याद कर लोगों को बताते हैं कि भोले बाबा के दर्शन मात्र से जिला कारागार में बंद कैदी छूट जाते थे।
मानव जीवन के समस्त पापों, कष्टों और संतापों का शमन करने वाला पावन सावन मास आरंभ हो चुका है। देशभर के शिवालयों में श्रद्धालुओं का भीड़ उमड़ रही है। हर ओर "हर-हर महादेव" और "बम-बम भोले" के जयघोष गूंज रहे हैं। शिवभक्त भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा-अर्चना कर सुख, समृद्धि, आरोग्य और मोक्ष का आशीर्वाद प्राप्त करने की कामना कर रहे हैं।
आराध्य देव श्री गोविंद देवजी मंदिर में रविवार, 2 अगस्त को गर्भस्थ शिशु के सर्वांगीण विकास और कल्याण के उद्देश्य से निशुल्क 'पुंसवन संस्कार' का भव्य आयोजन किया जाएगा। यह धार्मिक व वैदिक अनुष्ठान प्रातः 7 बजे से प्रारंभ होगा। इस विशेष आयोजन में 3 से 5 माह की गर्भवती महिलाएं भाग ले सकती हैं।
सावन के साथ ही कांवड़ यात्रा भी पूरे उत्साह पर है। लाखों कांवड़िए पवित्र नदियों से गंगाजल लेकर पैदल यात्रा करते हुए विभिन्न शिवालयों में जलाभिषेक कर रहे हैं। प्रमुख मार्गों पर सुरक्षा, चिकित्सा, पेयजल और विश्राम शिविरों की विशेष व्यवस्था की गई है ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की परेशानी न हो।
मंदिर परिसर और पूरी देवघर नगरी "बोल बम", "हर-हर महादेव" और "बाबा नगरी" के जयघोष से भक्तिमय माहौल में डूबी रही। सुल्तानगंज से पैदल जल लेकर पहुंचे हजारों कांवड़िए लगातार बाबा के दरबार में पहुंच रहे हैं, जिससे श्रद्धालुओं की संख्या में लगातार बढ़ोतरी हो रही है।
झारखंड के बाबा बैद्यनाथ धाम, उज्जैन के महाकालेश्वर, काशी विश्वनाथ और अन्य प्रमुख शिवालयों में श्रद्धालुओं की लंबी कतारें देखी गईं। भक्त गंगाजल, बेलपत्र, धतूरा और अन्य पूजन सामग्री अर्पित कर भोलेनाथ का अभिषेक कर सुख-समृद्धि और परिवार की खुशहाली की कामना कर रहे हैं।
मंदिर प्रशासन ने श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए इस वर्ष अरघा सिस्टम के माध्यम से जलाभिषेक की व्यवस्था की है, जिससे दर्शन और पूजा की प्रक्रिया अधिक सुगम हो सके। भीड़ प्रबंधन के लिए लंबी कतारों को व्यवस्थित किया गया, जबकि जिला प्रशासन और पुलिस के अधिकारी लगातार व्यवस्थाओं की निगरानी करते रहे।
विश्व प्रसिद्ध पौराणिक तीर्थ के रूप में विख्यात भगवान श्रीराम की तपोभूमि चित्रकूट में गुरु पूर्णिमा का पर्व श्रद्धा, आस्था और भक्ति के साथ बड़े ही धूमधाम से मनाया गया। देश भर से आए लाखों शिष्यों ने देव गंगा मंदाकिनी में आस्था की डुबकी लगाने के बाद मनोकामनाओं के पूरक भगवान श्री कामतानाथ सरकार के दर्शन किये।
गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर शहर के श्री राधा कृष्ण प्रणामी मंदिर में श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक उल्लास का अद्भुत संगम देखने को मिला। सुबह से ही बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर पहुंचे और गुरु चरणों में नमन कर सुख-समृद्धि एवं मंगलमय जीवन की कामना की। मंदिर परिसर पूरे दिन भजन-कीर्तन, प्रवचन और धार्मिक अनुष्ठानों से भक्तिमय वातावरण में डूबा रहा।
इस पवित्र महीने में मंदिरों में लंबी कतारें लगती हैं, जहां भक्त शिवलिंग पर जल, दूध और बेल के पत्ते चढ़ाते हैं।
मेले के दौरान पहली बार AI तकनीक से लैस ड्रोन का इस्तेमाल किया जाएगा। ये ड्रोन भीड़ के घनत्व का विश्लेषण करेंगे, संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखेंगे और आवश्यकता पड़ने पर कंट्रोल रूम को तुरंत अलर्ट भेजेंगे। इससे भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाया जा सकेगा।
खराब मौसम के कारण छह दिनों तक रुकी रही सालाना अमरनाथ यात्रा शनिवार को जम्मू से फिर शुरू हो गई। अधिकारियों ने बताया कि 6,000 से ज़्यादा तीर्थयात्रियों का एक नया जत्था भगवती नगर बेस कैंप से कश्मीर घाटी में बालटाल बेस कैंप के लिए रवाना हुआ। 19 जुलाई को जम्मू-कश्मीर में लगातार बारिश और खराब मौसम के कारण एहतियात
तारापीठ मंदिर में श्रद्धालुओं की सुविधा, सुरक्षा और मंदिर की व्यवस्था को अधिक सुव्यवस्थित बनाने के उद्देश्य से तारामाता सेवायत संघ ने एक अगस्त से मंदिर की नई नियमावली लागू करने की घोषणा की है। मंदिर प्रशासन द्वारा जारी सूचना के अनुसार दर्शन, पूजा, भोग और आरती के समय में बदलाव किया गया है।
गुप्त नवरात्रि के पावन अवसर पर शहर के रुईधासा स्थित महाकाल मंदिर में रविवार को मां दुर्गा के पांचवें स्वरूप मां स्कन्दमाता की विधि-विधान एवं वैदिक मंत्रोच्चार के साथ विशेष पूजा-अर्चना की गई।
उत्तर प्रदेश की धार्मिक नगरी वाराणसी (काशी) के विश्वप्रसिद्ध तीन दिवसीय लक्खा रथयात्रा मेले के अंतिम दिन शनिवार को आस्था अपने चरम पर दिखाई दी। सुबह से ही हजारों श्रद्धालु रथयात्रा मेला क्षेत्र में पहुंचने लगे।
जम्मू के भगवती नगर यात्री निवास बेस कैंप से आज कड़ी सुरक्षा के बीच 3,632 अमरनाथ तीर्थयात्रियों का एक और जत्था दक्षिण कश्मीर हिमालय में स्थित गुफा मंदिर के दो बेस कैंपों के लिए रवाना हुआ। अधिकारियों ने बताया कि 3,632 तीर्थयात्री 148 गाड़ियों के काफिले में रवाना हुए।
पंद्रह दिनों तक एकांतवास के मौन में डूबा समूचा जगन्नाथपुर मंगलवार को एक बार फिर जय जगन्नाथ के उद्घोष से गुंजायमान हो उठा. 15 दिनों के अनवसर काल की समाप्ति के बाद, प्रभु जगन्नाथ, बलभद्र और देवी सुभद्रा ने जैसे ही
भगवान जगन्नाथ, भाई बलराम और बहन सुभद्रा का नेत्रदान अनुष्ठान बुधवार को तोरपा के जगन्नाथ मंदिर में विधि-विधान के साथ संपन्न हुआ। अज्ञातवास के बाद नेत्रदान के उपरांत मंदिर का पट खोला गया। पट खुलते ही दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी।
भक्त मंदिरों और आश्रमों में जाते हैं, अपने गुरुओं का आशीर्वाद लेते हैं और आध्यात्मिक चर्चाओं व प्रार्थनाओं में शामिल होते हैं।
सालाना अमरनाथ यात्रा के लिए रविवार सुबह कड़ी सुरक्षा के बीच 9,153 तीर्थयात्रियों का 11 वां जत्था जम्मू के भगवती नगर यात्री निवास से दक्षिण कश्मीर हिमालय में स्थित पवित्र गुफा मंदिर के लिए रवाना हुआ। सुरक्षा कर्मियों और सिविल प्रशासन ने जम्मू-श्रीनगर नेशनल हाईवे पर तीर्थयात्रियों की सुचारू आवाजाही सुनिश्चित की।
राम मंदिर निर्माण समिति की बैठक के तीसरे दिन रविवार को अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा ने दो दिवसीय बैठक की प्रगति की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि बैठक दो चरणों में संपन्न हुई और राम कथा संग्रहालय की कई महत्वपूर्ण बातें अंतिम रूप से तय कर दी गई हैं। संग्रहालय की सभी गैलरियों की स्क्रिप्ट फाइनल कर दी गई है
हर साल, लाखों भक्त पूरे महीने व्रत रखते हैं, शिव मंदिरों में जाते हैं और पूजा-अर्चना करते हैं।
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार कुल 4812 तीर्थयात्री 259 वाहनों के काफिले में बालटाल और पहलगाम के दो बेस कैंपों के लिए रवाना हुए। 2041 तीर्थयात्री बालटाल रूट से यात्रा कर रहे हैं जबकि 2,771 पहलगाम रूट से जा रहे हैं।"
अग्रसेन पथ स्थित श्री श्याम मंदिर में गुरुवार को निर्जला एकादशी उत्सव श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ मनाया गया। इस पावन अवसर पर सुबह से ही बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर पहुंचकर श्री श्याम प्रभु के दर्शन एवं पूजा-अर्चना में शामिल हुए।
मध्य प्रदेश के खंडवा जिले की तीर्थनगरी ओंकारेश्वर में अतिप्राचीन श्री ममलेश्वर महादेव मंदिर परिसर में स्थित श्री वृद्धकालेश्वर महादेव मंदिर में मंगलवार को विधिवत अभिजीत मुहूर्त में पूजन अर्चन के साथ भक्तों के लिए दर्शन शुरू कराए गए।






























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