उप्र के मीरजापुर में अदलपुरा स्थित बड़ी मां शीतला धाम में रविवार रात आस्था का अद्भुत नजारा देखने को मिला, जब काशी से हजारों की संख्या में भगत “बधावा” लेकर मां के दरबार पहुंचे। रात 11 बजे से लेकर भोर तक श्रद्धालुओं की लंबी कतारें मंदिर और घाट तक लगी रहीं।
विश्व संवाद केंद्र, जयपुर की ओर से प्रतिवर्ष आयोजित किए जाने वाले देवर्षि नारद पत्रकारिता सम्मान 2026 के लिए इस वर्ष भी प्रविष्टियां आमंत्रित की गई हैं। यह सम्मान पत्रकारिता के क्षेत्र में उत्कृष्ट और समाजहित में किए गए कार्यों के लिए चयनित पत्रकारों को देवर्षि नारद जयंती के अवसर पर आयोजित भव्य समारोह में प्रदान किया जाएगा।
मेसरा बस्ती में इस वर्ष भी 16 अप्रैल को मां रक्षा काली पूजा धूमधाम से मनाई जाएगी। शेखर परिवार की कुलदेवी के रूप में शुरू हुई यह परंपरा पिछले 163 वर्षों से निरंतर जारी है।
रांची के अग्रसेन पथ स्थित श्री श्याम मन्दिर में रविवार को कामदा एकादशी उत्सव अत्यंत श्रद्धा भाव के वातावरण में आयोजित किया गया ।
इस अवसर पर देवी दुर्गा के नौवें स्वरूप मां सिद्धिदात्री की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की गई। किशनगंज सहित देशभर के मंदिरों में श्रद्धालुओं ने विशेष प्रार्थनाएं कर सुख-समृद्धि की कामना की। महानवमी के अवसर पर शहर के प्रमुख मंदिरों में सुबह से ही श्रद्धालुओं
उपराजधानी दुमका सहित जिले के ग्रामीण इलाकों में रामनवमी के त्योहार मनाने की व्यापक तैयारी की गई है। दुमका सहित सभी जगहों में रामनवमी शुक्रवार को मनाया जाएगा। इसे लेकर सभी जगहों पर बजरंगबली के मंदिर की साफ-सफाई
धनबाद कोयलांचल में चैती महादुर्गा पूजा पूरे श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाई जा रही है। मंदिरों में भक्तों की भीड़ उमड़ रही है और हर कोई मां दुर्गा का आशीर्वाद लेने पहुंच रहा है। इसी कड़ी में झगराही गांव अपनी 350 साल पुरानी परंपरा को आज भी जीवित रखे हुए है।
लोक आस्था और सूर्य उपासना का महान पर्व चैती छठ रविवार को नहाय-खाय के साथ श्रद्धा और भक्ति के माहौल में शुरू हो गया। चार दिनों तक चलने वाला यह कठिन व्रत प्रकृति, शुद्धता और अनुशासन का प्रतीक माना जाता है
चैत्र शुक्ल तृतीया शनिवार को विभिन्न शुभ योग में सुहाग पर्व गणगौर धूमधाम से मनाया जाएगा। शाम को सिटी पैलेस के जनानी ड्योढ़ी से गणगौर की शाही सवारी निकलेगी। शाही ठाठबाट के साथ निकलने वाली गणगौर माता की सवारी के दौरान लोकरंग भी बिखरेंगे।
एसएसबी 56 वीं वाहिनी बथनाहा मुख्यालय में हिंदू नव वर्ष एवं नवरात्रि के पावन अवसर पर गुरुवार को मंदिर में विधिवत पूजा एवं कलश स्थापना की गई।
दौल (होली) महोत्सव को लेकर सत्र नगरी (मठ) बरपेटा में भारी उत्साह देखा जा रहा है। इस बार बरपेटा सत्र में श्री कृष्ण के इस दौल यात्रा महोत्सव का पांच दिवसीय आयोजन किया गया है। 2 मार्च को गंध यात्रा से महोत्सव की शुरुआत हुई। गंध उत्सव के अवसर पर सोमवार को सत्र के मणिकूट गृह
03 मार्च क़ो ही खग्रास चंद्रग्रहण संध्या बेला में 05.50 से 06.46 तक रहेगा.
इन दिनों शुभ कार्यों को स्थगित करने की सलाह दी जाती है क्योंकि धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, ग्रहों का प्रभाव काफी प्रबल होता है.
महाशिवरात्रि के पूर्व विजया एकादशी पर शुक्रवार शाम श्री काशी विश्वनाथ के विवाहोत्सव की रस्मों में हल्दी लगाने की परम्परा निभाई गई। विवाह के सगुन की हल्दी जब बाबा विश्वनाथ के रजत विग्रह को लगाई गई तो माहौल शिवमय हो गया। श्री काशी विश्वनाथ मंदिर के पूर्व महंत के टेढ़ीनीम स्थित आवास पर दुल्हा बने
योगियों के चार संप्रदायों सन्यासी, वैष्णव, नानक और उदासी में नागा बाबा सन्यासी परंपरा से संबंधित होते हैं.
महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर मुंबई स्थित श्री सिद्धिविनायक मंदिर की ओर से श्री काशी विश्वनाथ मंदिर में विशेष भेंट अर्पित की गई। ‘पुत्र’ सिद्धिविनायक धाम से ‘पिता’ श्री काशी विश्वनाथ के दरबार में फल, पुष्प एवं पूजनीय सामग्री श्रद्धापूर्वक भेजी गई।
एकादशी 12 फरवरी को दोपहर 12:22 बजे से शुरू होकर 13 फरवरी को दोपहर 2:25 बजे समाप्त होगी.
दो मार्च को शाम 5.18 बजे पूर्णिमा प्रवेश करेगी, जो तीन मार्च को शाम 4.33 बजे तक रहेगी.
भविष्य पुराण और पद्म पुराण जैसे ग्रंथों में बार-बार मिलता है.
हिंदुओं के प्रमुख तीर्थ स्थलों में से रामेश्वरम भी एक है। यहां आडी अमावस्या, थाई अमावस्या और महालय अमावस्या के दिन अग्नि तीर्थ समुद्र में पवित्र स्नान कर अपने पितरों को तिथि अर्पित करने की परंपरा है। आज थाई अमावस्या के दिन तमिलनाडु के विभिन्न जिलों और अन्य राज्यों से आधी रात से ही हजारों वाहन और सरकारी बसों के माध्यम से बड़ी संख्या में श्रद्धालु रामेश्वरम पहुंचे।
माघ मास की अमावस्या तिथि को मौनी अमावस्या के रूप में सनातनी मानते आए इस दिन श्रद्धालु पवित्र नदियों में स्नान कर दान-पुण्य करते हैं तथा मौन व्रत का पालन कर आत्म-चिंतन और साधना में लीन रहते हैं। पंचांग के अनुसार इस वर्ष मौनी अमावस्या रविवार 18 जनवरी को मनाई जाएगी।
23 जनवरी को सुबह से शाम तक माता की स्थापना और पूजा होगी.
उत्तर प्रदेश की धार्मिक नगरी वाराणसी (काशी)में मकर संक्रांति पर्व के दूसरे दिन शुक्रवार को भी बाबा विश्वनाथ के दरबार में दर्शन पूजन के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती रही। दशाश्वमेध और आसपास के घाटों पर पवित्र गंगा
ब्रज किशोर ज्योतिष संस्थान व फाउंडेशन डॉ रहमान चौक सहरसा के संस्थापक एवं प्रसिद्ध व चर्चित ज्योतिषाचार्य पंडित तरुण झा ने बतलाया कि माघ मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी का धार्मिक दृष्टि से काफी महत्व है
मकर संक्रांति के पावन अवसर पर गुरुवार को उत्तर प्रदेश के मीरजापुर जिले में मां विंध्यवासिनी धाम पर आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा। परंपरा के अनुरूप श्री विंध्य पंडा समाज की ओर से मां को 21 कुंतल खिचड़ी का महाभोग अर्पित किया गया।
उत्तराखंड कुमाऊं मंडल के अल्मोड़ा जिले में स्थित जागेश्वर धाम मंदिर की विशिष्ट पहचान है। यहां की पूजा परंपराएं भी अनूठी हैं। मकर संक्रांति पर आज भगवान शिव को घृत गुफा में स्थापित किया गया।
तमिलों का प्रमुख पर्व पोंगल पूरे तमिलनाडु में बड़े उत्साह और हर्षोल्लास के साथ मनाया जा रहा है। इस अवसर पर सभी घरों में उत्सव का माहौल देखने को मिल रहा है। पोंगल के लिए 14 जनवरी से 18 जनवरी तक स्कूल और कॉलेजों में 5 दिनों की छुट्टी घोषित की गई है।
माघ मेले के द्वितीय स्नान पर्व मकर संक्रांति पर संगम में आस्था की डुबकी लगाने के लिए श्रद्वालुओं का रेला लगा हुआ है। सुबह 8 बजे तक 21 लाख श्रद्धालुओं ने आस्था की डुबकी लगाई। सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। सभी घाटों की
जमशेदपुर शहर में बुधवार को षटतिला एकादशी के पावन अवसर पर श्रद्धा और भक्ति का विशेष माहौल देखने को मिला.
मकर संक्रांति पर गंगासागर में आज सुबह लाखों श्रद्धालुओं ने आस्था की डुबकी लगाकर पुण्य अर्जित किया। त्रेता युग में स्वर्ग से उतरी गंगा ने सागर तट पर स्थित कपिल मुनि के आश्रम के पास भस्म हुए राजा सगर के 60 हजार पुत्रों को स्पर्श कर जिस शुभ मुहूर्त में मोक्ष दिया था, उसी शुभ मुहूर्त में सदियों से गंगासागर स्नान की परंपरा है।
यह अनुष्ठान सादगीपूर्ण और लगभग शांत होता है. लोग आग के चारों ओर घूमते हैं और सुख-समृद्धि के लिए सरल प्रार्थना करते हैं.
कुछ लोगों का मानना है कि मकर संक्रांति 14 जनवरी, 2026 को होगी, जबकि कुछ अन्य लोगों का मानना है कि यह 15 जनवरी, 2026 को होगी
इस व्रत के दौरान महिलाएं सकट कथा सुनती हैं और शाम को भगवान गणेश की पूजा के लिए अनुष्ठान करती हैं.
ये दिन एकादशी व्रत रखने वालों के लिए व्रत रखने और भगवान विष्णु से अपना संबंध मजबूत करने का एक उत्कृष्ट अवसर होंगे.
वर्ष के दो दिन तुलसी पूजा के लिए विशेष महत्व रखते हैं: तुलसी विवाह और तुलसी पूजा दिवस.
उत्सव के तहत सुबह से अय्यरगल मंडप के समीप विशेष पूजा, होम-हवन और भक्ति कार्यक्रम संपन्न किए गए.
हिंदू संस्कृति और रीति-रिवाजों के अनुसार, एकादशी व्रत रखना अत्यंत शुभ माना जाता है.
मेन रोड गुरुद्वारा से 15 दिसंबर से 22 दिसंबर तक सुबह 4.30 बजे से प्रभात फेरी निकालने का फैसला लिया गया.
शादी-विवाह, गृह प्रव्श और मुंडन जैसे सभी शुभ कार्यों पर एक महीने के लिए रोक लग जाएगी.
रांची पहाड़ी बाबा का तिलकोत्सव 23 जनवरी को मनाया जाएगा.






















































