मिथिला विभूति पर्व समारोह में दिखी मैथिली संस्कृति की अनुपम छटा
कोलकाता
कोलकाता स्थित मैथिली भाषियों की सामाजिक संस्था मिथिला सेवा ट्रस्ट की ओर से आयोजित मिथिला विभूति पर्व समारोह में मिथिला की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत की अनुपम झलक देखने को मिली। प्रवासी मिथिलावासियों ने पूरे उत्साह और उल्लास के साथ कार्यक्रम में भाग लिया। यह दो दिवसीय आयोजन बागुईआटी के जर्दाबगान स्थित बंधुमहल क्लब परिसर में रविवार रात संपन्न हुआ।
उल्लेखनीय है कि इस परिसर में महाकवि विद्यापति की प्रतिमा स्थापित है तथा समीप ही शिव मंदिर भी अवस्थित है। लोकमान्यता के अनुसार, स्वयं भगवान शिव विद्यापति के घर ‘उगना’ के रूप में सेवक बनकर रहते थे।
समारोह के पहले दिन सामूहिक हनुमान चालीसा पाठ एवं अखंड अष्टयाम संकीर्तन का आयोजन किया गया, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय और आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर हो गया।
दूसरे दिन रविवार, 25 जनवरी को मैथिली के महान कवि विद्यापति की स्मृति में मिथिला विभूति पर्व का मुख्य समारोह आयोजित हुआ। कार्यक्रम का उद्घाटन संस्था के पदाधिकारियों एवं सदस्यों ने संयुक्त रूप से किया। साहित्य अकादेमी से सम्मानित वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. उदयनाथ झा ‘अशोक’ ने मुख्य वक्ता के रूप में मातृभाषा के महत्व और मिथिला संस्कृति की विशिष्ट पहचान पर सारगर्भित विचार रखे।
कार्यक्रम के दौरान विभिन्न क्षेत्रों की विभूतियों को सम्मानित किया गया। इनमें मिथिला अभियानी रत्नेश्वर झा को बाबू साहेब चौधरी सम्मान, समाजसेवी एवं ट्रस्ट के संस्थापक सदस्य रहे उग्रनाथ झा को मिथिला संकीर्तन मंडली सम्मान, तथा वरिष्ठ पत्रकार और समाचार एजेंसी हिन्दुस्थान समाचार के पश्चिम बंगाल ब्यूरो चीफ संतोष मधुप को जानकी संतति सम्मान से सम्मानित किया गया। इसके अलावा, राजारहाट–गोपालपुर विधानसभा की विधायक और सुप्रसिद्ध गायिका अदिति मुन्सी को उनके सामाजिक योगदान के लिए मिथिबंग गौरव सम्मान प्रदान किया गया।
मिथिला सेवा ट्रस्ट के संस्थापक अध्यक्ष रमाकांत झा ने बताया कि समारोह के दौरान जरूरतमंदों के बीच कंबल वितरण भी किया गया। साथ हीलेखक राधेश्याम झा द्वारा लिखित नाटक-पुस्तक ‘पारिजात हरण’ का विमोचन भी किया गया।
समारोह के सांस्कृतिक सत्र में ज्योति प्रिया, हेमकांत झा ‘प्यासा’, आलोक भारती सहित मिथिला के कई चर्चित कलाकारों ने गीत-संगीत और लोकनृत्य प्रस्तुत कर समां बांध दिया। देर रात तक उपस्थित दर्शक सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आनंद लेते रहे। सांस्कृतिक कार्यक्रम का सफल संचालन मिथिला के सुप्रसिद्ध उद्घोषक डॉ. रामसेवक ठाकुर ने किया।
इस आयोजन को सफल बनाने में मिथिला सेवा ट्रस्ट के सदस्य विजयकांत झा, ललन राय, सुनील कुमार झा, अमरनाथ मिश्र, शशिकांत झा, रमेश झा, राकेश राय, पंकज राय, आशीष ठाकुर, सीतेश ठाकुर, दीपक कुमार झा, कुंदन मंडल, नवीन चौधरी, शिवशंकर झा, सुनील प्रतिहस्त सहित अन्य सदस्यों की सक्रिय भूमिका रही।
ट्रस्ट के चेयरमैन रमाकांत झा ने कहा कि समाज और सदस्यों के सहयोग से ही यह कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न हो सका।















