तेहरान, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराकची ने बड़ा दावा करते हुए कहा है कि ईरान, अमेरिका-इज़रायल के साथ जारी संघर्ष को लंबे समय तक जारी रखने के लिए तैयार है। तेहरान कम-से-कम छह महीने तक युद्ध लड़ने की क्षमता रखता है और अपनी जवाबी सैन्य कार्रवाई जारी रखेगा।

अर्ध-सरकारी तसनीम न्यूज एजेंसी के मुताबिक, अलजजीरा को दिए इंटरव्यू में अराकची ने कहा कि ईरान अपने दुश्मनों द्वारा तय किसी भी समय-सीमा को नहीं मानता और अपनी सुरक्षा के लिए हरसंभव कदम उठाता रहेगा।

उन्होंने अमेरिका के साथ बातचीत के दावों को खारिज करते हुए कहा कि फिलहाल ईरान और अमेरिका के बीच कोई औपचारिक वार्ता नहीं चल रही है। हालांकि, दोनों देशों के बीच सीधे और परोक्ष रूप से संदेशों का आदान-प्रदान जारी है, जिसे बातचीत नहीं कहा जा सकता।

ईरान के विदेश मंत्री ने कहा कि किसी भी संभावित वार्ता का निर्णय ईरान के सर्वोच्च नेतृत्व द्वारा लिया जाएगा और इसका मुख्य उद्देश्य देश के हितों की रक्षा होगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि ईरान सिर्फ अस्थायी युद्धविराम नहीं बल्कि पूरे क्षेत्र में स्थायी शांति और युद्ध की पूर्ण समाप्ति चाहता है।

होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर उन्होंने कहा कि यह फिलहाल खुला है लेकिन युद्ध की स्थिति में दुश्मन देशों के जहाजों को इसकी अनुमति नहीं दी जाएगी। उन्होंने चेतावनी दी कि ईरान किसी भी तरह की धमकी या चेतावनी को स्वीकार नहीं करेगा।

विदेश मंत्री ने यह भी दोहराया कि ईरान की तरफ से अमेरिका के 15-सूत्रीय प्रस्ताव पर अभी तक कोई प्रतिक्रिया नहीं दी गई है। उन्होंने उन रिपोर्टों को भी सिरे से खारिज कर दिया जिनमें कहा गया था कि ईरान ने पाँच शर्तें रखी हैं। उन्होंने इन रिपोर्टों को मीडिया की अटकल करार देते हुए दोहराया कि अमेरिका के प्रस्ताव पर अबतक कोई प्रतिक्रिया नहीं दी गई है। ईरान इस संबंध में कई पहलुओं पर विचार कर रहा है। विदेश मंत्री ने स्पष्ट किया कि युद्ध को समाप्त करने के लिए ईरान की शर्तें पूरी तरह से स्पष्ट हैं।

ईरान के बुनियादी ढाँचे और ऊर्जा संसाधनों पर हमले की धमकियों के बारे में अराक़ची ने कहा कि ईरान की कई बार परीक्षा ली जा चुकी है और वह किसी भी तरह की 'अल्टीमेटम' (अंतिम चेतावनी) को स्वीकार नहीं करता।

होर्मुज जलडमरूमध्य के बारे में अराकची ने कहा कि यह अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र नहीं बल्कि ईरान और ओमान के 'आंतरिक जल-क्षेत्र' में आता है। इसलिए, दोनों देशों के हितों का ध्यान रखना जरूरी है। उन्होंने कहा कि यह जलडमरूमध्य फिलहाल खुला हुआ है लेकिन उन देशों के जहाजाें के लिए बंद है जो ईरान के साथ युद्ध की स्थिति में हैं।

बाब अल-मंडेब और लाल सागर तक फैलने की संभावना के संबंध में कहा कि यह मामला उस क्षेत्र के देशों, विशेष रूप से यमन से जुड़ा है, जिसकी अपनी नीतियां हैं। उन्होंने कहा कि यदि ऐसे पक्ष कोई कार्रवाई करने का निर्णय लेते हैं तो यह उनका अपना निर्णय होगा। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि ईरान किसी से सहायता की अपेक्षा नहीं करता और अपनी रक्षा करने में सक्षम है।