झारखंड में मातृ-शिशु मृत्यु दर पर बढ़ी चिंता, स्वास्थ्य विभाग ने दिए सख्त निर्देश
रांची, झारखंड के स्वास्थ्य विभाग ने मातृ एवं शिशु मृत्यु दर
के मामले में कड़ा रुख अपनाया है। बुधवार को नेपाल हाउस में आयोजित एक
समीक्षा बैठक के दौरान इस मुद्दे पर विस्तृत चर्चा हुई। बैठक की अध्यक्षता
स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह ने की। इस बैठक में कई
महत्वपूर्ण और चिंताजनक तथ्य सामने आए।
बैठक में प्रस्तुत आंकड़ों
के अनुसार, मातृ मृत्यु के प्रमुख कारणों में प्रसव के बाद अत्यधिक
रक्तस्राव 15.5 प्रतिशत मामलों में सबसे अधिक पाया गया। इसके अलावा उच्च
रक्तचाप या एक्लेम्पसिया 12.5 प्रतिशत तथा संक्रमण (सेप्सिस) 6.9 प्रतिशत
मामलों में मृत्यु का कारण बना। वहीं शिशु मृत्यु के मामलों में सेप्सिस,
श्वसन संबंधी समस्याएं, निमोनिया और समय से पूर्व जन्म को प्रमुख कारणों के
रूप में चिन्हित किया गया।
अपर मुख्य सचिव ने सभी जिलों को निर्देश
दिया कि वे मातृ और शिशु मृत्यु के प्रत्येक मामले का गहन विश्लेषण करें
और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए ठोस कार्ययोजना तैयार करें।
उन्होंने रिपोर्टिंग की गुणवत्ता और सटीकता बनाए रखने पर जोर देते हुए
प्रत्येक मातृ मृत्यु मामले में वर्बल ऑटोप्सी अनिवार्य रूप से कराने का
निर्देश दिया।
समीक्षा के दौरान यह भी सामने आया कि खूंटी, लोहरदगा,
रामगढ़, साहिबगंज और सिमडेगा जिलों ने एचएमआईएस पोर्टल पर मातृ मृत्यु की
100 प्रतिशत रिपोर्टिंग सुनिश्चित की है, जबकि कुछ अन्य जिलों ने लक्ष्य से
अधिक रिपोर्टिंग दर्ज की है।
स्वास्थ्य विभाग ने संस्थागत प्रसव की
गुणवत्ता में सुधार, नर्सिंग स्टाफ के प्रशिक्षण को मजबूत करने और
स्वास्थ्य संस्थानों में आवश्यक संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करने पर
विशेष बल दिया। विभाग का मानना है कि इन उपायों से मातृ एवं शिशु मृत्यु दर
में उल्लेखनीय कमी लाई जा सकती है।
बैठक में स्वास्थ्य विभाग के कई अधिकारी, पदाधिकारी और संबंधित कर्मी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।














