रांची,   पाकुड़ और गोड्डा जिले के सेवानिवृत्त प्राथमिक शिक्षकों को झारखंड उच्च न्यायालय से बड़ी राहत मिली है। उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति दीपक रोशन की अदालत ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि प्रार्थियों को उनकी नियुक्ति तिथि से ग्रेड-वन का लाभ छह सप्ताह के भीतर दिया जाए।

मामले में भीम सिंह सहित अन्य प्रार्थियों ने उच्च न्यायालय में रिट याचिका दाखिल की थी। सुनवाई के दौरान प्रार्थियों की ओर से अधिवक्ता अभिजीत कुमार सिंह और हर्ष चंद्र ने पक्ष रखते हुए बताया कि राज्य सरकार ने एक संकल्प के जरिए कार्यरत शिक्षकों को नियुक्ति तिथि से ग्रेड-वन का लाभ देने का निर्णय लिया था, लेकिन सेवानिवृत्त शिक्षकों को इस लाभ से वंचित कर दिया गया।

याचिकाकर्ताओं ने अदालत को यह भी अवगत कराया कि इसी मुद्दे से जुड़े एक अन्य मामले में उच्च न्यायालय पहले ही राज्य सरकार के संकल्प की उस कंडिका को रद्द कर चुका है, जिसमें सेवानिवृत्त शिक्षकों को इस लाभ से बाहर रखा गया था। अदालत ने उस मामले में सभी सेवानिवृत्त शिक्षकों को नियुक्ति तिथि से ग्रेड-वन का लाभ देने का आदेश दिया था।

सरकार की ओर से उक्त आदेश को उच्च एवं उच्चतम न्यायालय में चुनौती दी गई थी, लेकिन दोनों स्तरों पर सरकार को राहत नहीं मिल सकी। प्रार्थियों ने यह भी दलील दी कि उनका प्रशिक्षण कराना सरकार की जिम्मेदारी थी, लेकिन सरकार ने ऐसा नहीं किया। इसके बावजूद उन्होंने स्वयं प्रशिक्षण प्राप्त किया, फिर भी उन्हें नियुक्ति तिथि से ग्रेड-वन का लाभ नहीं दिया गया।

सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने कहा कि जब इस मुद्दे पर पूर्व में ही निर्णय दिया जा चुका है, तो वर्तमान प्रार्थियों को भी उसी आधार पर लाभ मिलना चाहिए। अदालत ने निर्देश दिया कि प्रार्थियों को छह सप्ताह के भीतर नियुक्ति तिथि से ग्रेड-वन का लाभ दिया जाए।

उल्लेखनीय है कि राज्य सरकार ने 18 जुलाई 2019 को एक संकल्प जारी कर वर्तमान कार्यरत शिक्षकों को यह लाभ प्रदान किया था, लेकिन सेवानिवृत्त शिक्षकों को इससे बाहर रखा गया था, जिसे अब न्यायालय के आदेश के बाद लागू करना होगा।