डीएम के आह्वान पर संस्कृत व मिथिलाक्षर में मिला सदियों पुराना इतिहास
सुपौल, जिले की खोई हुई बौद्धिक विरासत को वापस लाने के लिए
जिलाधिकारी सावन कुमार के नेतृत्व में शुरू किया गया ज्ञान भारतम् मिशन के
तहत पांडुलिपि खोज अभियान अब रंग लाने लगा है। इस मुहिम के तहत त्रिवेणीगंज
की युवा दीपिका चन्द्रा ने सदियों पुराने इतिहास को खोज निकाला है। इनके
पास से 20 ऐसी पांडुलिपियां मिली हैं, जो 153 से लेकर 350 साल तक पुरानी
हैं। गुड़िया पंचायत के बेलापट्टी निवासी दीपिका चंद्रा के पास ये दुर्लभ
हस्तलिखित ग्रंथ सुरक्षित हैं।
दीपिका को ये पांडुलिपियां उनके
पूर्वज और मलाढ़ निवासी कृपानंद झा एवं बिमलानंद झा से विरासत में मिली
थीं। वहीं, माय भारत के पूर्व वॉलंटियर इन्दल कुमार इस मिशन के पहले दिन से
ही ऐसी धरोहरों को ढूंढने के लिए गांव गांव में सर्वेक्षण कार्य कर रहे
हैं। ये ग्रंथ मुख्य रूप से संस्कृत भाषा और मिथिलाक्षर लिपि में लिखे गए
हैं। इनमें से कुछ पांडुलिपियां 350 वर्ष पुरानी हैं, जो सुपौल के समृद्ध
इतिहास को दर्शाती हैं। ये दस्तावेज उस समय की लेखन कला, तकनीकी समझ और
बौद्धिक स्तर का जीवंत प्रमाण हैं।
युवाओं के उत्साह को देखते हुए
उप विकास आयुक्त सारा अशरफ ने कहा कि यह पहल अतुलनीय है। अपनी जड़ों को
खोजने का यह जुनून अन्य युवाओं के लिए प्रेरणा है जिलाधिकारी, सावन कुमार
ने जिले के समस्त नागरिक बंधुओं से अपील की है कि अगर आपके पास, किसी मठ,
मंदिर या पुरानी लाइब्रेरी में ऐसी कोई भी हस्तलिखित सामग्री है, तो उसे
प्रशासन से साझा करें। योगदान देने वाले व्यक्तियों को जिला स्तर पर
सम्मानित किया जाएगा। जिला प्रशासन की यह कोशिश न केवल पुरानी यादों को
सहेज रही है, बल्कि नई पीढ़ी को यह बता रही है कि उनके पुरखे ज्ञान-विज्ञान
में कि
तने धनी थे।















