कोलकाता,   सिंगूर में कारखाना स्थापित न होने के मामले में टाटा कंपनी को 765.78 करोड़ रुपये मुआवज़ा देने के आदेश पर कलकत्ता उच्च न्यायालय ने अस्थायी रोक लगा दी है। न्यायमूर्ति अनिरुद्ध राय की पीठ ने इस आदेश पर आठ सप्ताह के लिए स्थगन दिया है।

न्यायालय ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि वह आठ सप्ताह के भीतर बैंक की जमानत राशि जमा करे। यह मामला पूर्व तृणमूल सरकार की ओर से दायर याचिका के आधार पर उच्च न्यायालय में विचाराधीन है।

इससे पहले मध्यस्थता न्यायाधिकरण के निर्णय को लेकर राज्य सरकार की आपत्ति का मामला सर्वोच्च न्यायालय तक पहुंचा था। आठ अगस्त 2025 को सर्वोच्च न्यायालय ने मध्यस्थता न्यायाधिकरण के निर्णय को बरकरार रखते हुए कहा था कि मुआवज़े से जुड़ा विषय कलकत्ता उच्च न्यायालय में ही सुना जाएगा। इसके बाद 12 अगस्त को न्यायमूर्ति अनिरुद्ध राय की पीठ में इस मामले की सुनवाई शुरू हुई थी और बाद में भी कई बार सुनवाई हुई।

उल्लेखनीय है कि अक्टूबर 2023 में तीन सदस्यीय मध्यस्थता न्यायाधिकरण ने आदेश दिया था कि सिंगूर में कारखाना स्थापित न हो पाने के कारण टाटा कंपनी को 765.78 करोड़ रुपये मुआवज़ा दिया जाए। इसके साथ ही एक सितंबर 2011 से भुगतान की तिथि तक प्रतिवर्ष 11 प्रतिशत की दर से ब्याज तथा मुकदमे के खर्च के रूप में अतिरिक्त एक करोड़ रुपये देने का भी निर्देश दिया गया था। यह राशि पश्चिम बंगाल औद्योगिक विकास निगम को देने के लिए कहा गया था।

इसी निर्णय को चुनौती देते हुए उस समय की राज्य सरकार ने कलकत्ता उच्च न्यायालय का दरवाज़ा खटखटाया था।