ट्यूनीशिया में पत्रकार जियेद हेनी को एक साल की जेल
ट्यूनिस, ट्यूनीशिया की एक अदालत ने चर्चित पत्रकार जियेद हेनी को
न्यायपालिका की आलोचना करने के मामले में एक वर्ष की जेल की सजा सुनाई है।
इस फैसले के बाद देश में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और प्रेस की आजादी को
लेकर बहस तेज हो गई है।
जियेद हेनी को पिछले महीने उस समय हिरासत
में लिया गया था, जब उन्होंने एक लेख में न्यायपालिका के एक फैसले की
आलोचना की थी। उनके वकील नफा लारी बी ने अदालत के फैसले को “कठोर” बताते
हुए कहा कि यह ट्यूनीशिया में स्वतंत्र अभिव्यक्ति पर बढ़ती पाबंदियों को
और मजबूत करता है।
सजा सुनाए जाने से एक दिन पहले हेनी ने जेल से
अपने परिवार के माध्यम से एक पत्र जारी किया था। इसमें उन्होंने कहा कि वह
इस मामले में किसी भी फैसले के खिलाफ अपील नहीं करेंगे क्योंकि वह इस
मुकदमे को वैध नहीं मानते। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके अधिकारों का
उल्लंघन किया जा रहा है।
मानवाधिकार संगठनों और पत्रकार संगठनों का
कहना है कि राष्ट्रपति कैस सईद के सत्ता केंद्रीकरण के बाद देश में
स्वतंत्र आवाजों पर दबाव लगातार बढ़ा है। वर्ष 2021 में राष्ट्रपति सईद ने
निर्वाचित संसद को भंग कर दिया था और बाद में अध्यादेशों के जरिए शासन शुरू
किया। इसके बाद 2022 में उन्होंने सुप्रीम ज्यूडिशियल काउंसिल को भी भंग
कर कई न्यायाधीशों को पद से हटा दिया था। विपक्षी दलों ने तब आरोप लगाया था
कि इससे न्यायपालिका की स्वतंत्रता कमजोर हुई है।
हालांकि
राष्ट्रपति सईद इन आरोपों को खारिज करते रहे हैं। उनका कहना है कि उन्होंने
न्यायपालिका में फैले भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई की है और देश में
स्वतंत्रता पूरी तरह सुरक्षित है।
उल्लेखनीय है कि 2011 में
ट्यूनीशिया में हुए जनआंदोलन के बाद अभिव्यक्ति की आजादी में काफी विस्तार
हुआ था और इसी आंदोलन ने “अरब स्प्रिंग” की शुरुआत की थी लेकिन हाल के
वर्षों में विपक्षी नेताओं, पत्रकारों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और
कारोबारियों की गिरफ्तारी ने लोकतांत्रिक संस्थाओं की स्थिति को लेकर गंभीर
चिंताएं पैदा कर दी हैं।














