कोलकाता,  स्वर्ण कारोबारी की हत्या के मामले में आरोपित राजगंज के पूर्व बीडीओ प्रशांत बर्मन को लेकर गुरुवार को कलकत्ता हाई कोर्ट ने राज्य सरकार और प्रशासन की भूमिका पर कड़े सवाल उठाए। कोर्ट ने सवाल किया कि एक सरकारी अधिकारी के फरार होने के बावजूद उसे सरकारी कोष से वेतन कैसे दिया जा रहा है। कोर्ट ने यह भी पूछा कि प्रशांत बर्मन को निलंबित किया गया है या सेवा से बर्खास्त किया गया है और इस मामले में जिलाधिकारी क्या कार्रवाई कर रहे हैं।

मुख्य न्यायाधीश रविंद्र वी. घुगे और न्यायमूर्ति तपोब्रत चक्रवर्ती की खंडपीठ में मामले की सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से बताया गया कि जुलाई में मामले की जांच सीआईडी ने अपने हाथ में ली है। प्रशांत बर्मन की तलाश जारी है और उसके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट भी जारी है। लेकिन अभी तक उसे गिरफ्तार नहीं किया जा सका है। इस मामले में एक से अधिक आरोपपत्र दाखिल किए जा चुके हैं, लेकिन किसी भी आरोपपत्र में प्रशांत बर्मन का नाम नहीं है। इस पर अदालत ने टिप्पणी की, “यह कैसा अजीब आरोपपत्र है?”

मामले में एक स्वयंसेवी संगठन की ओर से याचिका दायर की गई है। याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अभ्रतोष मजूमदार ने अदालत को बताया कि मामला अत्यंत गंभीर और दुर्लभ प्रकृति का है। उन्होंने आरोप लगाया कि एफआईआर और आरोपपत्र से संबंधित अतिरिक्त हलफनामे में भी कई विसंगतियां हैं तथा आरोपित का नाम आरोपपत्र में शामिल नहीं किया गया है।

सुनवाई के दौरान प्रशांत बर्मन की ओर से अधिवक्ता विश्वरूप भट्टाचार्य ने जवाबी हलफनामा दाखिल करने की अनुमति मांगी। इस पर मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने उनके मुवक्किल की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी थी और उन्हें आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया था। इसके बावजूद उन्होंने शीर्ष अदालत के आदेश का पालन नहीं किया। मुख्य न्यायाधीश ने टिप्पणी की, “वह तो बहुत प्रभावशाली व्यक्ति हैं।”

अदालत ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि प्रशांत बर्मन की तलाश की जाए। मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि वह देश से गायब नहीं हुए हैं। न्यायमूर्ति तपोब्रत चक्रवर्ती ने भी सवाल किया कि एक फरार आरोपित को सरकारी कोष से वेतन कैसे मिल रहा है। उन्होंने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि एक व्यक्ति खुलेआम घूम रहा है, हाई कोर्ट में मुकदमा लड़ने के लिए वकील कर रहा है और प्रशासन उसे गिरफ्तार नहीं कर पा रहा है।

पीठ ने प्रशांत बर्मन से जुड़े एक अन्य मामले को लेकर भी राज्य से जवाब मांगा। अदालत को बताया गया कि 25 मई की देर रात न्यू टाउन के इको पार्क इलाके में कथित तौर पर नशे की हालत में वाहन चलाते हुए एक राहगीर को टक्कर मारने के आरोप में उन्हें हिरासत में लिया गया था। बाद में मोटर वाहन अधिनियम के तहत उन्हें गिरफ्तार किया गया और जमानत मिल गई। अदालत ने सवाल किया कि उस समय पुलिस ने यह पता लगाने की कोशिश क्यों नहीं की कि किसी अन्य मामले में भी उन्हें गिरफ्तार करने की आवश्यकता है या नहीं। अदालत ने राज्य को इस संबंध में पूरी जानकारी देने का निर्देश दिया है।

स्वर्ण कारोबारी स्वपन कामिल्या के अपहरण और हत्या के मामले में प्रशांत बर्मन का नाम सामने आया था। परिवार की शिकायत के अनुसार, 28 अक्टूबर 2025 को कुछ लोग स्वपन को उनकी दुकान से कथित तौर पर उठाकर ले गए थे। बाद में उनका शव बरामद हुआ। निचली अदालत से मिली अग्रिम जमानत को कलकत्ता हाई कोर्ट ने खारिज कर दिया था, जिसके बाद उनके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी हुआ और आत्मसमर्पण का निर्देश दिया गया।

प्रशांत बर्मन ने हाई कोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। शीर्ष अदालत ने इस वर्ष 23 जनवरी तक उन्हें आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया था, लेकिन निर्धारित समय सीमा के भीतर उन्होंने आत्मसमर्पण नहीं किया। इसके बाद राजगंज के बीडीओ पद पर भी बदलाव किया गया और नए अधिकारी की नियुक्ति कर दी गई। हालांकि, पूर्व बीडीओ प्रशांत बर्मन को अब तक किस पद पर तैनात किया गया है, इसकी स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है। जिसको लेकर अदालत ने राज्य सरकार से प्रशासनिक स्थिति स्पष्ट करने को कहा है।

अदालत ने राज्य सरकार को तीन सप्ताह के भीतर रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है। इसके बाद मामले की अगली सुनवाई होगी।