चंपाई सोरेन ने खनिज सेस पर हेमंत सरकार को घेरा, बोले- राजस्व घटने और अवैध खनन को बढ़ावा देने की जिम्मेदारी तय करे सरकार
पूर्वी
सिंहभूम, झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन ने
खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 को लेकर राज्य सरकार
पर निशाना साधा है। उन्होंने आरोप लगाया कि खनिज क्षेत्र से जुड़े
वास्तविक आंकड़े सामने रखने के बजाय जनता को भ्रमित किया जा रहा है।
रविवार
को एक्स पर जारी बयान में चंपाई सोरेन ने कहा कि संशोधन के बाद भी
रॉयल्टी, नीलामी प्रीमियम, जिला खनिज फाउंडेशन ट्रस्ट (डीएमएफटी) और
राष्ट्रीय खनिज अन्वेषण ट्रस्ट से राज्य को मिलने वाली आय पर कोई बड़ा असर
नहीं पड़ेगा।
उन्होंने कहा कि वर्ष 2024-25 में सेस से राज्य को
करीब 7,486 करोड़ रुपये प्राप्त हुए। 16 हजार से 22 हजार करोड़ रुपये के
संभावित नुकसान के दावों पर सवाल उठाते हुए उन्होंने पूछा कि जब राज्य में
कोयला और लौह अयस्क का उत्पादन लगातार घट रहा है, तो सेस की आय तीन से चार
गुना बढ़ने का आधार क्या है।
चंपाई सोरेन ने दावा किया कि झारखंड
में कोयले पर 450 रुपये प्रति टन और लौह अयस्क पर 600 रुपये प्रति टन सेस
लगाए जाने से खनिजों की कीमत बढ़ी है। उन्होंने कहा कि झारखंड में थर्मल
कोयले की कीमत करीब 2,459 रुपये प्रति टन है, जबकि ओडिशा में इसी ग्रेड का
कोयला लगभग 1,708 रुपये और पश्चिम बंगाल में 1,741 रुपये प्रति टन उपलब्ध
है। उनके अनुसार, कीमतों में इस अंतर से उद्योगों पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा
है और अवैध कारोबार को बढ़ावा मिलने की आशंका है।
पूर्व मुख्यमंत्री
ने दावा किया कि सेस लगाए जाने के बाद झारखंड में कोयला और लौह अयस्क के
उत्पादन में करीब 12 से 15 प्रतिशत की गिरावट आई है। उन्होंने बीसीसीएल के
उत्पादन में लगभग 50 लाख टन की कमी, सीसीएल के मुनाफे में 27 प्रतिशत की
गिरावट और ईसीएल को 966 करोड़ रुपये के नुकसान का भी दावा किया।
पूर्व
मुख्यमंत्री ने कहा कि 2014 के बाद राज्यों की खनन आय में करीब 354
प्रतिशत की वृद्धि हुई है और खनन राजस्व का लगभग 90 प्रतिशत हिस्सा राज्यों
को मिलता है। ओडिशा का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि 35 नीलाम खनिज
ब्लॉक शुरू होने से वहां करीब 87 हजार करोड़ रुपये का नीलामी प्रीमियम
प्राप्त हुआ।
भाजपा नेता ने दावा किया कि ओडिशा का वार्षिक खनन
राजस्व 2019-20 के 13,700 करोड़ रुपये से बढ़कर औसतन 45 से 50 हजार करोड़
रुपये तक पहुंच गया। इसके विपरीत झारखंड का खनन राजस्व 2020-21 के करीब
7,500 करोड़ रुपये से बढ़कर 2024-25 में लगभग 11,900 करोड़ रुपये ही हो
पाया।
उन्होंने राज्य सरकार से स्वीकृत खदानों को शुरू कराने, रोजगार बचाने और अवैध खनन पर प्रभावी रोक लगाने की मांग की।














