स्वामी आशुतोष तीर्थ ने साधना, सेवा और परमार्थ से समाज को दी दिशा : रविंद्र पुरी
हरिद्वार, अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष एवं महानिर्वाणी
अखाड़े के सचिव श्रीमहंत रविंद्र पुरी महाराज ने कहा कि स्वामी आशुतोष
तीर्थ का अल्पायु में ब्रह्मलीन होना संत समाज के लिए अपूरणीय क्षति है।
संत का जीवन परमार्थ व समाज कल्याण के लिए होता और स्वामी आशुतोष तीर्थ ने
आध्यात्मिक साधना, सेवा और परमार्थ के माध्यम से समाज को दिशा देने का काम
किया।
आज भूपतवाला रानी गली स्थित संत वाटिका आश्रम में स्वामी
आशुतोष तीर्थ महाराज के ब्रह्मलीन होने पर आयोजित श्रद्धांजलि सभा में
श्रीमहंत रविंद्र पुरी ने कहा कि जन्म और मृत्यु शाश्वत सत्य हैं, लेकिन
किसी संत का कम उम्र में ब्रह्मलीन होना अत्यंत कष्टदायी है। संतों का जीवन
समाज के लिए प्रेरणास्रोत होता है और उनके विचार अनुयायियों को धर्म एवं
सेवा के मार्ग पर आगे बढ़ने की प्रेरणा देते हैं।
स्वामी
महेश्वरानंद सरस्वती महाराज ने कहा कि स्वामी आशुतोष तीर्थ का जीवन धर्म और
अध्यात्म से जुड़ा रहा। संत देह रूप में हमारे बीच न रहें, फिर भी उनके
संस्कार और सेवा कार्य समाज का मार्गदर्शन करते रहते हैं।
उल्लेखनीय
है कि स्वामी आशुतोष तीर्थ महाराज ने 15 अगस्त को देह त्यागी थी।
श्रद्धांजलि सभा में स्वामी कृष्णानंद गिरि, स्वामी कमलानंद गिरि, महंत
बंसी पुरी महाराज समेत अनेक संत मौजूद रहे। भक्त राकेश मलिक सहित अन्य
श्रद्धालुओं ने भी श्रद्धासुमन अर्पित किए।
इस अवसर पर उपस्थित
संतों और श्रद्धालुओं ने स्वामी आशुतोष तीर्थ के बताए सेवा एवं परमार्थ के
मार्ग पर चलने का संकल्प लिया। बाद में भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें
बड़ी संख्या में संतों और श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया।












