पति के स्वागत में आरती उतारना पड़ा महंगा, जदयू ने संगीता यादव को दल से किया निष्कासित
सीवान, सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से राजद प्रत्याशी प्रो. जयराम यादव के स्वागत में आरती उतारना जदयू की प्रदेश सचिव एवं सीवान जिला परिषद अध्यक्ष संगीता यादव को महंगा पड़ गया। जदयू ने उन्हें पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से मुक्त करते हुए छह वर्षों के लिए दल से निष्कासित कर दिया है।
संगीता यादव द्वारा अपने पति प्रो. जयराम यादव के सीवान आगमन पर स्वागत के दौरान आरती उतारने के बाद यह कार्रवाई की गयी है। जदयू के प्रदेश महासचिव सह मुख्यालय प्रभारी शंभु कुशवाहा ने 18 सितंबर 2026 को निष्कासन पत्र जारी किया।
प्रदेश अध्यक्ष के निर्देश पर जारी पत्र में कहा गया है कि संगीता यादव दल-विरोधी कार्यों में संलिप्त पायी गयी हैं। इसके कारण उन्हें पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से मुक्त करते हुए छह वर्षों के लिए दल से निष्कासित किया जाता है। संगीता यादव जदयू की प्रदेश सचिव होने के साथ सीवान जिला परिषद की अध्यक्ष भी हैं। ऐसे में उनके खिलाफ पार्टी की यह कार्रवाई सीवान की राजनीतिक गलियों में चर्चा का विषय बन गयी है।
खास बात यह है कि जिस व्यक्ति के स्वागत को लेकर कार्रवाई हुई, वह उनके पति प्रो. जयराम यादव हैं और वे सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से राजद के प्रत्याशी हैं। राजद की ओर से 11 सितंबर को जारी उम्मीदवारों की सूची में प्रो. जयराम यादव को सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से प्रत्याशी घोषित किया गया था। जदयू जिलाध्यक्ष विकास कुमार सिंह उर्फ जीशू सिंह ने संगीता यादव के निष्कासन की पुष्टि की है। पार्टी के पत्र में कार्रवाई का आधार दल-विरोधी गतिविधियों को बताया गया है, लेकिन इन गतिविधियों का विस्तृत विवरण नहीं दिया गया है। ऐसे में राजनीतिक हलकों में यह सवाल भी उठ रहा है कि पति के चुनावी स्वागत में सार्वजनिक रूप से शामिल होना पार्टी अनुशासन के लिए कितना बड़ा उल्लंघन माना गया कि प्रदेश सचिव जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी संभाल रहीं नेता को सीधे छह वर्षों के लिए निष्कासित कर दिया गया।
सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में चुनावी गतिविधियां तेज होने के बीच जदयू की इस कार्रवाई ने सीवान की राजनीति को और गरमा दिया है। एक ओर पति राजद के प्रत्याशी के तौर पर चुनाव मैदान में हैं, वहीं पत्नी पर जदयू ने दल-विरोधी गतिविधियों का आरोप लगाकर संगठन से बाहर का रास्ता दिखा दिया है। अब इस कार्रवाई के राजनीतिक और संगठनात्मक असर को लेकर भी चर्चा शुरू हो गयी है। संगीता यादव की ओर














