झारखंड में दूसरे राज्यों के इनपुट से खुल रहीं अवैध गन फैक्ट्रियां, हथियारों की बरामदगी ने बढ़ाई चिंता; लोकल इंटेलिजेंस पर उठे सवाल
रांची: झारखंड में अवैध हथियार निर्माण के खिलाफ हाल के दिनों में हुई कार्रवाइयों ने एक बड़े अंतरराज्यीय नेटवर्क की ओर जांच एजेंसियों का ध्यान खींचा है। खास बात यह है कि कई मामलों में कार्रवाई दूसरे राज्यों की पुलिस या STF से मिले इनपुट के बाद हुई। इससे स्थानीय स्तर पर पुलिस के खुफिया तंत्र और बीट स्तर की निगरानी को लेकर सवाल उठ रहे हैं। हाल के मामलों में बिहार STF के इनपुट पर झारखंड पुलिस के साथ संयुक्त कार्रवाई में अवैध मिनी गन फैक्ट्रियों का पता चला है। सितंबर 2026 में गोड्डा के महागामा में हुई कार्रवाई इसका ताजा उदाहरण है। यहां संयुक्त टीम ने हथियार बनाने की मशीनरी और अर्द्धनिर्मित हथियार बरामद किए। 16 सितंबर को बिहार STF की टीम एक मामले में आरोपी पवन कुमार तुरी की तलाश और सत्यापन के लिए महागामा पहुंची थी। इसके बाद झारखंड पुलिस के साथ संयुक्त कार्रवाई में घाट बलिया गांव स्थित एक परिसर में अवैध हथियार निर्माण की गतिविधि का खुलासा हुआ। पुलिस के अनुसार, कार्रवाई के दौरान अर्द्धनिर्मित हथियार, पिस्टल के पार्ट्स, मशीनें, ड्रिलिंग और लेथ मशीन समेत अन्य सामान बरामद किए गए। मामले में आरोपियों की गिरफ्तारी भी हुई। बाद में पुलिस ने कथित मुख्य संचालक पवन कुमार तुरी को बोकारो में पकड़े जाने की जानकारी दी। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि फैक्ट्री कितने समय से संचालित थी, मशीनें और कच्चा माल कहां से आया तथा तैयार हथियारों की सप्लाई किन इलाकों में की जाती थी। मई 2026 में साहिबगंज के रांगा थाना क्षेत्र में भी बिहार STF और झारखंड पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में एक घर के भीतर चल रही कथित मिनी गन फैक्ट्री का खुलासा हुआ था। रिपोर्ट के अनुसार, बिहार में गिरफ्तार कुछ अपराधियों से पूछताछ के बाद झारखंड के इस ठिकाने की जानकारी सामने आई थी। कार्रवाई के दौरान करीब 16 अर्द्धनिर्मित पिस्टल, मैगजीन, लेथ और हथियार बनाने के अन्य उपकरण बरामद किए गए थे। यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि स्थानीय लोगों ने कार्रवाई के बाद आश्चर्य जताया था कि रिहायशी इलाके में इतनी बड़ी गतिविधि चलने के बावजूद उन्हें इसकी जानकारी नहीं थी। जुलाई 2026 में रामगढ़ जिले में भी पुलिस ने एक घर में संचालित कथित अवैध हथियार निर्माण इकाई का भंडाफोड़ किया था। कार्रवाई रामगढ़ और हजारीबाग पुलिस की संयुक्त टीम ने विशिष्ट खुफिया सूचना के आधार पर की थी। पुलिस ने मौके से अर्द्धनिर्मित 7.65 एमएम पिस्तौल, मैगजीन, फायरिंग पिन, ट्रिगर और हथियार बनाने के कई उपकरण बरामद किए थे। पुलिस के मुताबिक गिरफ्तार दंपती पर हथियार बनाने और आपूर्ति से जुड़े आरोप लगाए गए थे। सितंबर में दुमका जिले में भी पुलिस ने एक घर में संचालित कथित अवैध मिनी गन फैक्ट्री का खुलासा किया था। पुलिस के अनुसार, वहां हथियार निर्माण से जुड़ी गतिविधियां चल रही थीं। इन अलग-अलग घटनाओं को एक साथ देखने पर जांच एजेंसियों के सामने यह सवाल महत्वपूर्ण हो जाता है कि क्या झारखंड के कुछ इलाकों में अवैध हथियार निर्माण और सप्लाई का अंतरराज्यीय नेटवर्क सक्रिय है। अवैध हथियारों के मामलों में अपराधियों की गिरफ्तारी के बाद पूछताछ से कई बार हथियारों की सप्लाई के नए ठिकानों का पता चलता है। इसके बाद संबंधित राज्य की STF या पुलिस स्थानीय पुलिस से संपर्क कर संयुक्त कार्रवाई करती है। यही वजह है कि बिहार STF के इनपुट के बाद झारखंड के अलग-अलग जिलों में कार्रवाई के मामले सामने आए हैं। इससे यह संभावना भी जांच का विषय बनती है कि हथियार निर्माण के लिए झारखंड के कुछ ग्रामीण या कम निगरानी वाले इलाकों का इस्तेमाल किया जा रहा है। इन घटनाओं के बाद सबसे बड़ा सवाल स्थानीय पुलिस की सूचना-संग्रह प्रणाली को लेकर है। यदि किसी रिहायशी इलाके में लंबे समय तक मशीनें चल रही हों, कच्चे माल की आवाजाही हो रही हो और हथियार तैयार किए जा रहे हों, तो स्थानीय स्तर पर इसकी भनक क्यों नहीं लगी—यह जांच का विषय है। हालांकि, केवल इस आधार पर यह निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा कि स्थानीय पुलिस को पूरी तरह जानकारी नहीं थी या उसने जानबूझकर कार्रवाई नहीं की। किसी मामले में स्थानीय पुलिस को पहले से सूचना थी या नहीं, इसका निर्धारण जांच और आधिकारिक रिकॉर्ड से ही हो सकता है। अवैध हथियार फैक्ट्री का भंडाफोड़ केवल शुरुआती कार्रवाई है। जांच एजेंसियों के लिए असली चुनौती यह पता लगाना है कि इन हथियारों के निर्माता, सप्लायर, खरीदार और अंतिम उपयोगकर्ता कौन हैं। महागामा मामले में भी पुलिस कथित सप्लाई नेटवर्क, मशीनों और कच्चे माल के स्रोत तथा फैक्ट्री के संचालन की अवधि की जांच कर रही है। अगर जांच में अलग-अलग जिलों और राज्यों के बीच हथियारों की सप्लाई की कड़ियां सामने आती हैं, तो मामला स्थानीय अपराध से आगे बढ़कर अंतरराज्यीय अवैध हथियार नेटवर्क का रूप ले सकता है। झारखंड में हाल के महीनों में सामने आए गन फैक्ट्री मामलों ने पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों के सामने कई सवाल खड़े किए हैं। बिहार STF या अन्य राज्यों से मिले इनपुट के बाद हुई संयुक्त कार्रवाइयों में अवैध हथियार निर्माण के ठिकानों का सामने आना इस बात को रेखांकित करता है कि अंतरराज्यीय पुलिस समन्वय इस नेटवर्क की जांच में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।महागामा में छापेमारी से खुला बड़ा मामला
साहिबगंज में भी बिहार STF के इनपुट पर कार्रवाई
रामगढ़ में भी मिला मिनी आर्म्स मैन्युफैक्चरिंग यूनिट
दुमका में भी सामने आया मिनी गन फैक्ट्री का मामला
दूसरे राज्यों की पुलिस क्यों पहुंच रही झारखंड तक?
लोकल पुलिस के खुफिया तंत्र पर क्यों उठ रहे सवाल?
अब सप्लाई नेटवर्क तक पहुंचने की चुनौती
निष्कर्ष













