JSSC-CGL मामला: पास हुए अभ्यर्थी ने ही खोली पोल, धरती आबा संस्थान के कर्मचारी पर 10% कमीशन का आरोप; 4 अभ्यर्थियों को पास कराने की बात
रांची: झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की संयुक्त स्नातक स्तरीय प्रतियोगिता परीक्षा (CGL) से जुड़े कथित अनियमितता मामले में जांच के दौरान एक और महत्वपूर्ण जानकारी सामने आने की बात कही जा रही है। जांच एजेंसियों के अनुसार, परीक्षा में सफल हुए एक अभ्यर्थी से मिली जानकारी के आधार पर धरती आबा संस्थान से जुड़े एक कर्मचारी की भूमिका सामने आई है। आरोप है कि कर्मचारी अभ्यर्थियों से परीक्षा में मदद और चयन कराने के नाम पर डील करता था और इसके बदले 10 प्रतिशत कमीशन लेता था। जांच में यह भी सामने आने का दावा किया गया है कि संबंधित कर्मचारी ने कथित तौर पर चार अभ्यर्थियों को परीक्षा में पास कराने की व्यवस्था करने की बात कही थी। हालांकि, इन आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच पूरी होने और अदालत में साक्ष्य के परीक्षण के बाद ही होगी। जांच के दौरान एक ऐसे अभ्यर्थी से पूछताछ की गई, जो परीक्षा में सफल हुआ था। बताया जा रहा है कि पूछताछ के दौरान अभ्यर्थी ने कथित लेन-देन और संपर्कों से जुड़ी जानकारी जांच टीम को दी। अभ्यर्थी के बयान के आधार पर जांचकर्ताओं ने संबंधित व्यक्ति और उसके संपर्कों की पड़ताल शुरू की। इसी क्रम में धरती आबा संस्थान के एक कर्मचारी की भूमिका संदिग्ध बताए जाने की बात सामने आई। जांच में सामने आई जानकारी के मुताबिक, आरोपी कर्मचारी कथित तौर पर अभ्यर्थियों और परीक्षा से जुड़े लोगों के बीच संपर्क का काम करता था। आरोप है कि वह चयन में मदद दिलाने के नाम पर अभ्यर्थियों से डील करता था और इसके बदले कुल रकम का 10 प्रतिशत कमीशन लेने की बात सामने आई है। हालांकि, कथित डील में कितनी रकम तय हुई थी, कितनी राशि वास्तव में दी गई और भुगतान किस माध्यम से हुआ—इन बिंदुओं की जांच महत्वपूर्ण होगी। जांच एजेंसी कथित लेन-देन के डिजिटल और अन्य साक्ष्यों को भी खंगाल सकती है। पूछताछ में सामने आई जानकारी के अनुसार, संबंधित कर्मचारी ने कथित तौर पर चार अभ्यर्थियों को परीक्षा में पास कराने की बात कही थी। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि इन चारों अभ्यर्थियों की पहचान क्या है और क्या उनके बीच वास्तव में किसी प्रकार का आर्थिक लेन-देन हुआ था। इसके अलावा यह भी जांच का विषय है कि यदि पैसे का लेन-देन हुआ तो उसका लाभ किस स्तर तक पहुंचा और परीक्षा प्रक्रिया में किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका थी या नहीं। ऐसे मामलों में जांच एजेंसियां आरोपी और अभ्यर्थियों के बीच हुई बातचीत, कॉल डिटेल, मोबाइल चैट, बैंक लेन-देन और अन्य डिजिटल रिकॉर्ड की जांच कर सकती हैं। यदि इन रिकॉर्ड से आरोपों की पुष्टि होती है, तो जांच में कथित नेटवर्क की अन्य कड़ियां भी सामने आ सकती हैं। जांचकर्ताओं के लिए यह पता लगाना भी महत्वपूर्ण होगा कि संबंधित कर्मचारी ने केवल अभ्यर्थियों से संपर्क किया था या परीक्षा में कथित गड़बड़ी कराने वाले किसी बड़े नेटवर्क से उसका सीधा संबंध था। JSSC-CGL परीक्षा से जुड़े मामले में पहले से ही अभ्यर्थियों से पैसे लेकर चयन प्रक्रिया में कथित 'सेटिंग' कराने के आरोपों की जांच चल रही है। जांच एजेंसियां अलग-अलग आरोपियों और उनके संपर्कों की भूमिका की पड़ताल कर रही हैं। धरती आबा संस्थान के कर्मचारी से जुड़ी यह नई जानकारी यदि जांच में प्रमाणित होती है, तो इससे कथित नेटवर्क की कार्यप्रणाली को समझने में मदद मिल सकती है। खासकर यह पता लगाया जा सकेगा कि अभ्यर्थियों तक कथित तौर पर कौन पहुंच रहा था और परीक्षा में सफलता दिलाने का दावा किस आधार पर किया जा रहा था। फिलहाल सामने आई जानकारी को जांच में मिले आरोप और बयानों के रूप में देखा जाना चाहिए। किसी व्यक्ति को दोषी तभी माना जा सकता है जब जांच और न्यायिक प्रक्रिया में आरोप प्रमाणित हों। जांच एजेंसियों की अगली कार्रवाई इस बात पर निर्भर करेगी कि पूछताछ, डिजिटल साक्ष्य, वित्तीय लेन-देन और अन्य दस्तावेजों से कथित 10 प्रतिशत कमीशन और चार अभ्यर्थियों को पास कराने के आरोपों की कितनी पुष्टि होती है।पास हुए अभ्यर्थी ने दी अहम जानकारी
10 प्रतिशत कमीशन पर होती थी कथित डील
चार अभ्यर्थियों को पास कराने का दावा
मोबाइल और डिजिटल साक्ष्यों की जांच संभव
JSSC-CGL जांच में बढ़ सकती है कार्रवाई
आरोपों की पुष्टि जांच और न्यायिक प्रक्रिया से होगी













