JSSC-CGL परीक्षा विवाद: CID ने सचिवालय के क्लर्क को किया गिरफ्तार, अभ्यर्थियों को रटवाए थे प्रश्न-उत्तर
रांची: झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की संयुक्त स्नातक स्तरीय (CGL) परीक्षा से जुड़े कथित पेपर लीक और अनियमितता मामले में अपराध अनुसंधान विभाग (CID) की जांच में एक और महत्वपूर्ण कड़ी सामने आई है। CID ने सचिवालय में क्लर्क के पद पर काम कर चुके सुधाकर यादव को गिरफ्तार किया है। जांच एजेंसी के अनुसार, आरोपी पर अभ्यर्थियों को परीक्षा में अनुचित लाभ दिलाने के लिए प्रश्न और उनके उत्तर पहले से रटवाने का आरोप है। CID की कार्रवाई के बाद इस मामले में कथित परीक्षा सिंडिकेट के नेटवर्क और अभ्यर्थियों से किए गए वित्तीय लेनदेन की जांच भी तेज कर दी गई है। जांच एजेंसी आरोपी से पूछताछ कर यह पता लगाने में जुटी है कि उसके संपर्क में कौन-कौन लोग थे और परीक्षा से पहले अभ्यर्थियों तक कथित तौर पर प्रश्न-उत्तर किस माध्यम से पहुंचाए गए। जांच में सामने आई जानकारी के मुताबिक, सुधाकर यादव वर्ष 2018 से रांची स्थित सचिवालय में लिपिक के पद पर तैनात था। बाद में उसका स्थानांतरण दुमका किया गया था। CID को संदेह है कि परीक्षा विवाद से जुड़ी गतिविधियों में उसकी भूमिका रही हो सकती है। पूछताछ और पहले से जांच के दौरान सामने आए कुछ अभ्यर्थियों के बयानों के आधार पर CID ने उसकी तलाश शुरू की थी। इसके बाद उसे देवघर के बैजनाथपुर बंधा इलाके में स्थित एक मकान से पकड़ा गया। CID को आरोपी के ठिकाने से कई अभ्यर्थियों के शैक्षणिक प्रमाणपत्र और बैंक चेक मिलने की जानकारी सामने आई है। जांच एजेंसी अब इन दस्तावेजों की पड़ताल कर रही है कि वे किन अभ्यर्थियों के हैं और आरोपी के पास ये दस्तावेज कैसे पहुंचे। मूल प्रमाणपत्र और चेक मिलने के बाद जांच का एक महत्वपूर्ण पहलू कथित आर्थिक लेनदेन भी बन गया है। CID संबंधित बैंक खातों और लेनदेन की जानकारी जुटा रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि अभ्यर्थियों से कितनी रकम ली गई और रकम का भुगतान किन लोगों तक पहुंचा। जांच एजेंसी के मुताबिक, आरोपी ने करीब दो दर्जन अभ्यर्थियों को परीक्षा पास कराने की कथित सेटिंग से जुड़े नेटवर्क में भूमिका निभाने की बात कही है। पूछताछ में यह भी जानकारी सामने आने की बात कही गई है कि अभ्यर्थियों को परीक्षा से पहले प्रश्नों और उनके उत्तर याद करवाए गए थे। CID अब यह पता लगाने में जुटी है कि कथित तौर पर प्रश्न-उत्तर उपलब्ध कराने वाले लोग कौन थे और इस नेटवर्क में सचिवालय कर्मचारी के अलावा अन्य सरकारी कर्मचारी या बाहरी व्यक्ति भी शामिल थे या नहीं। जांच से जुड़े अधिकारियों के अनुसार, आरोपी से पूछताछ में हजारीबाग में भी कुछ अभ्यर्थियों को कथित तौर पर प्रश्नों के उत्तर याद करवाने से संबंधित जानकारी मिली है। इससे जांच एजेंसी को शक है कि अभ्यर्थियों को परीक्षा से पहले अलग-अलग स्थानों पर इकट्ठा कर तैयारी कराई गई थी। इससे पहले CID की जांच में नेपाल के विराटनगर और बोकारो के होटलों में अभ्यर्थियों को कथित तौर पर ठहराए जाने और करीब 120 प्रश्न-उत्तर रटवाने की बात सामने आई थी। जांच रिपोर्टों के अनुसार, 15 अभ्यर्थियों से करीब 1.80 करोड़ रुपये लेने का भी आरोप सामने आया है। CID की अब तक की जांच में कथित परीक्षा सिंडिकेट द्वारा अभ्यर्थियों से बड़ी रकम वसूलने की बात सामने आई है। जांच रिपोर्ट के अनुसार, अलग-अलग अभ्यर्थियों से करीब 12 लाख रुपये से लेकर 70 लाख रुपये तक लिए जाने का आरोप है। जांच एजेंसी ने अब तक कई आरोपियों को गिरफ्तार किया है और बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों तथा संबंधित लोगों से पूछताछ की है। CID यह भी जांच कर रही है कि जिन अभ्यर्थियों ने कथित तौर पर पैसे दिए, उन्हें परीक्षा में किस तरह अनुचित लाभ पहुंचाया गया। सुधाकर यादव के ठिकाने से मिले मूल प्रमाणपत्र और ब्लैंक चेक जांच के लिहाज से महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। CID इन दस्तावेजों के जरिए यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि अभ्यर्थियों और कथित बिचौलियों के बीच किस तरह का संबंध था। जांच एजेंसी बैंक खातों, चेक, भुगतान और अन्य वित्तीय गतिविधियों की जानकारी जुटा रही है। इससे कथित नेटवर्क में शामिल लोगों तक पहुंचने और पैसों के लेनदेन की कड़ी जोड़ने में मदद मिलने की उम्मीद है। JSSC-CGL मामले की जांच में अब तक सामने आए तथ्यों से संकेत मिलता है कि मामला सिर्फ एक-दो लोगों तक सीमित नहीं है। CID अलग-अलग आरोपियों, अभ्यर्थियों और कथित बिचौलियों के बीच संबंधों की जांच कर रही है। जांच एजेंसी ने JSSC मुख्यालय से भी दस्तावेज और डिजिटल साक्ष्य जब्त किए थे। आयोग के अधिकारियों से पूछताछ के साथ-साथ परीक्षा प्रक्रिया से जुड़े रिकॉर्ड की भी जांच की जा रही है। JSSC-CGL विवाद को लेकर झारखंड हाईकोर्ट में भी मामला चल रहा है। हालिया सुनवाई में अदालत ने सरकार को 48 घंटे के भीतर अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया और पहले से लागू रोक को फिलहाल जारी रखा। अदालत ने मामले को बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों के भविष्य से जुड़ा विषय माना है। ऐसे में CID की जांच और हाईकोर्ट की सुनवाई, दोनों ही इस पूरे विवाद के आगे के घटनाक्रम के लिए महत्वपूर्ण हैं। जांच एजेंसी की रिपोर्ट और अदालत के निर्देशों के आधार पर आगे परीक्षा परिणाम, नियुक्तियों और संबंधित अभ्यर्थियों के भविष्य को लेकर स्थिति और स्पष्ट हो सकती है। नोट: मामले में लगाए गए आरोप जांच का विषय हैं। आरोपियों की दोषसिद्धि अदालत के अंतिम निर्णय पर निर्भर करेगी।सचिवालय में क्लर्क के पद पर था तैनात
अभ्यर्थियों के मूल सर्टिफिकेट और ब्लैंक चेक बरामद
करीब दो दर्जन अभ्यर्थियों से संपर्क का आरोप
हजारीबाग में भी अभ्यर्थियों को रटवाए गए थे सवाल
15 अभ्यर्थियों से 1.80 करोड़ रुपये लेने का आरोप
बरामद दस्तावेजों से खुलेगा आर्थिक लेनदेन का राज
CID की जांच में बढ़ता जा रहा नेटवर्क
हाईकोर्ट में भी चल रही है सुनवाई












