जमीन दलाल से JPSC पेपर लीक सिंडिकेट का हिस्सा बने बुद्धेश्वर भगत को बेल देने से CID कोर्ट का इनकार
रांची। झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की परीक्षा से जुड़े कथित पेपर लीक मामले में आरोपी बुद्धेश्वर भगत को अदालत से राहत नहीं मिली है। CID कोर्ट ने उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी। मामले की जांच कर रही CID का आरोप है कि बुद्धेश्वर भगत पहले जमीन की खरीद-बिक्री से जुड़े काम में सक्रिय था, लेकिन बाद में कथित तौर पर JPSC पेपर लीक सिंडिकेट से जुड़ गया। JPSC पेपर लीक प्रकरण में जांच एजेंसी लगातार आरोपियों की भूमिका, आपसी संपर्क और कथित लेन-देन की कड़ियों को जोड़ने में जुटी है। इसी क्रम में बुद्धेश्वर भगत की भूमिका भी जांच के दायरे में आई। CID के मुताबिक, आरोपी की गतिविधियां केवल जमीन के कारोबार तक सीमित नहीं रहीं और वह कथित तौर पर परीक्षा से जुड़े पेपर लीक नेटवर्क का हिस्सा बना। अदालत में जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान जांच एजेंसी ने मामले की गंभीरता और अब तक सामने आए साक्ष्यों का हवाला देते हुए जमानत का विरोध किया। CID की दलीलों और केस डायरी में उपलब्ध तथ्यों पर विचार करने के बाद अदालत ने आरोपी को जमानत देने से इनकार कर दिया। जांच एजेंसी के अनुसार, बुद्धेश्वर भगत की पहचान पहले जमीन दलाल के तौर पर थी। बाद में कथित तौर पर उसकी पहचान ऐसे लोगों से हुई जो प्रतियोगी परीक्षाओं में सेटिंग और प्रश्नपत्र उपलब्ध कराने के नेटवर्क से जुड़े थे। CID इस बात की भी जांच कर रही है कि आरोपी की भूमिका केवल संपर्क स्थापित करने तक थी या उसने पेपर लीक की पूरी प्रक्रिया में किसी अन्य तरीके से मदद की थी। इसके अलावा कथित तौर पर हुए पैसों के लेन-देन और अन्य आरोपियों के साथ उसके संबंधों की भी पड़ताल की जा रही है। JPSC पेपर लीक मामले में जांच एजेंसी का फोकस कथित सिंडिकेट के पूरे नेटवर्क को सामने लाने पर है। जांच के दौरान आरोपियों के बीच संपर्क, मोबाइल फोन और डिजिटल साक्ष्य, आर्थिक लेन-देन तथा अभ्यर्थियों से कथित संपर्क जैसे पहलुओं की जांच की जा रही है। CID यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि कथित पेपर लीक में कौन-कौन लोग शामिल थे, प्रश्नपत्र अभ्यर्थियों तक कैसे पहुंचा और इसके बदले कथित तौर पर कितनी रकम ली गई। बुद्धेश्वर भगत को जमानत नहीं मिलने के बाद फिलहाल उन्हें न्यायिक हिरासत में ही रहना होगा। मामले में जांच आगे बढ़ने के साथ अन्य संदिग्धों और आरोपियों की भूमिका भी सामने आने की संभावना है। हालांकि, CID द्वारा लगाए गए आरोप अभी जांच और न्यायिक प्रक्रिया के अधीन हैं। अदालत में दोष सिद्ध होने तक किसी भी आरोपी को कानूनी रूप से दोषी नहीं माना जा सकता। जमानत खारिज होना भी अपने आप में दोषसिद्धि नहीं है।पेपर लीक मामले में बढ़ी कानूनी मुश्किलें
जमीन के कारोबार से पेपर लीक नेटवर्क तक पहुंचने का आरोप
CID खंगाल रही है पूरे सिंडिकेट की कड़ी
जमानत से इनकार के बाद हिरासत जारी
JPSC पेपर लीक मामले में प्रमुख बिंदु












