नेपाल की ग्लेशियर त्रासदी के बीच हिमाचल के बांधों की सुरक्षा पर नजर, 15 में 12 पहली श्रेणी में, तीन बांधों में कमियां
शिमला, हिमालय में ग्लेशियर व जलस्रोतों से जुड़े खतरे कितने
गंभीर हो सकते हैं, इसकी ताजा मिसाल 26 अगस्त को नेपाल में सामने आई, जब
ग्लेशियर का एक हिस्सा टूटने के बाद अचानक बाढ़ और मलबे का सैलाब आया। इस
घटना ने हिमालयी क्षेत्र में ग्लेशियर, ग्लेशियर झील और जलविद्युत
परियोजनाओं की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ाई है। इसी संदर्भ में हिमाचल
प्रदेश में बांधों की सुरक्षा से जुड़ी वार्षिक रिपोर्ट भी महत्वपूर्ण है।
रिपोर्ट को हाल ही में विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान सदन में रखा गया।
इसके मुताबिक राज्य बांध सुरक्षा संगठन के अधिकार क्षेत्र में आने वाले सभी
15 निर्दिष्ट बांधों का संभावित खतरा वर्गीकरण पूरा हो चुका है। इनमें 12
बांध संभावित खतरे की पहली श्रेणी यानी क्लास-I में और तीन बांध दूसरी
श्रेणी यानी क्लास-II में रखे गए हैं। तीसरी और चौथी श्रेणी में कोई बांध
नहीं है।
ज्यादातर बांध संतोषजनक, तीन में सुधार की जरूरत
राज्य
बांध सुरक्षा संगठन की वर्ष 2025-26 की रिपोर्ट में निरीक्षण रिपोर्टों की
जांच और राज्य बांध सुरक्षा समिति की बैठकों में हुई चर्चा का विवरण दिया
गया है। रिपोर्ट के अनुसार ज्यादातर निर्दिष्ट बांध संतोषजनक तरीके से काम
कर रहे हैं और उनकी सुरक्षा को प्रभावित करने वाली कोई बड़ी संरचनात्मक या
संचालन संबंधी कमी नहीं मिली। तीन बांधों को दूसरी श्रेणी में रखा गया है।
इनमें गिरि जटोन बैराज, मलाणा-2 जलविद्युत परियोजना और मलाणा-1 जलविद्युत
परियोजना शामिल हैं। इन परियोजनाओं में मिली कमियों के लिए लगातार निगरानी
और समय पर सुधारात्मक कदम उठाने की जरूरत बताई गई है। रिपोर्ट में
संरचनात्मक मरम्मत, स्पिलवे का काम पूरा करने, काम नहीं कर रहे निगरानी
उपकरणों को ठीक करने और आपात स्थिति से निपटने की व्यवस्था मजबूत करने जैसे
कामों का उल्लेख है।
गिरि जटोन में दरारें और निगरानी उपकरण बंद, मलाणा परियोजनाओं में काम लंबित
गिरि
जटोन बैराज के एक पियर के एक्सपेंशन ज्वाइंट में अलग-अलग स्तर पर बैठने के
संकेत मिले हैं। मानसून से पहले और बाद के निरीक्षण में इसकी जानकारी
सामने आई। इस स्थिति पर नजर रखने के लिए लगाया गया उपकरण इस समय काम नहीं
कर रहा है। बैराज के नीचे की तरफ सुरक्षा के लिए किए गए कामों को भी कई जगह
नुकसान पहुंचा है। कुछ स्थानों पर कंक्रीट ब्लॉक और कर्टेन वॉल के हिस्से
खिसक गए हैं। संरचना के कुछ हिस्सों में दरारें भी मिली हैं। रिपोर्ट में
सुधारात्मक कार्रवाई और करीबी निगरानी की जरूरत बताई गई है। इस संबंध में
अनुपालन रिपोर्ट अभी लंबित है और आपातकालीन चेतावनी प्रणाली लागू नहीं होने
का भी उल्लेख किया गया है। मलाणा-2 में अतिरिक्त स्पिलवे का काम काफी देर
से चल रहा है। बांध के रेडियल गेटों के हाइड्रोलिक होइस्ट को बदलने का काम
भी पूरा नहीं हुआ है। रिपोर्ट में कहा गया है कि बाढ़ संभालने की क्षमता और
परियोजना की सुरक्षा के लिए अतिरिक्त स्पिलवे का काम पूरा होना जरूरी है।
मलाणा-1 में बैलेंसिंग रिजर्वायर की रिटेनिंग वॉल की बड़ी मरम्मत और
पुनर्वास का काम चल रहा है। इन कामों के पूरा होने और उसके बाद सुरक्षा
आकलन तक परियोजना रन-ऑफ-द-रिवर व्यवस्था के तहत चल रही है।
खतरे का आकलन कैसे हुआ और बांध सुरक्षा का दायरा कितना बड़ा
रिपोर्ट
के अनुसार किसी बांध की संभावित खतरा क्षमता तय करते समय परियोजना की
पूंजीगत लागत, संभावित जनहानि, संपत्ति को होने वाले नुकसान और पर्यावरण
तथा सांस्कृतिक प्रभाव को देखा जाता है। बांध सुरक्षा अधिनियम, 2021 की
धारा 17 के तहत राज्य बांध सुरक्षा संगठन को अपने अधिकार क्षेत्र के हर
बांध का उसकी संवेदनशीलता और खतरे के आधार पर वर्गीकरण करना होता है।
राष्ट्रीय बांध सुरक्षा प्राधिकरण ने इसके लिए बांधों की संवेदनशीलता और
खतरा वर्गीकरण से जुड़े नियम 2024 में अधिसूचित किए थे, जो 5 दिसंबर 2024
को प्रकाशित हुए। रिपोर्ट में बताया गया है कि हिमाचल में 15 निर्दिष्ट
बांध हैं और सभी 15 का वर्गीकरण पूरा हो चुका है। इनमें 12 क्लास-I और तीन
क्लास-II में हैं। रिपोर्ट का जोर इस बात पर है कि जिन बांधों में कमियां
सामने आई हैं, उन पर लगातार नजर रखी जाए और तय सुधारात्मक कदम समय पर पूरे
किए जाएं।
हिमाचल में 26 चालू बांध, 12,438 मेगावाट क्षमता का दोहन
हिमाचल
प्रदेश में इस समय 26 बांध चालू हैं। चार बांध निर्माणाधीन हैं और एक बांध
को चालू करने की प्रक्रिया में है। इनमें से 17 बांध राज्य बांध सुरक्षा
संगठन के अधिकार क्षेत्र में आते हैं। इन 17 बांधों में 11 निजी बिजली
उत्पादक कंपनियों के स्वामित्व में हैं, जबकि छह सरकारी एजेंसियों के
स्वामित्व और संचालन में हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि बांधों की सुरक्षा
के लिए संरचनात्मक इंजीनियरिंग, भूविज्ञान, जल विज्ञान, भू-तकनीकी
इंजीनियरिंग, उपकरणों की निगरानी और आपदा प्रबंधन जैसे क्षेत्रों के
विशेषज्ञों की जरूरत होती है। हिमाचल में करीब 27 हज़ार मेगावाट जलविद्युत
क्षमता का अनुमान है। इसमें 24,567 मेगावाट क्षमता को दोहन योग्य माना गया
है। अब तक भंडारण बांधों और नदी के बहाव पर आधारित परियोजनाओं से 12,438
मेगावाट क्षमता का दोहन किया जा चुका है।















