67 साल का हुआ दूरदर्शन: 15 सितंबर 1959 को शुरू हुआ था सफर, आज भी कायम है खास पहचान
चेन्नई, कभी घर-घर की पहचान और परिवार के साथ बैठकर मनोरंजन, समाचार और ज्ञान का सबसे बड़ा माध्यम रहा दूरदर्शन आज अपने सफर के 67 वर्ष पूरे कर रहा है। 15 सितंबर 1959 को नई दिल्ली से शुरू हुआ दूरदर्शन आज भी देश के सार्वजनिक प्रसारण तंत्र का अहम हिस्सा है। इंटरनेट और मोबाइल के बढ़ते दौर के बावजूद दूरदर्शन ने अपनी प्रासंगिकता बरकरार रखी है।
भारत में टेलीविजन प्रसारण की शुरुआत 15 सितंबर 1959 को प्रायोगिक प्रसारण के साथ हुई थी। शुरुआती दौर में दूरदर्शन, ऑल इंडिया रेडियो (AIR) का हिस्सा था। शुरुआत में सप्ताह में दो दिन करीब एक-एक घंटे के कार्यक्रम प्रसारित किए जाते थे। इन कार्यक्रमों का मुख्य फोकस शिक्षा और विकास से जुड़े विषयों पर था।
वर्ष 1965 में दूरदर्शन का दैनिक प्रसारण शुरू हुआ। इसके बाद धीरे-धीरे इसका विस्तार देश के अलग-अलग हिस्सों तक हुआ और दूरदर्शन कई दशकों तक भारत का प्रमुख और लगभग एकमात्र टेलीविजन प्रसारक बना रहा।
दूरदर्शन के इतिहास में मनोरंजन के कई ऐसे कार्यक्रम रहे, जिन्होंने भारतीय दर्शकों के बीच अपनी अलग पहचान बनाई। 1987-88 में प्रसारित रामायण और 1988-90 में प्रसारित महाभारत ने दर्शकों के बीच अभूतपूर्व लोकप्रियता हासिल की।
इसके अलावा हम लोग, बुनियाद, मालगुडी डेज, चंद्रकांता और शक्तिमान जैसे धारावाहिकों ने भी दूरदर्शन को घर-घर तक पहुंचाया। इन कार्यक्रमों ने न केवल मनोरंजन किया, बल्कि भारतीय समाज, संस्कृति और पारिवारिक मूल्यों पर भी गहरा प्रभाव छोड़ा।
दूरदर्शन के शुरुआती दौर की यादों में टीवी समाचार का भी विशेष स्थान है। वर्ष 1965 में प्रतिमा पुरी द्वारा पढ़े जाने वाले पांच मिनट के समाचार बुलेटिन का दर्शक बेसब्री से इंतजार करते थे। उस समय टीवी समाचार देश-दुनिया की जानकारी हासिल करने का महत्वपूर्ण माध्यम था।
समय के साथ दूरदर्शन ने समाचारों के अलावा खेल, कृषि, शिक्षा, विज्ञान, कला-संस्कृति, उद्योग, वाणिज्य और मनोरंजन से जुड़े कार्यक्रमों का व्यापक प्रसारण शुरू किया।
दूरदर्शन ने बदलते तकनीकी दौर के साथ खुद को भी लगातार विकसित किया है। आज यह नेटवर्क 110 डीटीएच सेवाएं मुफ्त उपलब्ध कराने के साथ 36 सैटेलाइट चैनलों का संचालन करता है। इसके कार्यक्रम देश की विभिन्न भाषाओं और क्षेत्रों के दर्शकों तक पहुंचते हैं।
दूरदर्शन की पहुंच देश की करीब 92 प्रतिशत आबादी तक बताई जाती है। क्षेत्रीय भाषाओं में कार्यक्रमों के प्रसारण के जरिए इसने भारत की विविध भाषाई और सांस्कृतिक विरासत को भी मंच प्रदान किया है।
आज मोबाइल फोन, लैपटॉप और इंटरनेट लोगों के जीवन का अहम हिस्सा बन चुके हैं। इसके बावजूद दूरदर्शन की अपनी अलग पहचान बनी हुई है। समाचारों से लेकर क्रिकेट, कला-संस्कृति, शिक्षा और मनोरंजन तक विविध कार्यक्रमों के कारण यह आज भी करोड़ों भारतीयों के लिए भरोसेमंद सार्वजनिक प्रसारण माध्यम बना हुआ है।
दूरदर्शन का सफर 15 सितंबर, 1959 से शुरू हुआ और आज 67 वर्षों बाद भी जारी है। बदलती तकनीक और दर्शकों की पसंद के साथ दूरदर्शन ने खुद को बदला है, लेकिन देश के सामाजिक, सांस्कृतिक और शैक्षणिक जीवन से उसका जुड़ाव आज भी कायम है।













