JSSC-CGL नियुक्तियां रद्द करने पर रोक बरकरार, हाईकोर्ट ने कहा- यह कई लोगों के भविष्य का मामला, 48 घंटे में जवाब दे सरकार
रांची: झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की CGL नियुक्तियों को रद्द किए जाने के मामले में झारखंड हाईकोर्ट ने फिलहाल रोक बरकरार रखी है। मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि यह सिर्फ एक परीक्षा या नियुक्ति का मामला नहीं है, बल्कि इससे कई लोगों के भविष्य पर सीधा असर पड़ता है। अदालत ने राज्य सरकार से इस मामले में 48 घंटे के भीतर जवाब दाखिल करने को कहा है। JSSC-CGL परीक्षा में कथित गड़बड़ी और पेपर लीक के आरोपों के बाद नियुक्तियों को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा है। एक ओर परीक्षा में अनियमितता की जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की जा रही है, वहीं दूसरी ओर चयनित अभ्यर्थी अपनी नियुक्ति और भविष्य को लेकर चिंतित हैं। सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने नियुक्तियों को रद्द किए जाने की प्रक्रिया पर तत्काल राहत जारी रखी। अदालत के इस रुख से उन अभ्यर्थियों को फिलहाल राहत मिली है, जिनकी नियुक्ति पर परीक्षा विवाद के कारण अनिश्चितता बनी हुई थी। अदालत ने इस पूरे मामले में सरकार का पक्ष जानना जरूरी बताया है। सरकार को निर्धारित समय के भीतर अपना जवाब दाखिल करना होगा। इसके बाद कोर्ट मामले के विभिन्न पहलुओं पर आगे विचार करेगा। सुनवाई के दौरान अदालत ने मामले की गंभीरता को रेखांकित करते हुए कहा कि इसका असर बड़ी संख्या में लोगों के भविष्य पर पड़ रहा है। नियुक्ति प्रक्रिया में शामिल अभ्यर्थियों ने परीक्षा की तैयारी में वर्षों मेहनत की है और चयन के बाद उन्हें सरकारी सेवा में योगदान देने का अवसर मिला। ऐसे में यदि पूरी नियुक्ति प्रक्रिया को रद्द करने का फैसला लिया जाता है तो उसका प्रभाव केवल परीक्षा तक सीमित नहीं रहेगा। इससे चयनित अभ्यर्थियों की नौकरी, करियर और भविष्य पर व्यापक असर पड़ सकता है। JSSC-CGL विवाद की जांच को लेकर भी अदालत ने गंभीर सवाल उठाए। सुनवाई के दौरान पुलिस की जांच पर चर्चा हुई और यह सवाल सामने आया कि जब पुलिस की जांच पर भरोसा है तो जांच की गति धीमी क्यों है? अदालत के इस सवाल को जांच की प्रगति को लेकर महत्वपूर्ण टिप्पणी माना जा रहा है। परीक्षा में कथित अनियमितताओं की जांच तेजी से पूरी करना इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि जब तक जांच का निष्कर्ष सामने नहीं आता, तब तक बड़ी संख्या में चयनित अभ्यर्थियों का भविष्य अनिश्चित बना रहेगा। हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को 48 घंटे के भीतर अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। सरकार को नियुक्तियों, परीक्षा में कथित गड़बड़ी, जांच की स्थिति और इससे जुड़े कानूनी पहलुओं पर अपना पक्ष स्पष्ट करना होगा। सरकार के जवाब के बाद अदालत यह तय कर सकती है कि नियुक्तियों पर लगी रोक को आगे किस तरह जारी रखा जाए और मामले में अगला कदम क्या होगा। JSSC-CGL विवाद के बीच चयनित अभ्यर्थियों के सामने सबसे बड़ी चिंता अपने भविष्य को लेकर है। अभ्यर्थियों का कहना है कि उन्होंने प्रतियोगी परीक्षा के लिए लंबे समय तक तैयारी की और चयन प्रक्रिया पूरी होने के बाद नियुक्ति मिली। अब परीक्षा विवाद के कारण नौकरी पर संकट की स्थिति पैदा होना उनके लिए बेहद चिंताजनक है। वहीं, परीक्षा में कथित गड़बड़ी के खिलाफ आवाज उठाने वाले पक्ष का तर्क है कि यदि अनियमितता हुई है तो उसकी निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई जरूरी है। JSSC-CGL प्रकरण में अब अदालत के साथ-साथ जांच एजेंसियों की भूमिका भी महत्वपूर्ण हो गई है। एक तरफ हाईकोर्ट नियुक्तियों और अभ्यर्थियों के भविष्य को लेकर सावधानी बरत रहा है, वहीं दूसरी तरफ जांच की गति और उसके निष्कर्ष पर भी नजर बनी हुई है। फिलहाल नियुक्तियां रद्द किए जाने पर रोक बरकरार है और सरकार को 48 घंटे में जवाब देना है। अब अगली सुनवाई में सरकार के जवाब और जांच की प्रगति पर अदालत का रुख इस पूरे मामले की दिशा तय कर सकता है।नियुक्तियां रद्द करने के फैसले पर फिलहाल रोक
‘यह कई लोगों के भविष्य का मामला’
पुलिस पर भरोसा, फिर जांच में देरी क्यों?
सरकार को 48 घंटे में देना होगा जवाब
चयनित अभ्यर्थियों की बढ़ी चिंता
जांच पूरी होने तक मामला रहेगा महत्वपूर्ण













