बरियातू की तीन हॉकी खिलाड़ियों ने एशिया में फहराया तिरंगा, जूनियर वर्ल्ड कप का कटा टिकट
रांची: राजधानी रांची के बरियातू इलाके के लिए गर्व का पल है। यहां से निकलकर हॉकी के मैदान में अपनी पहचान बनाने वाली तीन युवा महिला हॉकी खिलाड़ियों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का तिरंगा लहराया है। एशियाई स्तर की प्रतियोगिता में शानदार प्रदर्शन के दम पर इन खिलाड़ियों ने भारतीय टीम को मजबूती दी और अब जूनियर वर्ल्ड कप में खेलने का टिकट हासिल कर लिया है। इन खिलाड़ियों की सफलता ने न सिर्फ रांची, बल्कि पूरे झारखंड के खेल जगत में खुशी की लहर पैदा कर दी है। स्थानीय खेल प्रेमियों, प्रशिक्षकों और परिवार के सदस्यों ने खिलाड़ियों की उपलब्धि पर खुशी जताते हुए इसे झारखंड की हॉकी प्रतिभा की एक और बड़ी मिसाल बताया है। रांची और आसपास के क्षेत्रों में हॉकी की मजबूत परंपरा रही है। बरियातू से भी कई प्रतिभाशाली खिलाड़ी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचे हैं। इन्हीं खिलाड़ियों की कड़ी में इन तीन युवा हॉकी खिलाड़ियों ने भी कड़ी मेहनत और अनुशासन के दम पर अपनी जगह बनाई। शुरुआती दौर में स्थानीय स्तर पर अभ्यास और प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेने के बाद इन खिलाड़ियों ने लगातार अपने खेल में सुधार किया। फिटनेस, पासिंग, ड्रिब्लिंग, डिफेंस और गोल करने की क्षमता पर लगातार मेहनत ने उन्हें उच्च स्तर की प्रतियोगिताओं के लिए तैयार किया। एशियाई प्रतियोगिता में भारतीय टीम के सामने मजबूत टीमों की चुनौती थी। इसके बावजूद भारतीय खिलाड़ियों ने पूरे टूर्नामेंट में शानदार प्रदर्शन किया। बरियातू की तीनों खिलाड़ियों ने टीम की रणनीति के मुताबिक अपना योगदान दिया और अहम मुकाबलों में बेहतरीन खेल दिखाया। भारतीय टीम के प्रदर्शन ने न केवल पदक या सफलता की राह आसान की, बल्कि जूनियर वर्ल्ड कप के लिए क्वालीफिकेशन भी सुनिश्चित किया। इस उपलब्धि के साथ खिलाड़ियों के लिए अब विश्व स्तर पर अपनी प्रतिभा दिखाने का बड़ा मंच तैयार हो गया है। एशिया में सफलता हासिल करने के बाद अब इन खिलाड़ियों की नजर जूनियर वर्ल्ड कप पर है। दुनिया की शीर्ष जूनियर हॉकी टीमों के बीच होने वाली इस प्रतियोगिता में भारत को मजबूत दावेदारों में माना जाता है। इन तीनों खिलाड़ियों के लिए यह टूर्नामेंट करियर के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण होगा। यहां अच्छा प्रदर्शन उन्हें आगे सीनियर राष्ट्रीय टीम में जगह बनाने की दिशा में भी मदद कर सकता है। किसी भी खिलाड़ी की अंतरराष्ट्रीय सफलता के पीछे उसकी वर्षों की मेहनत के साथ परिवार और प्रशिक्षकों का योगदान भी महत्वपूर्ण होता है। इन खिलाड़ियों के परिवारों ने पढ़ाई और खेल के बीच संतुलन बनाने में उनका साथ दिया। वहीं, प्रशिक्षकों ने तकनीकी प्रशिक्षण के साथ उन्हें मानसिक रूप से भी बड़े मुकाबलों के लिए तैयार किया। खिलाड़ियों की इस सफलता से स्थानीय हॉकी प्रशिक्षण केंद्रों और युवा खिलाड़ियों में भी उत्साह बढ़ा है। बरियातू के कई युवा अब इन खिलाड़ियों को प्रेरणा के रूप में देख रहे हैं। झारखंड लंबे समय से भारतीय हॉकी को बेहतरीन खिलाड़ी देता रहा है। राज्य के ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में बड़ी संख्या में बच्चे हॉकी खेलते हैं। सीमित संसाधनों के बावजूद कई खिलाड़ी राष्ट्रीय स्तर पर अपनी जगह बना चुके हैं। बरियातू की इन तीन खिलाड़ियों की उपलब्धि भी इसी प्रतिभा और संघर्ष की कहानी को आगे बढ़ाती है। उनकी सफलता से उम्मीद है कि राज्य में हॉकी को लेकर युवाओं का उत्साह और बढ़ेगा तथा नई प्रतिभाओं को आगे आने का अवसर मिलेगा। अब सभी की निगाहें जूनियर वर्ल्ड कप पर हैं, जहां बरियातू की ये तीन बेटियां भारतीय हॉकी टीम के साथ दुनिया के सामने अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करेंगी।बरियातू की मिट्टी से अंतरराष्ट्रीय हॉकी तक
एशिया में भारत का बढ़ाया मान
जूनियर वर्ल्ड कप में दिखेगा जलवा
परिवार और कोच की मेहनत भी रंग लाई
झारखंड में हॉकी प्रतिभाओं की कमी नहीं














