आपातकाल के 50 साल : इंदिरा गांधी के खिलाफ सड़कों पर भड़का था आक्रोश
ड़ीएम और मंत्री के बंगले में अखबार चिपकाने पर छात्रों को खिलाई गई थी जेल की हवा
हमीरपुर, उत्तर प्रदेश के हमीरपुर जिले में इमरजेंसी की याद आते ही यहां लोकतंत्र सेनानियों के चेहरे में गुस्से से लाल हो जाते है। देश में इमरजेंसी लगाकर आम आदमी की आजादी पर पाबंदी लगाने पर शहर से लेकर गांव तक लोगों में आक्रोश भड़का था। आरएसएस के कार्यकर्ताओं और नेताओं को इस कदर यातनाएं देकर अंग्रेजी हुकूमत को भी पीछे छोड़ दिया था। इमरजेंसी की खिलाफत करने वालों को हथकड़ी और बेडियां पहनाई गई थी। तमाम विद्यार्थियों को भी पकड़कर जेल भेजा गया था।
देश में तत्कालीन पीएम इंदिरा गांधी ने अपने विरोधियों को ऐसा सबक सिखाया था कि उसकी याद आते ही यहां लोग काँप उठते है। हमीरपुर नगर के रहने वाले सरस्वती शरण द्विवेदी वर्ष 1975 में राजकीय इण्टर कालेज में कक्षा दसवीं में पढ़ते थे। पढ़ाई के दौरान ये संघ से जुड़ गए थे। आरएसएस ने इन्हें कई माेहल्लों से कार्यकर्ताओं की टोलियां तैयार कर शाखा में लाने की काम दिया था।
स्कूल के शिक्षक को भी पेड़ पर बांधकर की गई थी पिटाई
लोकतंत्र सेनानी सरस्वती शरण द्विवेदी ने बताया कि इमरजेंसी के दौरान उत्तर प्रदेश के पूर्व कैबिनेट मंत्री के इशारे पर यहां आम लोगों पर बड़ा अत्याचार हुआ था। सरस्वती शिशु मंदिर के आचार्य रामकेश को नीम के पेड़ में बांधकर पुलिस ने उन पर डंडे बरसाए थे। पुलिस की यातनाओं से सभी आचार्य समेत तमाम विरोधियों के पैर सूज गए थे।
डीएम, मंत्री के बंगले अखबार चिपकाने पर मचा था बवाल
लोकतंत्र सेनानी ने बताया कि इमरजेंसी के दौरान उन्हें उस समय गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था जब वह दसवीं के छात्र थे। बताया कि इमरजेंसी के दिनों में साइक्लोस्टाइल में जनता अखबार यहां छपता था। इसके वितरण पर पाबंदी लगाई गई थी।











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