गैंगस्टर के बंदूक से रंगदारी के लिए चल रही गोलियों से गरीबों का सीना हो रहा छलनी, पेट पालने की कीमत चुका रहे मजदूर
रांची: रंगदारी और आपराधिक वर्चस्व की लड़ाई में चलने वाली गोलियों का सबसे बड़ा खामियाजा अक्सर उन लोगों को भुगतना पड़ता है, जिनका इन विवादों से कोई लेना-देना नहीं होता। रोज कमाकर परिवार का पेट पालने वाले मजदूर, छोटे दुकानदार, ऑटो चालक और आम राहगीर अपराधियों की हिंसा के बीच असुरक्षित महसूस करने लगे हैं। रंगदारी की मांग और आपराधिक गतिविधियों को लेकर होने वाली गोलीबारी में निर्दोष लोगों के घायल होने की घटनाएं कानून-व्यवस्था के साथ-साथ आम लोगों की सुरक्षा पर भी गंभीर सवाल खड़े करती हैं। रंगदारी वसूलने या इलाके में वर्चस्व कायम करने के लिए आपराधिक गिरोहों के बीच विवाद होने की स्थिति में हथियारों का इस्तेमाल किया जाता है। कई बार बदमाशों का निशाना कोई दूसरा व्यक्ति होता है, लेकिन गोली किसी निर्दोष मजदूर या राहगीर को लग जाती है। दिहाड़ी मजदूरों के लिए घर से निकलना मजबूरी है। काम नहीं करेंगे तो परिवार का चूल्हा नहीं जलेगा। ऐसे में अपराध प्रभावित इलाकों में काम करने वाले गरीब तबके के लोगों के सामने दोहरी चुनौती है—एक तरफ रोजी-रोटी की मजबूरी और दूसरी तरफ अचानक होने वाली हिंसा का खतरा। निर्माण स्थलों, बाजारों, फैक्ट्रियों और सड़क किनारे काम करने वाले मजदूर सुबह घर से इस उम्मीद में निकलते हैं कि शाम को मेहनत की कमाई लेकर लौटेंगे। लेकिन आपराधिक घटनाओं के दौरान यही आम लोग अनजाने में गोलीबारी की चपेट में आ सकते हैं। किसी परिवार के कमाने वाले सदस्य के घायल होने या जान गंवाने का असर सिर्फ उस व्यक्ति तक सीमित नहीं रहता। पूरे परिवार की आर्थिक स्थिति प्रभावित हो जाती है। इलाज का खर्च, काम बंद होने से आय का नुकसान और बच्चों की पढ़ाई जैसी जिम्मेदारियां परिवार के सामने नई मुश्किलें खड़ी कर देती हैं। रंगदारी की घटनाओं पर प्रभावी रोक लगाने के लिए पुलिस को गिरोहों की पहचान, उनके नेटवर्क और हथियारों के स्रोत तक पहुंचने की जरूरत है। केवल घटना के बाद गिरफ्तारी से समस्या का स्थायी समाधान नहीं होगा। अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई के साथ यह भी जरूरी है कि रंगदारी की शिकायत करने वाले व्यापारियों और आम लोगों को सुरक्षा का भरोसा मिले। विशेषज्ञों का मानना है कि अपराधियों में कानून का डर पैदा करने के साथ संवेदनशील इलाकों में पुलिस गश्त और खुफिया तंत्र को मजबूत करना भी आवश्यक है। किसी भी शहर या इलाके में कानून-व्यवस्था का वास्तविक पैमाना यह है कि आम नागरिक बिना डर के अपना काम कर सके। मजदूर काम पर जाए, दुकानदार दुकान खोल सके और परिवार का सदस्य शाम को सुरक्षित घर लौट सके—यह किसी भी प्रशासन की मूल जिम्मेदारी है। रंगदारी और गैंगवार की घटनाओं में निर्दोष लोगों के घायल होने की आशंका यह बताती है कि अपराध पर नियंत्रण के साथ-साथ आम नागरिकों की सुरक्षा को केंद्र में रखकर पुलिसिंग की जरूरत है। आपराधिक गिरोहों की लड़ाई और रंगदारी की हिंसा के बीच आखिर कब तक गरीब और मेहनतकश लोग अपनी जान जोखिम में डालकर रोजी-रोटी कमाते रहेंगे? अपराधियों के खिलाफ त्वरित और प्रभावी कार्रवाई के साथ आम लोगों में सुरक्षा का भरोसा पैदा करना अब सबसे बड़ी चुनौती है।गैंगवार और रंगदारी की गोलियों के बीच पिस रहे गरीब, पेट पालने निकले मजदूरों की जिंदगी पर मंडरा रहा खतरा
अपराधियों की लड़ाई में गरीब क्यों बन रहे निशाना?
पेट पालने की कीमत जान जोखिम में डालकर चुका रहे मजदूर
रंगदारी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जरूरत
आम लोगों की सुरक्षा सबसे बड़ी प्राथमिकता
सबसे बड़ा सवाल














