प्रादेशिक सेना को 77 साल बाद मिला अपना आधिकारिक गीत, कोलकाता में हुआ विमोचन
कोलकाता, देश की सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण जैसे महत्वपूर्ण
कार्यों में योगदान देने वाली प्रादेशिक सेना (टेरिटोरियल आर्मी) को
आखिरकार अपना आधिकारिक गीत मिल गया है। वर्ष 1949 में गठन के बाद करीब 77
साल तक इस बल का कोई आधिकारिक गीत नहीं था। अब कोलकाता में आयोजित दो
दिवसीय ‘नो योर टेरिटोरियल आर्मी’ (केवाईटीए) सेमिनार और ‘टीए 2.0’
संगोष्ठी के समापन दिवस पर इसका औपचारिक विमोचन किया गया।
प्रादेशिक
सेना की ओर से शनिवार को जारी बयान के मुताबिक, आधिकारिक गीत का विमोचन
समारोह में मौजूद वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों और अन्य विशिष्ट अतिथियों की
मौजूदगी में किया गया। इसे प्रादेशिक सेना की अलग पहचान, परंपरा और सेवा
भावना को मजबूत करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।
प्रादेशिक
सेना में ऐसे पुरुष और महिलाएं शामिल होते हैं, जो अपने नियमित पेशे के
साथ वर्ष के कुछ समय सैनिक के रूप में देश की सेवा करते हैं। यह बल
महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों की सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण और अन्य राष्ट्रीय
दायित्वों में अपनी भूमिका निभाता है।
लंबे समय से देश सेवा में
योगदान देने के बावजूद प्रादेशिक सेना के पास अब तक अपना कोई आधिकारिक गीत
नहीं था। नए गीत के साथ इस बल को उसकी विशिष्ट सैन्य पहचान से जुड़ा एक नया
प्रतीक भी मिला है।
कोलकाता में आयोजित कार्यक्रम के दौरान
प्रादेशिक सेना के भविष्य, तकनीक के इस्तेमाल, भर्ती प्रक्रिया और पर्यावरण
संरक्षण जैसे मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई। कार्यक्रम में पूर्वी कमान
के चीफ ऑफ स्टाफ लेफ्टिनेंट जनरल गंभीर सिंह, प्रादेशिक सेना के अतिरिक्त
महानिदेशक मेजर जनरल सुजीत शिवाजी पाटिल समेत कई वरिष्ठ सेवारत और
सेवानिवृत्त अधिकारी मौजूद रहे।
पूर्व उप सेना प्रमुख लेफ्टिनेंट
जनरल राकेश कपूर (सेवानिवृत्त) ने ‘टीए के भविष्य की दृष्टि’ विषय पर मुख्य
संबोधन दिया। उन्होंने तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल के बीच प्रादेशिक सेना के
भविष्य की रूपरेखा पर अपने विचार रखे।
कार्यक्रम की पहली परिचर्चा
‘भारत की राष्ट्रीय प्रतिभा को अवसर देना’ विषय पर हुई। इसमें आईआईटी
खड़गपुर के प्रोफेसर बसब चक्रवर्ती, भारतीय प्राणी सर्वेक्षण की निदेशक
धृति बनर्जी, एक्सआईएम विश्वविद्यालय भुवनेश्वर के कुलपति फादर केएस
कैसामिर और जेनरोबोटिक्स इनोवेशन के सीईओ विमल गोविंद एमके शामिल हुए।
इसके बाद प्रादेशिक सेना में भर्ती प्रक्रिया की जानकारी दी गई और ‘नो योर टीए’ फिल्म दिखाई गई।
दूसरी
परिचर्चा में पर्यावरण, शासन और सामाजिक मुद्दों पर चर्चा हुई। इसमें
मेघालय लोकायुक्त के अध्यक्ष सी.पी. मराक, धृति बनर्जी और पर्यावरण एवं
प्रशासन से जुड़ी विशेषज्ञ श्रुति शर्मा राणा ने हिस्सा लिया।
कार्यक्रम
के दौरान प्रादेशिक सेना और सात सहयोगी संस्थानों के बीच समझौता ज्ञापनों
का औपचारिक आदान-प्रदान भी किया गया। इसके बाद आधिकारिक गीत का विमोचन हुआ।
रणनीतिक
विश्लेषक और रक्षा मामलों के टिप्पणीकार नितिन ए. गोखले ने भी प्रादेशिक
सेना के भविष्य के विकास और बदलते स्वरूप पर अपने विचार रखे।
केवाईटीए
की प्रदर्शनी और सांस्कृतिक कार्यक्रम आम लोगों के लिए भी खुले रहे। बड़ी
संख्या में नागरिकों, स्कूली छात्रों और एनसीसी कैडेटों ने प्रदर्शनी का
दौरा किया और प्रादेशिक सेना की गतिविधियों एवं योगदान को करीब से जाना।
सांस्कृतिक
कार्यक्रमों के दौरान प्रादेशिक सेना की सांस्कृतिक टुकड़ियों ने
प्रस्तुतियां दीं। इस आयोजन के जरिए युवाओं और आम लोगों को प्रादेशिक सेना
की भूमिका, कार्यप्रणाली और देश सेवा में उसके योगदान से परिचित कराने की
कोशिश की गई।














