दिव्यांग बेटियों ने बनाई पर्यावरण अनुकूल राखियां, दिया स्वावलंबन का संदेश
मेदिनीपुर, पश्चिम मेदिनीपुर जिले के दांतन स्थित मानव कल्याण
केंद्र की आवासीय दिव्यांग बेटियों ने इस बार रक्षाबंधन के लिए अपने हाथों
से पर्यावरण अनुकूल राखियां तैयार की हैं। शारीरिक और मानसिक चुनौतियों के
बावजूद इन बेटियों की रचनात्मकता और मेहनत लोगों का ध्यान आकर्षित कर रही
है।
मानव कल्याण केंद्र में रहने वाली बेटियां प्रशिक्षकों की
सहायता से पिछले करीब दो महीने से राखियां बनाने रही है। बाजार में मिलने
वाली प्लास्टिक और कृत्रिम राखियों के स्थान पर प्राकृतिक सामग्री का
इस्तेमाल कर आकर्षक राखियां तैयार की जा रही हैं।
इन राखियों को
बनाने में धान, जूट, रंगीन कागज, मटर और चने जैसी सामग्री का उपयोग किया जा
रहा है। कुछ राखियों में विभिन्न प्रकार के बीज भी लगाए जा रहे हैं।
केंद्र के अनुसार, इस्तेमाल के बाद यदि ये राखियां मिट्टी में मिल जाती हैं
तो इनमें मौजूद बीजों से पौधे भी उग सकते हैं। इस तरह राखियों के माध्यम
से पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया जा रहा है।
केंद्र सूत्रों के
अनुसार, रक्षाबंधन के लिए अब तक करीब डेढ़ से दो हजार पर्यावरण अनुकूल
राखियां तैयार की जा चुकी हैं। इन राखियों की बिक्री से विशेष जरूरत वाली
बेटियों के लिए आय का रास्ता भी तैयार होगा। इसके साथ ही रक्षाबंधन के अवसर
पर स्थानीय सरकारी और निजी कार्यालयों के अधिकारियों की कलाई पर भी उनके
हाथों से तैयार राखियां बांधी जाएंगी।
संस्था की शिक्षिका काकोली दी
ने बताया, “इन राखियों को जिले के विभिन्न स्थानों और सरकारी कार्यालयों
में भी भेजा जाता है। राखियों की कीमत 10 रुपये से लेकर 60 रुपये तक रखी गई
है। बिक्री से मिलने वाली राशि बच्चों के खाते में जमा कर दी जाती है।
दिव्यांग बच्चों में भी प्रतिभा और रचनात्मकता की कोई कमी नहीं है। उन्हें
उचित अवसर और प्रशिक्षण मिले तो वे अपने हुनर के जरिए आत्मनिर्भर बन सकते
हैं और समाज की मुख्यधारा में सम्मान के साथ आगे बढ़ सकते हैं।”
इस
पहल से बेटियों में आत्मविश्वास और स्वावलंबन की भावना मजबूत हो रही है।
मानव कल्याण केंद्र की यह पहल यह संदेश देती है कि शारीरिक या मानसिक
चुनौतियां किसी व्यक्ति की प्रतिभा और रचनात्मकता के रास्ते में बाधा नहीं
बन सकतीं। अपनी मेहनत और कला के माध्यम से ये बेटियां समाज की मुख्यधारा से
जुड़ने का प्रयास कर रही हैं।














