(RANCHI): नेपाल के पहले एक्सप्रेस-वे का निर्माण कार्य बहुत तेजी से चल रहा है. इससे पूरा होने के बाद मध्य तराई से काठमांडू तक की दूरी 6-8 घंटे तक कम होकर महज एक घंटे की रह जाएगी. इतना ही नहीं भारतीय सीमा बिहार के रक्सौल से सिर्फ डेढ़ घंटे में काठमांडू पहुंचा जा सकेगा. सेना के प्रवक्ता राजाराम बस्नेत के अनुसार परियोजना पूरी होने के बाद काठमांडू से मध्य तराई तक की यात्रा लगभग एक घंटे में संभव हो सकेगी.


निर्माण कार्य 45 प्रतिशत से अधिक पूरा 

तराई–मधेश एक्सप्रेस-वे परियोजना का निर्माण कार्य 45 प्रतिशत से अधिक पूरा हो चुका है. नेपाली सेना द्वारा संचालित इस परियोजना में अब तक कुल भौतिक प्रगति 45.16 प्रतिशत हुई है. महादेव डांडा, ढेढ्रे, लेन डांडा, चन्द्रभिर, देवीचौर, सिसौटार और मौरिभिर में प्रस्तावित सात सुरंगों में से पांच पर फिलहाल निर्माण कार्य जारी है. नेपाली सेना के सड़क निर्माण परियोजना दल के अनुसार मकवानपुर के ढेढ्रे और लेन डांडा क्षेत्र में स्थित चार सुरंगों में ब्रेकथ्रू पूरा हो चुका है.

वित्त वर्ष के अंत तक दो और सुरंगों में ब्रेकथ्रू होने की उम्मीद

सेना के तकनीकी प्रमुख कर्नल मिलन कार्की के अनुसार मौजूदा वित्त वर्ष के अंत तक दो और सुरंगों में ब्रेकथ्रू होने की उम्मीद है. परियोजना के अंतर्गत सभी सुरंगों की कुल लंबाई 10.979 किलोमीटर है. कुल 70.977 किलोमीटर लंबा यह एक्सप्रेस-वे ललितपुर के खोकना से शुरू होकर काठमांडू, मकवानपुर होते हुए बारा के निजगढ़ में पूर्व–पश्चिम राजमार्ग से जुड़ेगा. पहाड़ी क्षेत्रों में इसकी चौड़ाई 25 मीटर और तराई क्षेत्र में 27 मीटर होगी. परियोजना में ललितपुर में 9 किलोमीटर, काठमांडू में 4.6 किलोमीटर, मकवानपुर में 49.7 किलोमीटर और बारा में 7.6 किलोमीटर सड़क शामिल है.

मौजूदा वित्त वर्ष के अंत तक 15 पुलों के पूरा होने की उम्मीद

सेना के प्रवक्ता राजाराम बस्नेत के अनुसार, फास्ट ट्रैक पर छोटे-बड़े कुल 89 पुलों का निर्माण प्रस्तावित है. अब तक 13 स्थानों पर 13 पुलों का निर्माण पूरा हो चुका है, जिनमें कुछ विशेष डिज़ाइन वाले और 82 मीटर तक ऊंचे पुल शामिल हैं. बस्नेत के मुताबिक 85 पुलों के लिए ठेका देने का कार्य पूरा हो चुका है जबकि चार स्थानों पर भूमि अधिग्रहण से जुड़ी समस्याएं बनी हुई हैं. मौजूदा वित्त वर्ष के अंत तक 15 पुलों के पूरा होने की उम्मीद है. इसके अलावा 11 किलोमीटर सड़क में से 5 किलोमीटर हिस्से के सब-बेस और सर्विस लेन का काम भी पूरा किया जा चुका है.

परियोजना को मार्च 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य

संघीय राजधानी को कम समय में तराई से जोड़ने वाला यह राजमार्ग “एशियन हाई-वे स्टैंडर्ड” के अनुसार बनने वाला देश का पहला एक्सप्रेस वे है और इसका रणनीतिक महत्व भी अत्यधिक है. परियोजना की प्रारंभिक अनुमानित लागत 213 अरब रुपये थी, जिसको मार्च 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है. परियोजना पूरी होने के बाद काठमांडू से मध्य तराई तक की यात्रा लगभग एक घंटे में संभव हो सकेगी. इस समय काठमांडू पहुंचने के कई रास्ते हैं जिनमें सबसे छोटी दूरी के रास्ते से भी न्यूनतम 6 घंटे का समय लगता है.