बांग्लादेश में हिंदू संत चिन्मय ब्रह्मचारी को एक और मामले में मिली जमानत
ढाका, बांग्लादेश में चट्टोग्राम ( पुराना नाम चटगांव) की एक
अदालत ने प्रख्यात हिंदू संत चिन्मय कृष्ण दास ब्रह्मचारी को एक मामले में
जमानत प्रदान कर दी। चिन्मय ब्रह्मचारी नवंबर 2024 से सलाखों के पीछे
हैं। न्यायिक मजिस्ट्रेट शखावत हुसैन ने गुरुवार को जमानत आदेश जारी किया।
हिंदू संत के खिलाफ अनेक मामले दर्ज हैं। इसलिए अभी उन्हें न्यायिक हिरासत
में ही रहना होगा। उन्हें चट्टोग्राम जेल में रखा गया है। इससे पहले उन्हें
ढाका उच्च न्यायालय से बहुचर्चित देशद्रोह मामले में जमानत प्राप्त हो
चुकी है।
ढाका ट्रिब्यून की रिपोर्ट के अनुसार, जिस मामले में
हिंदू संत को जमानत प्रदान की गई है, उसे बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी
(बीएनपी) नेता और पूर्व मंत्री मीर मोहम्मद नासिर उद्दीन ने 2023 में दायर
किया था। उन्होंने अपनी शिकायत में ब्रह्मचारी पर हाथजारी उपजिला के मेखला
इलाके में जमीन पर कब्जा करने, धमकाने और मारपीट करने का आरोप लगाया था।
इस मामले में चिन्मय कृष्ण दास और पांच अन्य लोगों को आरोपी बनाया था।
ब्रह्मचारी के खिलाफ वकील सैफ़ुल इस्लाम अलीफ की हत्या का मामला भी चल रहा
है। उनपर कम से कम छह अन्य मामले भी विचाराधीन हैं। अदालत ने सात अप्रैल
को बीएनपी नेता नासिर उद्दीन के मामले में हिंदू संत को औपचारिक रूप से
गिरफ्तार करने याचिका को मंजूरी दी थी।
उल्लेखनीय है कि 26 नवंबर,
2024 को राष्ट्रीय ध्वज के कथित अपमान को लेकर राजद्रोह का मामला सामने आने
के बाद हिंसा भड़क उठी थी। इस दौरान वकील सैफ़ुल इस्लाम अलिफ की भीड़ ने
पीट-पीटकर और चाकू मारकर हत्या कर दी थी। इस घटना के बाद उनके पिता जमाल
उद्दीन ने 31 लोगों के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज कराया था। वकील हत्याकांड
में उनकी जमानत याचिका कई बार खारिज हो चुकी है। अन्य मामलों में उन पर
हत्या, पुलिस पर हमला, तोड़फोड़ और न्याय में बाधा डालने जैसे आरोप शामिल
हैं।
एक जुलाई, 2025 को पुलिस ने वकील सैफुल इस्लाम अलिफ की हत्या
के सिलसिले में चिन्मय और 38 अन्य लोगों के खिलाफ अदालत में आरोप पत्र
दाखिल किया था। इससे पहले दो जनवरी को अदालत ने हिंदू संत चिन्मय कृष्ण
दास ब्रह्मचारी की वकील हत्या के मामले में जमानत याचिका खारिज कर दी थी।
चिन्मय कृष्ण दास ब्रह्मचारी को ढाका मेट्रोपॉलिटन पुलिस की जासूसी शाखा ने
25 नवंबर, 2024 की शाम 4:30 बजे हजरत शाहजलाल अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से
हिरासत में लिया था। तब से ब्रह्मचारी जेल में बंद हैं।
ब्रह्मचारी
की गिरफ्तारी के विरोध में ढाका के शाहबाग और चटगांव में कई दिनों तक
लोगों ने प्रदर्शन किया था। लगभग 40 वर्षीय हिंदू संत चिन्मय को देशद्रोह
के गंभीर आरोप का सामना करना पड़ा रहा है। देशद्रोह के मामले में उन्हें
अप्रैल 2025 में ढाका उच्च न्यायालय से जमानत मिल चुकी है। चिन्मय मूल रूप
से चटगांव के सतकनिया उपजिला के रहने वाले हैं। वह 2007 से चटगांव के
हथाजारी स्थित पुंडरीक धाम के प्रमुख रहे हैं। वह सनातन जागरण मंच के
संस्थापक हैं। मंच ने बांग्लादेश में हिंदुओं के उत्पीड़न का मुद्दा
प्रमुखता से उठाया है। इस घटना ने बांग्लादेश में अल्पसंख्यक समुदाय की
सुरक्षा को लेकर काफी चिंताएं पैदा की थीं। भारत सरकार ने इस पर अपनी गहरी
चिंता व्यक्त की थी।















