सन 1942 में बैरिया में शहीद हुए थे बीस क्रांतिकारी, लोगों ने किया नमन
बलिया, सन
1942 की अगस्त क्रांति से सर्वाधिक प्रभावित जिलों में बलिया अग्रणी रहा।
19 अगस्त को बलिया में अंग्रेजी हुकूमत खत्म होने से पहले 18 अगस्त 1942 के
बैरिया के बलिदानियों ने अपने पराक्रम से अंग्रेजों की चूलें हिला डाली
थी। जिसमें कई सेनानी शहीद हुए थे। जिनकी याद में हर वर्ष बैरिया बलिदान
दिवस आयोजित किया जाता है।
इसी दिन द्वाबा के क्रांतिकारियों ने
बैरिया थाना पर हमला बोला था। जिसमें 20 लोगों ने अपना बलिदान दिया। लगभग
150 लोगों को गोली लगी थी। बैरिया बलिदान दिवस पर शहीदों की स्मृति को
जिंदा रखने के लिए हर साल भारी संख्या में लोग पहुंचते हैं और स्मारक पर
श्रद्धा के पुष्प अर्पित करते हैं। सैकड़ों लोगों ने मंगलवार को बैरिया
स्थित स्मारक पर श्रद्धा के पुष्प अर्पित किए।
लोगों ने अमर सेनानियों को
पूरी श्रद्धा से नमन किया। भाजपा के पूर्व सांसद वीरेंद्र सिंह मस्त ने भी
फूलमाला चढ़ाकर बलिदानियों को नमन किया। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता आंदोलन
में बलिया और बैरिया का अहम स्थान है। जिन्होंने अपना सब कुछ बलिदान किया,
उनके गांव को विकास की धारा से जोड़ने के लिए सरकार काम कर रही है। इस अवसर
पर भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष जयप्रकाश साहू, विजय बहादुर सिंह आदि थे।