घरेलू शेयर बाजार में ब्लैक फ्राइडे, जानिए बाजार की गिरावट की पांच प्रमुख वजहें
नई
दिल्ली, घरेलू शेयर बाजार में लगातार तीन दिन से जारी
कमजोरी आज ब्लैक फ्राईडे के रूप में बदल गई। लगातार तीसरे दिन घरेलू शेयर
बाजार जोरदार गिरावट का शिकार हो गया। इन तीन दिन में सेंसेक्स 2,609.12
अंक यानी 3.29 प्रतिशत की गिरावट का शिकार हो गया। इसी तरह निफ्टी भी तीन
दिन के कारोबार में 678.65 अंक यानी 2.76 प्रतिशत टूट गया। आज भी सेंसेक्स
ने लगभग एक हजार अंक का गोता लगाया। इसी तरह निफ्टी भी पौने तीन सौ अंक
लुढ़क कर बंद हुआ।
माना जा रहा है कि पश्चिम एशिया में जारी तनाव को
खत्म करने के लिए प्रस्तावित बातचीत में हो रही देरी, कच्चे तेल की कीमत
में आई तेजी, विदेशी संस्थागत निवेशकों और विदेशी फंड हाउसेज द्वारा घरेलू
शेयर बाजार में लगातार की जा रही बिकवाली, आईटी सेक्टर में आई जबरदस्त
गिरावट और इंडिया वोलैटिलिटी इंडेक्स (इंडिया वीआईएक्स) में आए उछाल के
कारण घरेलू शेयर बाजार आज लगातार तीसरे दिन बड़ी गिरावट का शिकार हो गया।
फिनरेक्स
ट्रेजरी एडवाइजर्स एलएलपी के एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर अनिल भंसाली का कहना
है कि अमेरिका और ईरान के बीच दूसरे द्वारा की शांति वार्ता शुरू होने में
हो रही देरी से दुनिया भर के निवेशकों के बीच घबराहट का माहौल बना हुआ है।
पहले दौर की बातचीत असफल होने के बाद होर्मुज स्ट्रेट के मसले पर दोनों
पक्षों के बीच तनातनी पहले से भी अधिक बढ़ गई है। सीजफायर के बावजूद दोनों
देश एक दूसरे को तबाह कर देने की धमकी दे रहे हैं। इसकी वजह से तनाव का
माहौल बना हुआ है और वैश्विक अर्थव्यवस्था के प्रभावित होने का खतरा बन गया
है।
इसी तरह होर्मुज स्ट्रेट के मसले पर दोनों पक्षों के हठी रवैये
के कारण दुनिया भर में क्रूड ऑयल (कच्चा तेल) और गैसोलीन की सप्लाई
प्रभावित हुई है। दुनिया भर में कच्चे तेल की सप्लाई के लिए होर्मुज
स्ट्रेट एक प्रमुख समुद्री रास्ता है, जहां से ज्यादातर खाड़ी देशों के
मालवाहक जहाज और तेल टैंकर गुजरते हैं। पश्चिम एशिया में जारी जंग की वजह
से यह प्रमुख समुद्री रास्ता लगभग ठप पड़ गया है।
होर्मुज स्ट्रेट
के ठप हो जाने की वजह से कच्चे तेल की कीमत में लगातार तेजी का रुख बना हुआ
है। आज ब्रेंट क्रूड 107.33 डॉलर प्रति बैरल के स्तर तक उछल गया। इसी तरह
वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (डब्ल्यूटीआई क्रूड) ने भी 97.85 डॉलर प्रति बैरल
के स्तर तक छलांग लगाई। कच्चे तेल की कीमत में आई तेजी के कारण भारत की
अर्थव्यवस्था पर काफी प्रतिकूल असर पढ़ने की आशंका बन गई है।
भारत
कच्चे तेल की अपनी लगभग 88 प्रतिशत जरूरत अंतरराष्ट्रीय बाजार से इंपोर्ट
के जरिए ही पूरी करता है। घरेलू उत्पादन देश की जरूरत का 12 प्रतिशत ही
पूरा कर पाता है। देश के इंपोर्ट बिल में कच्चे तेल की हिस्सेदारी सबसे
अधिक है। ऐसे में अगर कच्चे तेल की कीमत में तेजी जारी रही, तो भारत के
इंपोर्ट बिल में काफी बढ़ोतरी हो सकती है, जिससे अंततः भारत की देश की
अर्थव्यवस्था पर असर पड़ेगा और महंगाई बढ़ जाएगी।
अनिल भंसाली का
कहना है कि वैश्विक अर्थव्यवस्था से कमजोर संकेत मिलने की वजह से विदेशी
संस्थागत निवेशक और विदेशी फंड हाउसेज भी घरेलू शेयर भारतीय शेयर बाजार में
लगातार बिकवाली कर अपना पैसा निकाल रहे हैं। फरवरी के बाद से ही विदेशी
निवेशक एकतरफा बिकवाली करने में जुटे हुए हैं। विदेशी फंड हाउसेज ने लार्ज
कैप में सबसे अधिक निवेश किया है। इसलिए इनकी बिकवाली का असर सेंसेक्स और
निफ्टी जैसे बेंचमार्क इंडेक्स की चाल में साफ-साफ नजर आता है। इन दोनों
सूचकांक को की चाल में गिरावट आने से टोटल मार्केट सेंटीमेंट प्रभावित होता
है और बाजार में बिकवाली का दबाव बन जाता है।
इसके अलावा आज घरेलू
शेयर बाजार में आईटी सेक्टर में जबरदस्त बिकवाली का दबाव बना रहा। निफ्टी
के आईटी इंडेक्स में शामिल दस कंपनियों में से नौ कंपनियों के शेयर गिरावट
का शिकार होकर लाल निशान में बंद हुए। पूरे दिन के कारोबार के बाद निफ्टी
का आईटी इंडेक्स 1,593.70 अंक यानी 5.29 प्रतिशत की गिरावट के साथ बंद हुआ।
आईटी सेक्टर में हुई जोरदार बिकवाली ने भी स्टॉक मार्केट में डर का माहौल
बना दिया।
इन तमाम फैक्टर्स के अलावा इंडिया वोलैटिलिटी इंडेक्स
(इंडिया वीआईएक्स) में भी आज छह प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई। इस तेजी के
कारण इंडिया वीआईएक्स उछलकर 19.7 के स्तर पर पहुंच गया। ये इंडेक्स बाजार
में मौजूद निवेशकों की घबराहट का संकेत देता है। मतलब अगर इंडिया वीआईएक्स
में तेजी आती है, तो उससे पता चलता है कि निवेशक घबराहट के माहौल में
कारोबार कर रहे हैं।
इंडिया वीआईएक्स का 15 से ऊपर का स्तर हमेशा ही
बाजार के लिए काफी खराब संकेत माना जाता है। इस इंडेक्स का 15 से ऊपर का
स्तर शॉर्ट टर्म में बाजार में जारी अनिश्चितता को दर्शाता है। आज इंडिया
वीआईएक्स उछल कर 19.7 के स्तर पर पहुंच गया, जिसकी वजह से निवेशकों ने
घबराहट में पैनिक सेलिंग शुरू कर दी। इस पैनिक सेलिंग के कारण बाजार की चाल
में तुलनात्मक तौर पर अधिक गिरावट आ गई।















