भागलपुर,  पूर्वांचल को सीमांचल और उत्तर बिहार से जोड़ने वाली लाइफलाइन गंगा नदी पर बना विक्रमशिला सेतु आगामी 1 अक्टूबर 2026 से अगले तीन महीनों (90 दिनों) के लिए पूरी तरह बंद होने जा रहा है। इस अवधि में पुल पर सभी प्रकार के वाहनों की आवाजाही पर पूर्ण विराम रहेगा।

उल्लेखनीय है कि, 26 मई 2026 की देर रात इस ऐतिहासिक पुल का एक हिस्सा अचानक टूटकर गंगा नदी में समा गया था, जिसके बाद बॉर्डर रोड संगठन द्वारा आपातकालीन स्थिति में एक बेली ब्रिज का निर्माण कर यातायात बहाल किया गया था। अब इसी क्षतिग्रस्त हिस्से पर स्थायी स्टील ट्रस ब्रिज के निर्माण की विधिवत शुरुआत होने जा रही है।

बिहार सरकार के सड़क निर्माण विभाग के मंत्री इंजीनियर कुमार शैलेंद्र के अनुसार, लगभग 99 करोड़ रुपये की लागत से इस पुल का कायाकल्प और स्थायी पुनर्स्थापन कार्य किया जाएगा। 30 सितंबर की रात से ही पुल पर बैरिकेडिंग कर चारों बेली ब्रिज को हटाने का काम शुरू कर दिया जाएगा।

प्रशासन ने दावा किया है कि तय समय-सीमा यानी 3 महीने के भीतर इस निर्माण कार्य को पूरा कर नया चमचमाता पुल जनता को समर्पित कर दिया जाएगा। पुल बंद होने से लाखों लोगों और स्थानीय कारोबारियों को होने वाली भारी असुविधा को देखते हुए जिला प्रशासन और बिहार सरकार ने पुख्ता वैकल्पिक जलमार्ग की तैयारी की है। गंगा पार करने के लिए प्रशासन की ओर से 12 बड़े जहाजों का बेड़ा उतारा जाएगा, जो 24 घंटे बिल्कुल मुफ्त सेवा देंगे।

आपातकालीन और इमरजेंसी मेडिकल सेवाओं के लिए ये जहाज रात-दिन तत्पर रहेंगे ताकि किसी मरीज या राहगीर को कोई परेशानी न हो। जलमार्ग के अलावा जिन यात्रियों को भारी वाहनों अथवा सड़क मार्ग से ही सफर तय करना है, उनके लिए मुंगेर-मिर्जाचौकी फोरलेन परियोजना के तहत मुंगेर से भागलपुर के बीच नवनिर्मित टू-लेन मार्ग को चालू कर दिया गया है। इससे लोग भागलपुर से उत्तर बिहार जाने के लिए मुंगेर पुल का इस्तेमाल कर वैकल्पिक रास्ते से सफर पूरा कर सकेंगे।

बिहार पुल निर्माण निगम और जिला प्रशासन ने आम जनता से अपील की है कि वे इस कायाकल्प कार्य में सहयोग करें। तीन महीनों के बाद जब पुल फिर से खुलेगा, तो यह बिल्कुल नए स्वरूप में होगा, जिसमें बेहतर रेलिंग, नया रोड सर्फेस, दुरुस्त एक्सपेंशन जॉइंट और आधुनिक लाइटिंग की व्यवस्था शामिल होंगी।