राघोपुर तटबंध पर गंगा का भीषण पलटवार, पथ निर्माण मंत्री के हस्तक्षेप के बाद युद्धस्तर पर बचाव कार्य जारी
भागलपुर, जिले के नवगछिया अनुमंडल अंतर्गत राघोपुर में गंगा और कोसी नदियों के उफान के कारण स्थिति बेहद चुनौतीपूर्ण बनी हुई है।
विगत
दिनों तटबंध का एक हिस्सा क्षतिग्रस्त होने से राघोपुर पंचायत के कई
वार्डों में बाढ़ का पानी प्रवेश कर गया, जिसके बाद से ही राहत और बचाव
कार्य तेज कर दिए गए हैं। इस गंभीर संकट पर स्थानीय विधायक और सूबे के पथ
निर्माण मंत्री इंजीनियर कुमार शैलेंद्र लगातार ग्राउंड जीरो पर कैंप कर
स्थिति की कमान संभाले हुए हैं।
तटबंध पर मंडराते खतरे को
देखते हुए पथ निर्माण मंत्री इंजीनियर कुमार शैलेंद्र ने घटना से पहले ही
अधिकारियों और जल संसाधन विभाग के अभियंताओं के साथ मौके का मुआयना किया
था। मंत्री ने जल संसाधन विभाग के कार्यपालक अभियंता से गंगा की धारा के
घूर्णन और उसके दबाव को लेकर समीक्षा की थी तथा ग्रामीणों की शिकायत पर
बांध की दरारों को तुरंत भरने का निर्देश दिया था। कटाव पूर्व निरीक्षण के
दौरान मंत्री ने कहा था, "विगत 14 वर्षों से इस क्षेत्र में ऐसी विकराल
कटाव की स्थिति उत्पन्न नहीं हुई थी, जिसके कारण यहाँ स्थायी बोल्डर पिचिंग
का कार्य नहीं हो सका था। हम प्रभावित लोगों के लिए पर्याप्त चापाकल,
पॉलिथीन और अस्थाई शौचालय की व्यवस्था सुनिश्चित करा रहे हैं।
इसके
साथ ही, कुर्सेला से बक्सर तक गोपालपुर-राघोपुर होते हुए प्रस्तावित मरीन
ड्राइव योजना से इस समस्या का स्थायी समाधान निकाला जाएगा। मुख्यमंत्री
सम्राट चौधरी भी स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। वहीं बांध का हिस्सा
क्षतिग्रस्त होने और कटाव के विकराल रूप धारण करने के बाद मंत्री ने त्वरित
प्रशासनिक और सरकारी हस्तक्षेप सुनिश्चित कराया।
स्थिति बिगड़ते
देख पथ निर्माण मंत्री ई. शैलेंद्र और ऊर्जा मंत्री बुलो मंडल ने संयुक्त
रूप से राज्य सरकार को 'त्राहिमाम संदेश' भेजा, जिसके बाद शासन-प्रशासन
पूरी तरह हरकत में आया। मंत्रियों के हस्तक्षेप के बाद आपदा प्रबंधन और जल
संसाधन विभाग के दो शीर्ष सचिवों डॉ. चंद्रशेखर सिंह समेत ने स्वयं ग्राउंड
जीरो पर डेरा डाला। तटबंध की मरम्मत के लिए खगड़िया और अन्य जिलों से
मिट्टी, बालू और बोल्डर लदे लगभग 50 ट्रक मंगाए गए थे, जो जान्हवी चौक के
पास जाम में फंस गए थे। मंत्री ने तत्काल राज्य के मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत
से फोन पर वार्ता कर मार्ग को सुगम कराया ताकि फ्लड फाइटिंग सामग्री समय
पर पहुँच सके।
उल्लेखनीय है कि रात-दिन चले फ्लड फाइटिंग रेस्क्यू
के बाद प्रभावित 350 मीटर क्षेत्र में एज प्रोटेक्शन का काम पूरा कर लिया
गया है, जिससे फिलहाल कटाव का तात्कालिक खतरा टल गया है। गंगा की मुख्य
धारा के दबाव को मोड़ने के लिए ड्रेजर मशीनों से गाद हटाई जा रही है।
कन्हैया लॉजिस्टिक और रबिया नामक बड़े जहाजों के जरिए नदी में मेगा सैंड
बैग गिराए जा रहे हैं।
भागलपुर की जिलाधिकारी अलंकृता पांडेय,
नवगछिया एसपी और एसडीओ लगातार मौके पर मुस्तैद हैं। हालांकि, नदी का जलस्तर
दोबारा बढ़ने से निचले इलाकों में पानी का फैलाव जारी है, लेकिन बचे हुए
संवेदनशील हिस्सों को स्थायी मजबूती देने के लिए बोल्डर पिचिंग की तैयारी
युद्धस्तर पर की जा रही है।















