कोलकाता बंदरगाह पर लहराया 197 फीट ऊंचा तिरंगा
कोलकाता, ‘हर घर तिरंगा’ अभियान के तहत श्यामा प्रसाद मुखर्जी
पोर्ट प्राधिकरण ने नेताजी सुभाष डॉक में 60 मीटर ऊंचे ध्वजस्तंभ पर
राष्ट्रीय ध्वज फहराया। करीब 197 फीट ऊंचा यह तिरंगा कोलकाता में स्थापित
सबसे ऊंचे राष्ट्रीय ध्वजों में से एक है।
पोर्ट प्राधिकरण के एक
वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि ध्वजस्तंभ पर 30 फीट लंबा और 20 फीट चौड़ा
राष्ट्रीय ध्वज लगाया गया है। इससे ऐतिहासिक बंदरगाह परिसर में तिरंगा एक
नए प्रमुख स्थल के रूप में उभरा है। उन्होंने कहा कि यह पहल ‘हर घर तिरंगा’
की भावना के अनुरूप राष्ट्रीय गौरव, एकता और विकसित भारत के प्रति सामूहिक
प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
अधिकारी के अनुसार, ऐतिहासिक गोदी के
ऊपर लहराता तिरंगा कोलकाता बंदरगाह की भारत की समुद्री विरासत और राष्ट्र
निर्माण में लंबे समय से रही भूमिका का प्रतीक है।
यह ध्वजस्तंभ
स्थायी रूप से स्थापित किया गया है और इसकी अनुमानित उपयोग अवधि 25 वर्ष
है। इसे उच्च क्षमता वाले इस्पात से बने 20-भुजाकार ढांचे के रूप में तैयार
किया गया है। इसके लिए प्रबलित सीमेंट कंक्रीट की नींव बनाई गई है। ध्वज
को मोटर चालित दोहरे ड्रम वाली चरखी प्रणाली के माध्यम से फहराया और उतारा
जाता है।
कोलकाता बंदरगाह देश का सबसे पुराना परिचालनरत नदी आधारित
प्रमुख बंदरगाह है। इसका औपचारिक संचालन 1870 में शुरू हुआ था। नया ध्वज
ऐतिहासिक घड़ी टावर के पास लगाया गया है। यह घड़ी टावर 1899 में बनाया गया
था और यहां आने वाले जहाजों के लिए समय की जानकारी देने में महत्वपूर्ण
भूमिका निभाता था।
नेताजी सुभाष डॉक को वर्ष 1928 में ‘किंग जॉर्ज
डॉक’ के रूप में शुरू किया गया था। वर्ष 1973 में इसका नाम बदलकर नेताजी
सुभाष डॉक कर दिया गया। द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान भी इस डॉक की
महत्वपूर्ण भूमिका रही थी। चीन-बर्मा-भारत क्षेत्र में चलाए गए सैन्य
अभियानों के लिए यहां सैनिकों और सैन्य उपकरणों की आवाजाही हुई थी।
वर्तमान
में नेताजी सुभाष डॉक में 10 बर्थ हैं, जिनमें भारी माल उठाने के लिए
विशेष बर्थ भी शामिल है। यहां चार कंटेनर बर्थ, एक तरल माल बर्थ और चार
बहुउद्देश्यीय बर्थ के अलावा दो बोया और मूरिंग सुविधाएं हैं। इसकी दो सूखी
गोदियों का इस्तेमाल गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स द्वारा जहाजों
की मरम्मत और पुनर्निर्माण के लिए किया जाता है।
नेताजी सुभाष डॉक
आज एक प्रमुख कंटेनर केंद्र है, जहां उत्तर और पूर्वोत्तर भारत के राज्यों
के साथ-साथ नेपाल और भूटान जैसे स्थलरुद्ध देशों के लिए भी माल की आवाजाही
होती है।















