कोलकाता, पश्चिम बंगाल की सागरदिघी विधानसभा क्षेत्र सीट पर मतदान से पांच दिन पहले तृणमूल कांग्रेस विधायक बायरन विश्वास के बयान से सियासी हलचल तेज हो गई है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ही उनके राजनीतिक गुरु हैं और वह जीवनभर उन्हें गुरु मानते रहेंगे। साथ ही उन्होंने स्वीकार किया कि कांग्रेस छोड़ना अधीर चौधरी के साथ एक तरह का “विश्वासघात” था।

शुक्रवार को अपने कार्यालय में आयोजित पत्रकार वार्ता में बायरन विश्वास ने कहा कि मैंने विश्वासघात किया है, इसे नकारूंगा नहीं। मेरी राजनीतिक शुरुआत अधीर चौधरी के हाथों हुई। मैं उन्हें जीवनभर याद रखूंगा और सम्मान दूंगा। वह मेरे गुरु और बड़े भाई की तरह हैं। बड़े भाई छोटे भाई के बारे में कुछ भी कह सकते हैं, इससे मुझे कोई दुख नहीं होता।

उल्लेखनीय है कि वर्ष 2023 में विधायक सुब्रता साहा के निधन के बाद सागरदिघी में हुए उपचुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार के रूप में बायरन विश्वास ने सत्तारूढ़ दल के प्रत्याशी को पराजित कर जीत दर्ज की थी। उस समय राज्य की राजनीति में उनकी जीत को महत्वपूर्ण माना गया था।

हालांकि एक वर्ष के भीतर ही बायरन विश्वास ने कांग्रेस छोड़कर अभिषेक बनर्जी की मौजूदगी में तृणमूल कांग्रेस का दामन थाम लिया था। इसके बाद से सागरदिघी क्षेत्र में उनके दल-बदल को लेकर राजनीतिक विवाद और असंतोष बना हुआ है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बायरन विश्वास के इस बयान से सागरदिघी की चुनावी राजनीति में नई चर्चा शुरू हो गई है।

वहीं, स्थानीय कांग्रेस कार्यकर्ताओं के एक वर्ग का कहना है कि अधीर चौधरी ने इस सीट पर मनोज चक्रवर्ती को उम्मीदवार बनाया है, जिसे लेकर भी विभिन्न राजनीतिक समीकरणों पर चर्चा हो रही है।