रांची (RANCHI): नाग पंचमी का संबंध केवल नाग देवता की पूजा से ही नहीं है। यह त्योहार कई आध्यात्मिक परंपराओं से भी जुड़ा है और इस अवसर पर नाग देवता और भगवान शिव की पूजा को बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। इस साल नाग पंचमी 17 अगस्त को मनाई जाएगी। एक इंस्टाग्राम वीडियो में, आध्यात्मिक गुरु ने इस त्योहार के आध्यात्मिक महत्व के बारे में बात की, जिसमें काल सर्प दोष, कर्मिक ऊर्जा और नाग देवता व भगवान शिव का आशीर्वाद पाने जैसी बातें शामिल हैं।

नाग पंचमी पर नाग देवता की पूजा क्यों की जाती है?

नाग पंचमी श्रावण महीने के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाई जाती है। इस दिन नाग देवता की पूजा की जाती है और उनका संबंध भगवान शिव से भी है, जिन्हें गले में सांप लपेटे हुए दिखाया जाता है। गुरु ने आध्यात्मिक नज़रिए से नाग पंचमी को "बहुत शक्तिशाली और महत्वपूर्ण दिन" बताया। उन्होंने कहा कि इस दिन नाग देवता की पूजा करने से भक्तों को काल सर्प दोष से राहत मिल सकती है और जीवन की बाधाएं दूर हो सकती हैं। उन्होंने यह भी कहा कि नाग पंचमी का समय पिछले जन्मों की "कर्म ऊर्जाओं" को शांत करने और नाग देवता की कृपा पाने का है, जिन्हें भगवान शिव का प्रिय माना जाता है। गुरु के अनुसार, इससे जीवन में "सुख, शांति और समृद्धि" आ सकती है।

नाग पंचमी पर करने योग्य 3 काम

गुरू ने नाग पंचमी पर नाग देवता और भगवान शिव का आशीर्वाद पाने के इच्छुक भक्तों के लिए तीन काम करने की सलाह दी है:
  • नाग देवता को जल और दूध चढ़ाएं: कांदोई ने कहा कि भक्तों को नाग देवता को जल और दूध चढ़ाना चाहिए।
  • शिवलिंग पर जलाभिषेक करें: उन्होंने भक्तों को शिवलिंग पर जलाभिषेक करने और बेलपत्र चढ़ाने की सलाह दी।
  • नीले फूल चढ़ाएं और नाग स्तुति का पाठ करें: कांदोई ने कहा कि भक्तों को नाग देवता को नीले फूल चढ़ाने चाहिए और नाग स्तुति का पाठ करना चाहिए।
यह त्योहार मनाने वाले भक्तों के लिए, यह दिन प्रार्थना, पूजा और खुशी, शांति और समृद्धि के लिए आशीर्वाद पाने के साथ-साथ नाग पंचमी से जुड़े पारंपरिक रीति-रिवाजों का पालन करने पर केंद्रित होता है।

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