खड़गपुर,  तृणमूल कांग्रेस के नाम और चुनाव चिह्न को फ्रीज किए जाने को लेकर ग्राम पंचायत मंत्री दिलीप घोष ने तीखा कटाक्ष किया है। उनका दावा है कि कालीघाटपंथी तृणमूल और ऋतब्रत खेमे के बीच रस्साकशी के कारण यह स्थिति बनी है। शुक्रवार को खड़गपुर में सुबह की सैर के बाद पत्रकारों से बातचीत करते हुए दिलीप ने कहा, “जोड़ाफूल लूट का प्रतीक है। खींचतान में घासफूल को आयोग ने उखाड़ फेंका है।”

शुक्रवार सुबह 11 बजे तक कालीघाटपंथी तृणमूल और ऋतब्रत खेमे को तीन वैकल्पिक नाम और चुनाव चिह्न चुनने का निर्देश राष्ट्रीय चुनाव आयोग ने दिया है। इसे लेकर राजनीतिक हलकों में अटकलें तेज हैं। इसी बीच ‘घास के ऊपर जोड़ाफूल’ चिह्न को ‘लूट का प्रतीक’ बताते हुए दिलीप ने कटाक्ष किया। उन्होंने कहा, “हमने पहले ही कहा था कि इसे बंद किया जाना चाहिए। यह लूट का प्रतीक है।”

तृणमूल के दोनों खेमों के बीच चुनाव चिह्न को लेकर चल रही रस्साकशी पर भी दिलीप ने व्यंग्य किया। उन्होंने कहा, “खींचतान में अब चुनाव आयोग ने घासफूल ही उखाड़ दिया है।” इसके बाद उन्होंने कालीघाटपंथी तृणमूल को चुनौती देते हुए कहा, “अलग चुनाव चिह्न लेकर लड़कर देखें, तभी पता चलेगा कि किसमें कितना दम है।”

निर्वाचन आयोग के निर्णय को अंतिम बताते हुए दिलीप ने कहा, “आयोग जो निर्णय लेगा, उसे सभी को मानना होगा।” तृणमूल पर हमला जारी रखते हुए उन्होंने कहा, “तृणमूल अब निर्मूल है। आने वाले दिनों में तृणमूल भी चली जाएगी और घास भी चली जाएगी।”

काकली घोष दस्तीदार के बेटे की शिकायत के मामले में तृणमूल के एक प्रवक्ता को पुलिस द्वारा बुलाए जाने पर भी दिलीप ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि जननेताओं और जनप्रतिनिधियों को बातचीत में संयम बरतना चाहिए। दिलीप के अनुसार, “एक सीमा होनी चाहिए। आपस में इस तरह की बातें होने से अच्छा संदेश नहीं जाता। वे खुद ही अपनी छवि खराब कर रहे हैं।”

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