राष्ट्रीय गीत के दौरान कांग्रेस नेताओं की आपसी बातचीत पर भाजपा हमलावर, कांग्रेस ने दी सफाई
नई
दिल्ली, स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर दिल्ली स्थित
कांग्रेस के नए मुख्यालय इंदिरा भवन में आयोजित ध्वजारोहण कार्यक्रम के
दौरान पूरा राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ बजाए जाने के दौरान कांग्रेस के
शीर्ष नेता थोड़े असहज दिखे। कार्यक्रम में कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष
सोनिया गांधी, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष
मल्लिकार्जुन खरगे और पार्टी के कई वरिष्ठ नेता मौजूद थे। ‘वंदे मातरम’ के
पूरे संस्करण के गायन के दौरान कुछ देर बाद कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं के
आपस में बातचीत करते दिखाई देने को लेकर भाजपा महासचिव बीएल संतोष ने सवाल
उठाया। हालांकि कांग्रेस ने इसे लेकर किसी तरह के विवाद से इनकार किया है।
कार्यक्रम
के दौरान ‘वंदे मातरम’ के शुरुआती करीब 55 सेकेंड तक कांग्रेस के वरिष्ठ
नेता गीत के साथ खड़े दिखाई दिए लेकिन इसके बाद भी गीत जारी रहने पर राहुल
गांधी, सोनिया गांधी और खरगे समेत कुछ नेता आपस में बातचीत करते नजर आए।
खरगे और सोनिया गांधी के बीच बातचीत होती दिखाई देती है। इसके बाद दोनों
नेताओं ने एक कांग्रेस कार्यकर्ता को बुलाकर उससे कुछ कहा। सोनिया गांधी इस
दौरान सिर हिलाती हुई नजर आईं।
कार्यक्रम में ‘वंदे मातरम’ करीब
तीन मिनट तक बजा। इसके बाद ध्वजारोहण किया गया और फिर ‘विजयी विश्व तिरंगा
प्यारा’ झंडा गीत गाया गया।
इस घटनाक्रम को लेकर भाजपा के राष्ट्रीय
महासचिव (संगठन) बीएल संतोष ने कांग्रेस मुख्यालय में पूरा ‘वंदे मातरम’
बजने का वीडियो सोशल मीडिया प्लेडफॉर्म एक्स पर साझा किया। उन्होंने लिखा,
‘‘मां-बेटा और राष्ट्रीय अध्यक्ष, लगता है कि ‘वंदे मातरम’ का पूरा संस्करण
बजाए जाने से परेशान हैं। कुछ मानसिकताएं 1947 से पहले से लेकर 1947 के
बाद तक कभी नहीं बदलतीं।’’
भाजपा नेता की टिप्पणी के बाद कांग्रेस
नेताओं से इस मुद्दे पर पत्रकारों ने सवाल किए गए। इस पर कांग्रेस राज्यसभा
सांसद और मीडिया विभाग के अध्यक्ष पवन खेड़ा ने कहा कि ‘वंदे मातरम’
राष्ट्रीय गीत है और कांग्रेस के कार्यक्रमों में इसे गाए जाने की परंपरा
पुरानी है। अक्टूबर 1937 में कलकत्ता में हुए कांग्रेस अधिवेशन के दौरान
महात्मा गांधी समेत कांग्रेस के प्रमुख नेताओं ने तय किया था कि पार्टी के
कार्यक्रमों में ‘वंदे मातरम’ गाया जाएगा।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता
जयराम रमेश ने पत्रकारों के सवाल पर कहा कि कांग्रेस मुख्यालय में पूरा
‘वंदे मातरम’ गाया गया और इसमें विवाद की कोई बात नहीं है। किसी ने गीत को
रोकने का प्रयास नहीं किया। रमेश ने नेताओं के कथित असहज होने को लेकर कहा
कि लंबे समय से कांग्रेस अध्यक्ष खरगे खड़े थे और सोनिया गांधी कह रही थीं
कि उनके लिए कुर्सी लाकर रख दी जाए। यही वजह थी कि दोनों के बीच बातचीत
हुई। जब पत्रकारों ने केरल में ‘वंदे मातरम’ नहीं गाए जाने को लेकर सवाल
किया तो रमेश ने इस पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया।
जयराम रमेश
ने ‘वंदे मातरम’ के इतिहास पर बताया कि 28 अक्टूबर 1937 को कलकत्ता में
कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक में ‘वंदे मातरम’ को लेकर चर्चा हुई थी।
रवींद्रनाथ टैगोर ने सलाह दी थी कि कांग्रेस की बैठकों में इसके केवल
शुरुआती अंश गाए जाएं।
उल्लेखनीय है कि ‘वंदे मातरम’ को लेकर
कांग्रेस की ऐतिहासिक नीति का संबंध 1937 में हुई चर्चाओं से जोड़ा जाता
है। उस समय कांग्रेस ने रवींद्रनाथ टैगोर से गीत को लेकर सलाह ली थी।
उपलब्ध विवरणों के अनुसार, टैगोर ने सुझाव दिया था कि इसके शुरुआती दो पदों
को ही राष्ट्रीय गीत के रूप में इस्तेमाल किया जाए क्योंकि उनमें मातृभूमि
की सुंदरता का वर्णन है, जबकि बाद के पदों में देवी दुर्गा का आह्वान होने
के कारण कुछ समुदायों को आपत्ति हो सकती है। इसके बाद कांग्रेस के
कार्यक्रमों में ‘वंदे मातरम’ के शुरुआती दो पदों को गाने की परंपरा रही।















