लोकसेवकों के चयन में ईमानदारी और सत्यनिष्ठा को मिले सर्वोच्च प्राथमिकता: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु
रांची (RANCHI): राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु का कहना है कि लोक सेवा आयोगों को केवल अवसर की समानता के संवैधानिक आदर्श तक सीमित नहीं रहना चाहिए बल्कि परिणामों की समानता के लक्ष्य को भी हासिल करने का प्रयास करना चाहिए. लोक सेवा आयोग समानता और न्याय को बढ़ावा देने वाले परिवर्तन के वाहक हैं और उनकी भूमिका देश की शासन व्यवस्था में अत्यंत महत्वपूर्ण है. राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु शुक्रवार को हैदराबाद में लोक सेवा आयोगों के अध्यक्षों के राष्ट्रीय सम्मेलन के उद्घाटन करते हुए यह व्यक्त किए. इस सम्मेलन का आयोजन तेलंगाना लोक सेवा आयोग ने किया था.
सार्वजनिक रोजगार में अवसर की समानता
राष्ट्रपति ने इस अवसर पर कहा कि संविधान निर्माताओं ने सेवाओं और लोक सेवा आयोगों के लिए संविधान में एक पूरा भाग समर्पित किया है, जो इन संस्थाओं के महत्व को रेखांकित करता है. सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय के साथ-साथ सार्वजनिक रोजगार में अवसर की समानता से जुड़े संवैधानिक प्रावधान लोक सेवा आयोगों के कामकाज की दिशा तय करते हैं. उन्होंने कहा कि लोक सेवा आयोगों द्वारा चयनित स्थायी कार्यपालिका शासन व्यवस्था को निष्पक्षता, निरंतरता और स्थिरता प्रदान करती है. ऐसे में सिविल सेवकों की ईमानदारी, सत्यनिष्ठा, संवेदनशीलता और दक्षता अत्यंत आवश्यक है. उम्मीदवारों की भर्ती में ईमानदारी और सत्यनिष्ठा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए, क्योंकि कौशल की कमी को प्रशिक्षण से दूर किया जा सकता है, लेकिन सत्यनिष्ठा की कमी गंभीर चुनौतियां पैदा कर सकती है.
विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में अग्रसर है:राष्ट्रपति
राष्ट्रपति ने कहा कि सिविल सेवा में आने वाले युवाओं में हाशिए पर मौजूद और कमजोर वर्गों के लिए काम करने की भावना होनी चाहिए. उन्होंने महिलाओं की जरूरतों और आकांक्षाओं के प्रति विशेष संवेदनशीलता की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि लैंगिक संवेदनशीलता को लोक सेवा आयोगों को उच्च प्राथमिकता देनी चाहिए. उन्होंने कहा कि भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था है और निकट भविष्य में विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में अग्रसर है. 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने के लिए प्रभावी और सक्षम शासन प्रणाली जरूरी है. राष्ट्रपति ने विश्वास जताया कि लोक सेवा आयोग भविष्य के लिए तैयार, मूल्यनिष्ठ और सक्षम सिविल सेवकों के निर्माण में अपनी भूमिका निभाते रहेंगे.















