रांची (RANCHI): भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने तमिलनाडु में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव को देखते हुए संगठनात्मक तैयारियों को तेज कर दिया है. पार्टी ने केंद्रीय मंत्री पियूष गोयल को तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के लिए, जबकि बैजयंत पांडा को असम विधानसभा का चुनाव प्रभारी बनाया है.


केंद्रीय मंत्रियों की तैनाती बनी रणनीति का अहम हिस्सा

भाजपा के राष्ट्रीय सचिव अरुण सिंह ने सोमवार को जानकारी दी कि केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल और मुरलीधर मोहोल को तमिलनाडु का संयुक्त प्रभारी बनाया गया है. चुनाव से पहले तीन केंद्रीय मंत्रियों की तैनाती को भाजपा की रणनीति का अहम हिस्सा माना जा रहा है.

गोयल ने उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में प्रभारी की भूमिका निभाई

पियूष गोयल को भाजपा में एक सक्षम और समस्याओं का समाधान निकालने वाले नेता के रूप में देखा जाता है. वे 2019 के लोकसभा चुनाव के दौरान भी तमिलनाडु के चुनाव प्रभारी रह चुके हैं. इसके अलावा, उन्होंने उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में प्रभारी की भूमिका निभाई थी, जहां भाजपा को बड़ी सफलता मिली थी. इसी अनुभव के आधार पर उन्हें एक बार फिर तमिलनाडु की जिम्मेदारी सौंपी गई है. 
इसी तरह असम में बैजयंत पांडा की अनुभवी नेतृत्व क्षमता से भाजपा मौजूदा सत्ता को बरकरार रखने की रणनीति पर काम करेगी. पांडा भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष है. सुनील कुमार शर्मा किश्तवाड़ से भाजपा के विधायक और जम्मू-कश्मीर विधानसभा में विपक्ष के नेता हैं, और दर्शना बेन जरदोश पूर्व केंद्रीय मंत्री हैं. सुनील कुमार शर्मा और दर्शना बेन जरदोश सह-प्रभारी के रूप में सहयोग देंगे.

भाजपा गठबंधन को मजबूत करने की जिम्मेदारी

पार्टी सूत्रों के अनुसार, पीयूष गोयल की अगुवाई वाली इस समिति को तमिलनाडु में भाजपा गठबंधन को मजबूत करने की जिम्मेदारी दी गई है. माना जा रहा है कि समिति अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (एआईएडीएमके) से जुड़े असंतुष्ट नेताओं, ओ. पन्नीरसेल्वम, डी.टी.वी. दिनाकरन सहित अन्य को फिर से राष्ट्रीय लोकतांत्रिक गठबंधन (राजग) में लाने के प्रयास करेगी.

राजनीतिक दल सक्रिय 

दरअसल, तमिलनाडु में विधानसभा चुनाव नजदीक आने के साथ ही सभी राजनीतिक दल सक्रिय हो गए हैं. भाजपा भी पिछले कुछ महीनों से राज्य में संगठन विस्तार और गठबंधन को मजबूत करने पर फोकस कर रही है. बता दें कि पिछले विधानसभा चुनाव में एआईएडीएमके गठबंधन को 20 सीटें मिली थीं, जिनमें से भाजपा को केवल 4 सीटों पर जीत मिली थी. इस बार भाजपा अधिक सीटों पर चुनाव लड़ने की योजना बना रही है. गठबंधन वार्ता, सीट बंटवारा और चुनावी रणनीति तय करने की जिम्मेदारी इसी समिति को सौंपी गई है. जल्द ही एआईएडीएमके से बातचीत शुरू होने की संभावना जताई जा रही है.