भारत का विकसित राष्ट्र बनने का सफर समावेशी, परंपराओं से जुड़ा हुआ लेकिन भविष्योन्मुखी होना चाहिए: मनोज सिन्हा
दिल्ली/जम्मू, उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने आज नई दिल्ली में आईआईटी
पूर्व छात्र परिषद द्वारा आयोजित विश्व ज्ञान मंच को संबोधित किया और
विभिन्न क्षेत्रों में पलब्धि हासिल करने वालों को सम्मानित किया। अपने
मुख्य भाषण में उपराज्यपाल ने विकसित भारत और भारत के सामूहिक भविष्य के
विषय पर विचार-विमर्श करने के लिए प्रतिष्ठित हस्तियों को एक साथ लाने के
प्रयासों के लिए परिषद को बधाई दी।
उपराज्यपाल ने प्रगति में एकता
के महत्व पर जोर दिया और रेखांकित किया कि एक विकसित राष्ट्र बनने की दिशा
में भारत की यात्रा समावेशी परंपराओं में निहित होते हुए भी भविष्योन्मुखी
और तकनीकी शक्ति और मानवीय संवेदनशीलता के बीच संतुलित होनी चाहिए।
उन्होंने
कहा कि मेरा मानना है कि जब विभिन्न क्षेत्रों के लोगों के समूह में कुछ
हासिल करने की गहरी इच्छा होती है तो उस आकांक्षा का दर्द और तीव्रता अंततः
उसे प्राप्त करने का साधन बन सकती है। जिस प्रकार मिट्टी में दबा बीज
अंकुरित होने के लिए बेचैन रहता है उसी प्रकार यदि किसी राष्ट्र की ऊर्जा
अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए तीव्र रूप से तत्पर हो जाए तो कुछ भी
असंभव नहीं है।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व
में भारत की आकांक्षाओं पर विचार करते हुए उपराज्यपाल ने कहा कि विकसित
भारत का बीज पहले ही अंकुरित हो चुका है और पिछले 12 वर्षों में ऐतिहासिक
उपलब्धियां हासिल की गई हैं।
अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों द्वारा 2047
से पहले ही भारत को विश्व की तीन सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में से एक के
रूप में उभरने की भविष्यवाणी को देखते हुए राष्ट्र को अपनी सभ्यता,
आध्यात्मिकता और सांस्कृतिक ढांचे के स्वरूप को भी परिभाषित करना होगा।
आईआईटी
के पूर्व छात्रों और विभिन्न क्षेत्रों के प्रख्यात व्यक्तियों को यह याद
रखना चाहिए कि इतिहास सभ्यताओं को उनकी अर्थव्यवस्थाओं और उन
अर्थव्यवस्थाओं द्वारा उत्पन्न संसाधनों और समृद्धि के उपयोग के लिए याद
रखता है।
उपराज्यपाल ने पांच प्रमुख चुनौतियों की पहचान की जिनका
समाधान प्रख्यात हस्तियों, उद्योगों, व्यापारिक नेताओं और इंजीनियरों को
मिलकर करना होगा ताकि विकसित भारत के दृष्टिकोण को साकार किया जा सके।
उन्होंने
कहा कि भारत की विशाल युवा आबादी को उभरती प्रौद्योगिकियों में विशेषज्ञता
से लैस कुशल कार्यबल में परिवर्तित करना हमारे लिए महत्वपूर्ण है साथ ही
प्रगति और पर्यावरणीय जिम्मेदारी के बीच संतुलन बनाकर सतत विकास सुनिश्चित
करना भी आवश्यक है। हमें नागरिकों की जरूरतों के प्रति संवेदनशील,
पारदर्शी, जवाबदेह और कुशल संस्थानों का निर्माण करके संस्थानों को मजबूत
करने की भी आवश्यकता है।
हमें उन्नत शहरों और पिछड़े क्षेत्रों के
बीच अंतर को पाटकर संतुलित क्षेत्रीय विकास सुनिश्चित करने पर ध्यान
केंद्रित करना चाहिए ताकि समान विकास हो सके। हमें भविष्य का निर्माण करना
चाहिए न कि उसे खरीदना चाहिए। इसके लिए हमें न केवल उपभोक्ता बनना चाहिए
बल्कि प्रौद्योगिकियों, नवाचारों और विचारों का वैश्विक निर्माता भी बनना
चाहिए। हमें यह संकल्प लेना होगा कि हम केवल कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उपयोग
नहीं करेंगे बल्कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता के भविष्य में योगदान भी देंगे।
हमें यह संकल्प लेना होगा कि हम नवाचार का आयात नहीं करेंगे बल्कि नवाचार
का निर्यात करेंगे।
उपराज्यपाल ने जम्मू-कश्मीर में हुए परिवर्तन
पर भी प्रकाश डाला और क्षेत्र की युवा शक्ति, प्राकृतिक संसाधनों, पर्यटन,
बागवानी, हस्तशिल्प और जलविद्युत में अपार संभावनाओं का उल्लेख किया।
उन्होंने उद्योग जगत के नेताओं से केंद्र शासित प्रदेश में सक्रिय रूप से
निवेश करने का आग्रह किया ताकि यह भारत के विकास में एक महत्वपूर्ण
योगदानकर्ता बन सके।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने जम्मू
कश्मीर के युवाओं में आत्मविश्वास जगाया है और उनके लिए नए अवसर खोले हैं।
अब उद्योग जगत की यह सामूहिक जिम्मेदारी है कि वह जम्मू कश्मीर को रचनात्मक
कार्यों का केंद्र बनाए। हमें इसकी जलविद्युत क्षमता को पहचानना होगा।
इसके बागवानी, पर्यटन और हस्तशिल्प को वैश्विक बाजारों से जोड़ना होगा।
जम्मू कश्मीर के हर क्षेत्र में उद्योग जगत के नेताओं का हस्तक्षेप भारत के
भविष्य में एक निवेश होगा।














