आईवीएफ क्लीनिकों पर सख्ती की तैयारी, एनसीडब्ल्यू ने बनाई विशेषज्ञ समिति
नई दिल्ली, देश में तेजी से बढ़ रहे इन विट्रो फर्टिलाइजेशन (आईवीएफ) और अन्य सहायक प्रजनन तकनीकों (एआरटी) से जुड़े मामलों में बढ़ती अनियमितताओं को देखते हुए राष्ट्रीय महिला आयोग (एनसीडब्ल्यू) ने 11 सदस्यीय उच्चस्तरीय विशेषज्ञ समिति का गठन किया है।
समिति की अध्यक्षता दिल्ली उच्च न्यायालय की पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति आशा मेनन करेंगी। इसके अलावा सदस्यों के रूप में सेवानिवृत्त आईपीएस अधिकारी सुंदरी नंदा, डॉ. अर्चना मजूमदार, डॉ. शिप्रा धर, अधिवक्ता महालक्ष्मी पावनी, फ़ोरेंसिक मेडिसिन विभाग, सफ़दरजंग अस्पताल के प्रोफेसर डॉ. सर्वेश टंडन, एम्स की स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. नीता सिंह, सामाजिक कार्यकर्ता डॉ. नयना सहस्रबुद्धे, फ़ेडरेशन ऑफ़ ऑब्सटेट्रिक एंड गायनेकोलॉजिकल सोसाइटीज़ ऑफ़ इंडिया के डॉ. रजनीकांत कॉन्ट्रैक्टर, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के प्रतिनिधि और राष्ट्रीय महिला आयोग के सदस्य संयोजक कंचन खट्टर शामिल हैं।
राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष विजया रहाटकर ने गुरुवार को एक बयान में कहा कि देश में सभी एआरटी क्लीनिकों और गामीट बैंकों का राष्ट्रीय एआरटी एवं सरोगेसी रजिस्ट्री में पंजीकरण अनिवार्य है, लेकिन केवल पंजीकरण से अनियमितताओं पर पूरी तरह रोक नहीं लग पाई है। कई मामलों में नियमों के उल्लंघन और अनैतिक तरीकों से इलाज किए जाने की शिकायतें सामने आई हैं।
आयोग ने चिंता जताई कि भारत में बढ़ रहे मेडिकल टूरिज्म के कारण कुछ लोग यहां मौजूद कानूनी प्रावधानों का गलत फायदा उठाने की कोशिश कर सकते हैं। खास तौर पर लिंग चयन जैसे प्रतिबंधित कार्यों को लेकर सतर्क रहने की जरूरत है। इसके अलावा अलग-अलग राज्यों में आईवीएफ और एआरटी उपचार के तरीके और मानक एक जैसे नहीं हैं। इससे कई महिलाओं को अनावश्यक जांच और इलाज, इलाज की गुणवत्ता में अंतर तथा आर्थिक शोषण जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।
विशेषज्ञ समिति सहायक प्रजनन प्रौद्योगिकी (विनियमन) अधिनियम, 2021, सरोगेसी (विनियमन) अधिनियम, 2021 और वर्ष 2026 में अधिसूचित संशोधित नियमों के प्रभावी क्रियान्वयन की समीक्षा करेगी। समिति यह भी जांचेगी कि मरीजों की सहमति, उनकी निजी जानकारी की सुरक्षा और जैविक रिकॉर्ड से जुड़े मौजूदा नियम कितने प्रभावी हैं। यदि कहीं कानूनी या प्रशासनिक कमियां मिलती हैं, तो उन्हें दूर करने के लिए सुझाव दिए जाएंगे ताकि किसी भी तरह के शोषण, धोखाधड़ी या गलत प्रथाओं पर रोक लगाई जा सके।
समिति आईवीएफ और एआरटी केंद्रों के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) और बेहतर कार्यप्रणालियां भी तैयार करेगी। इसका उद्देश्य पूरे देश में इलाज के लिए एक समान मानक लागू करना, मरीजों को स्पष्ट जानकारी देना, पारदर्शिता बढ़ाना और इलाज की गुणवत्ता सुनिश्चित करना है।
समिति की सिफारिशों के आधार पर भविष्य में सरकार कानूनी, नीतिगत और प्रशासनिक स्तर पर बदलाव कर सकती है। इससे आईवीएफ और एआरटी क्षेत्र की निगरानी मजबूत होगी और महिलाओं को सुरक्षित, भरोसेमंद तथा नैतिक चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।















