घूसखोरी के दलदल में धंसे राज्य सेवा के 150 अफसर, 85 रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार
रांची: झारखंड में भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई लगातार जारी है, लेकिन इसके बावजूद सरकारी तंत्र में रिश्वतखोरी की समस्या पूरी तरह खत्म नहीं हो सकी है। राज्य गठन के बाद से अब तक राज्य सेवा के लगभग 150 अधिकारी और कर्मचारी भ्रष्टाचार के मामलों में एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) के रडार पर आ चुके हैं। इनमें से 85 अधिकारियों और कर्मचारियों को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया गया, जबकि अन्य मामलों में आय से अधिक संपत्ति, पद के दुरुपयोग और भ्रष्टाचार से जुड़े आरोपों की जांच की गई। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, हर वर्ष औसतन 6 से 10 सरकारी अधिकारी या कर्मचारी ACB की कार्रवाई के दायरे में आते हैं। कई मामलों में शिकायत मिलने के बाद ACB ने योजनाबद्ध तरीके से ट्रैप बिछाकर आरोपियों को रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया। इसके अलावा कुछ मामलों में लंबी जांच के बाद भ्रष्टाचार के आरोपों में प्राथमिकी दर्ज की गई। ACB की कार्रवाई में अब तक कई महत्वपूर्ण विभागों के अधिकारी और कर्मचारी शामिल रहे हैं। इनमें प्रमुख रूप से— इन विभागों में कार्यरत अधिकारियों पर रिश्वत मांगने, सरकारी योजनाओं में अनियमितता, पद के दुरुपयोग और आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने जैसे आरोप लगे हैं। ACB को जब भी किसी सरकारी अधिकारी द्वारा रिश्वत मांगने की शिकायत मिलती है, तो शिकायत का सत्यापन करने के बाद ट्रैप टीम गठित की जाती है। शिकायत सही पाए जाने पर विशेष अभियान चलाकर आरोपी को रिश्वत की रकम लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया जाता है। ऐसे मामलों में रिश्वत की राशि भी बरामद की जाती है और वैज्ञानिक साक्ष्य जुटाए जाते हैं। राज्य सरकार और ACB का कहना है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई जा रही है। शिकायतों के त्वरित निस्तारण, पारदर्शी जांच और दोषी पाए जाने पर कानूनी कार्रवाई पर विशेष जोर दिया जा रहा है। लोगों से भी अपील की गई है कि यदि कोई सरकारी अधिकारी या कर्मचारी रिश्वत की मांग करता है, तो उसकी सूचना तुरंत ACB को दें। भ्रष्टाचार पर प्रभावी अंकुश लगाने के लिए ACB ने नागरिकों से आगे आकर शिकायत दर्ज कराने की अपील की है। अधिकारियों का मानना है कि जनता के सहयोग और समय पर मिलने वाली सूचनाओं से भ्रष्टाचार के मामलों में तेजी से कार्रवाई संभव हो पाती है। झारखंड में पिछले वर्षों के दौरान भ्रष्टाचार के विरुद्ध लगातार कार्रवाई हुई है, लेकिन आंकड़े यह भी संकेत देते हैं कि सरकारी व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही को और मजबूत करने की आवश्यकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि तकनीक आधारित सेवाओं, ऑनलाइन प्रक्रियाओं और कड़ी निगरानी से रिश्वतखोरी पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सकता है। वहीं, ACB की लगातार कार्रवाई भ्रष्टाचार में लिप्त अधिकारियों के लिए स्पष्ट संदेश है कि रिश्वतखोरी के मामलों में कानूनी कार्रवाई से बच पाना आसान नहीं होगा।हर साल औसतन 6 से 10 अफसर ACB के निशाने पर
किन विभागों के अधिकारी आए जांच के दायरे में?
ट्रैप ऑपरेशन से रंगे हाथ गिरफ्तारी
भ्रष्टाचार पर सख्ती जारी
जनता से सहयोग की अपील
निष्कर्ष















