रांची (RANCHI): झारखंड में जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा को लेकर जारी विवाद भी अब झारखंड उच्च न्यायालय पहुंच गया है। सरकार के परीक्षा रद्द करने के आदेश के खिलाफ नवनियुक्त चयनित पदाधिकारियों ने उच्च न्यायालय में याचिका दायर की है। चयनित अभ्यर्थियों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता इंद्रजीत सिन्हा और अधिवक्ता अमृतांश वत्स ने याचिका दाखिल की है। याचिका दाखिल होने के बाद मामले की त्वरित सुनवाई की मांग की गई है। अधिवक्ताओं की टीम याचिका को जल्द से जल्द मेंशन कराने में जुटी है, ताकि मामले पर अविलंब सुनवाई शुरू हो सके।


सड़क पर मानव शृंखला बना कर कियै गया था विरोध प्रदर्शन

नवनियुक्त अधिकारियों का कहना है कि बिना किसी कानूनी आधार और उनका पक्ष सुने पूरी नियुक्ति प्रक्रिया पर सवाल उठाना और उसे निरस्त करना अनुचित एवं असंवैधानिक है। याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि उन्होंने कड़ी मेहनत और योग्यता के आधार पर नियुक्ति हासिल की है और विभिन्न सरकारी विभागों में सेवाएं दे रहे हैं। ऐसे में प्रशासनिक निर्णय के आधार पर उनके भविष्य और आजीविका को खतरे में नहीं डाला जा सकता। सड़क पर मानव शृंखला बनाने और विरोध प्रदर्शन करने के बाद अब चयनित अभ्यर्थियों ने अपनी सेवा सुरक्षा और अधिकारों की रक्षा के लिए न्यायिक प्रक्रिया का रुख किया है।

अन्य नियुक्तियों को रद्द करने के आदेश पर भी हाई कोर्ट लगा चुका है रोक

बता दें कि झारखंड उच्च न्यायालय ने झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) की 11वीं से 13वीं तक की परीक्षा और राज्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी तथा बाल विकास परियोजना पदाधिकारी की नियुक्तियां रद्द करने के राज्य सरकार के आदेश पर भी रोक लगाई है। न्यायमूर्ति दीपक रौशन ने गुरुवार को सौरभ सिंह बनाम राज्य सरकार मामले की सुनवाई के दौरान 18 अगस्त 2026 को जारी उस आदेश पर रोक लगा दी, जिसके तहत विज्ञापन संख्या 18/23 से नियुक्त राज्य खाद्य सुरक्षा अधिकारियों की नियुक्ति रद्द की गई थी। अदालत ने इस अधिसूचना से प्रभावित अन्य अभ्यर्थियों को भी याचिका के निपटारे तक अपनी सेवाएं जारी रखने की अनुमति दी है।

अनुसंधान विभाग की जांच में सामने आए तथ्यों की जानकारी देने का निर्देश

अदालत ने 15 सितंबर को होने वाली अगली सुनवाई में अपराध अनुसंधान विभाग की जांच में सामने आए तथ्यों की जानकारी देने का निर्देश दिया है। कार्मिक विभाग की अधिसूचना से विज्ञापन संख्या 18/23 से नियुक्त राज्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी, विज्ञापन संख्या 21/2024 से नियुक्त राज्य सेवा के अधिकारी और विज्ञापन संख्या 21/23 से नियुक्त बाल विकास परियोजना पदाधिकारी प्रभावित हुए हैं।


अदालत ने अपने आदेश के दसवें बिंदु में राज्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी की नियुक्ति रद्द करने संबंधी अधिसूचना पर अगले आदेश तक रोक लगाई है। वहीं, आदेश के 11वें बिंदु में वरिष्ठ अतिरिक्त महाधिवक्ता को संबंधित विभाग को यह सूचित करने का निर्देश दिया गया कि याचिकाकर्ताओं और इसी स्थिति में अधिसूचना से प्रभावित अन्य लोगों को याचिका के निपटारे तक काम करने दिया जाए।

अदालत ने याचिकाकर्ताओं को शपथपत्र देने का दिया निर्देश 

अदालत ने याचिकाकर्ताओं को शपथपत्र देने का निर्देश भी दिया है कि आपराधिक मामले में विचारण न्यायालय का फैसला उन पर लागू होगा और सरकार कानून के अनुसार कार्रवाई करने के लिए स्वतंत्र होगी। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि सभी निर्धारित प्रक्रियाओं का पालन करते हुए उनकी नियुक्ति हुई थी और वे काम कर रहे थे। सरकार ने उनका पक्ष सुने बिना नियुक्तियां रद्द कर दीं, जो प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ है। वहीं, सरकार की ओर से कहा गया कि नियुक्तियों में बड़े पैमाने पर अनियमितता हुई है और इसकी गहन जांच चल रही है। सरकार ने बताया कि अपराध अनुसंधान विभाग इस मामले में कई लोगों को गिरफ्तार कर चुका है।