पूर्व छात्रा ने बालिका शिक्षा के लिए एक बच्ची की शिक्षा का उठाया भार
कोडरमा, कहते हैं कि सफलता तभी सार्थक होती है, जब उसके साथ संवेदनाएं और समाज के प्रति जिम्मेदारी भी जुड़ी हो।
इस सोच को साकार कर दिखाया है कैलाश राय सरस्वती विद्या मंदिर, झुमरीतिलैया की पूर्व छात्रा अर्चना ने। वर्ष 2005 में विद्यालय से माध्यमिक शिक्षा उत्तीर्ण करने वाली अर्चना आज गुजरात में वस्त्र उद्योग के क्षेत्र में एक सफल उद्यमी के रूप में अपनी पहचान बना चुकी हैं। व्यापारिक सफलता के शिखर पर पहुंचने के बावजूद उनका अपने विद्यालय, शिक्षकों और मातृभूमि से जुड़ाव आज भी उतना ही गहरा और आत्मीय बना हुआ है।
अर्चना का यह प्रेरणादायी योगदान इन दिनों पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है।
उन्होंने आर्थिक अभाव के कारण पढ़ाई छोड़ने को विवश एक बालिका की संपूर्ण शिक्षा का दायित्व अपने ऊपर लेते हुए समाज के सामने संवेदनशीलता और मानवता की मिसाल पेश की है। इतना ही नहीं, विद्यार्थियों को तकनीकी शिक्षा से जोड़ने के उद्देश्य से उन्होंने विद्यालय को एक लैपटॉप भी भेंट किया है। उनके इस प्रयास से विद्यालय परिवार के साथ-साथ अभिभावकों और नगरवासियों में भी खुशी का माहौल है।
वहीं विद्यालय के प्राचार्य आनंद मोहन ने कहा कि अर्चना विद्यालय के जीवन से ही परिश्रमी, अनुशासित और लक्ष्य के प्रति समर्पित छात्रा रही है। उन्होंने कहा कि आज उनकी मेहनत और सकारात्मक सोच एक विशाल वटवृक्ष का रूप ले चुकी है। उन्होंने कहा कि अर्चना जैसी पूर्व छात्राएं विद्यालय की वास्तविक पूंजी होती हैं, जिनकी उपलब्धियां और सामाजिक योगदान नई पीढ़ी को आगे बढ़ने की प्रेरणा देते हैं।
प्राचार्य ने बताया कि बालिका शिक्षा के प्रति अर्चना की सोच अत्यंत संवेदनशील और प्रेरणादायी है। वे हमेशा यह मानती रही हैं कि यदि बेटियां शिक्षित होंगी तो समाज और राष्ट्र दोनों मजबूत होंगे।















