घरेलू शेयर बाजार में गिरावट जारी, क्या अभी निवेश करने का है सही समय
एक सप्ताह में पांच प्रतिशत तक टूटे शेयर बाजार के प्रमुख सूचकांक
नई
दिल्ली, पश्चिम एशिया में जारी तनाव की वजह से पूरी
दुनिया की तरह भारतीय शेयर बाजार भी लगातार दबाव में है। पिछले एक सप्ताह
के दौरान शेयर बाजार में लगभग पांच प्रतिशत तक गिरावट आ चुकी है। पिछले
लगातार तीन कारोबारी दिन से शेयर बाजार जबरदस्त गिरावट का शिकार हो रहा है।
आज ही सेंसेक्स 1,122.66 अंक की कमजोरी के साथ बंद हुआ। इसी तरह निफ्टी ने
भी 385.20 अंक टूट कर आज के कारोबार का अंत किया।
पिछले तीन
कारोबारी दिन के दौरान सेंसेक्स में 3,132.42 अंक की गिरावट आ चुकी है। इसी
तरह निफ्टी पिछले तीन दिन के कारोबार में 1,016.05 अंक टूट चुका है। ऐसे
में यह सवाल उठने लगा है कि इतनी बड़ी गिरावट के बाद क्या निवेशकों के लिए
शेयर बाजार में पैसा लगाने का सही समय आ गया है? यह सवाल इसलिए भी उठ रहा
है, क्योंकि पिछले एक सप्ताह के दौरान शेयर बाजार में छोटे-बड़े यानी
लार्जकैप से लेकर स्मॉलकैप तक हर सेगमेंट के शेयरों में जम कर बिकवाली हुई
है।
भारतीय शेयर बाजार पहले से ही आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) की
वजह से उपजी चिंताओं के कारण दबाव में था। आईटी सेक्टर के शेयरों में हो
रही ताबड़तोड़ बिकवाली ने बाजार पर दबाव बढ़ा दिया था। ऐसी स्थिति में
अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर हमला करने और इसके बाद ईरान के जवाबी
हमले ने शेयर बाजार पर दबाव और भी बढ़ा दिया है। इस दबाव की वजह से पिछले
एक सप्ताह में ही घरेलू शेयर बाजार के प्रमुख सूचकांक लगभग पांच प्रतिशत तक
गिर चुके हैं। पश्चिम एशिया में शुरू हुई लड़ाई का आज पांचवा दिन है। अभी
इस लड़ाई में कोई भी पक्ष झुकता हुआ नजर नहीं आ रहा है। यानी ये लड़ाई लंबी
खिंच सकती है।
पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने के बाद लार्सन एंड
टूब्रो, टाटा स्टील, बैंक ऑफ बड़ौदा, गैस अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (गेल),
सिमेंस, जेएसडब्ल्यू स्टील, अल्ट्राटेक सीमेंट, इंटरग्लोब एवियशन,
हिंदुस्तान जिंक और श्रीराम फाइनेंस के शेयर टॉप 10 लूजर्स की सूची में
शामिल हुए हैं। इनमें टाटा स्टील 6.78 प्रतिशत तक टूट चुका है। इसी तरह
लार्सन एंड टूब्रो 6.26 प्रतिशत की गिरावट का शिकार हो गया है। वहीं गैस
अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड 5.69 प्रतिशत और बैंक ऑफ बड़ौदा के शेयर 5.14
प्रतिशत तक टूट चुके हैं। गिरावट का शिकार होने वाली टॉप 10 में शामिल सभी
कंपनियां ऐसी कंपनियां हैं, जिनके फंडामेंटल्स काफी स्ट्रॉन्ग है और इनमें
से कई मार्केट लीडर के रूप में पहचानी जाती हैं।
इस गिरावट के बाद
निवेशकों का एक बड़ा वर्ग बाजार में नए निवेश की संभावनाओं को तलाश में जुट
गया है। हालांकि मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है कि फिलहाल बाजार के
सेंटीमेंट काफी कमजोर हैं। पश्चिम एशिया में जारी सैन्य तनाव का असर दुनिया
के दूसरे शेयर बाजारों की तरह ही भारतीय शेयर बाजार पर भी साफ-साफ नजर आ
रहा है। फिलहाल इस युद्ध के थमने के कोई आसार नजर नहीं आ रहे हैं। इसलिए
आने वाले दिनों में भी शेयर बाजार पर दबाव बने रहने की बात कही जा सकती है।
शेयर बाजार की स्थिति में सुधार की संभावना तभी बनेगी, जब पश्चिम एशिया
में जारी तनाव खत्म होगा या उसमें कमी आएगी।
धामी सिक्योरिटीज के
वाइस प्रेसिडेंट प्रशांत धामी का कहना है कि घरेलू शेयर बाजार में गिरावट
आने वाले दिनों में भी जारी रहेगी या नहीं, ये पूरी तरह से पश्चिम एशिया
में चल रहे सैन्य घटनाक्रम पर निर्भर करेगा। इसलिए अगर निवेशक सस्ते भाव
में शेयर खरीद कर दांव लगाना चाहते हैं, तो उन्हें सिर्फ क्वालिटी स्टॉक
में निवेश करने के बारे में ही सोचना चाहिए। ये निवेश भी उन्हीं निवेशकों
को करना चाहिए, जो हाई रिस्क लेने की क्षमता रखते हैं। इसकी एक बड़ी वजह ये
भी है कि बाजार की आगे की दिशा और दशा के बारे में अभी कुछ भी नहीं कहा जा
सकता है।
हालांकि प्रशांत धामी का ये भी कहना है कि निवेशकों को
अपना एसआईपी जारी रखना चाहिए, क्योंकि एसआईपी के जरिए निवेशक फिलहाल कम भाव
पर अधिक यूनिट्स प्राप्त कर सकते हैं। पश्चिम एशिया में लड़ाई खत्म होने
पर जब बाजार में तेजी आएगी, तब एसआईपी के जरिए अपना निवेश जारी रखने वाले
निवेशकों को अच्छा फायदा हो सकेगा। इसलिए एसआईपी जारी रखने वाले निवेशकों
को आने वाले दिनों में अच्छा फायदा हो सकता है। हालांकि निवेश के संबंध में
कोई भी फैसला करने के पहले निवेशकों को अपने इन्वेस्टमेंट एडवाइजर की सलाह
जरूर लेनी चाहिए।















