पटना (PATNA): मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने आज बिहार विधान परिषद की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया. नीतीश कुमार पहली बार 2006 में विधान परिषद के सदस्य बने थे. उसके बाद 2012, 2018 और 2024 में लगातार चौथी बार उन्होंने विधान परिषद की सदस्यता ली. विधान परिषद की सदस्यता छह वर्ष के लिए होती है. उनके टर्म इस प्रकार रहे- 2006-2012, 2012-2018, 2018-2024 और 2024 से अब तक.


नीतीश कुमार ने 
कभी  नहीं लड़ा विधानसभा चुनाव 

साल 2005 के नवंबर में पहली बार बिहार की सत्ता संभालने के बाद नीतीश कुमार ने हमेशा विधान परिषद के रास्ते मुख्यमंत्री पद की शपथ ली. उन्होंने कभी विधानसभा चुनाव नहीं लड़ा. 1985 में हरनौत से विधायक चुने जाने के बाद वे लोकसभा सदस्य भी रहे और केंद्र में मंत्री पद भी संभाला. लेकिन बिहार में मुख्यमंत्री बनने के बाद उन्होंने विधानसभा की बजाय विधान परिषद की सदस्यता को प्राथमिकता दी.

चारों सदनों के सदस्य बन जाएंगे नीतीश 

राज्यसभा की सदस्यता ग्रहण करने के बाद नीतीश कुमार अब चारों सदनों के सदस्य बन जाएंगे. उन्होंने पहले विधानसभा (विधायक), फिर लोकसभा (सांसद), उसके बाद विधान परिषद और अब राज्यसभा की सदस्यता हासिल कर ली है. यह उनके राजनीतिक करियर में एक अनोखा उपलब्धि मानी जा रही है.

नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री पद भी छोड़ना होगा!

विधान परिषद की सदस्यता छोड़ने के बाद नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री पद भी छोड़ना होगा. हालांकि संवैधानिक प्रावधान के अनुसार वे छह महीने तक बिना विधान परिषद या विधानसभा की सदस्यता के मुख्यमंत्री पद पर बने रह सकते हैं. इस दौरान उन्हें या तो विधानसभा चुनाव लड़कर सदस्यता हासिल करनी होगी या फिर कोई अन्य रास्ता अपनाना होगा.

साल 1985 में हुई थी राजनीतिक सफर की शुरूआत

साल 1985 से शुरू हुए नीतीश कुमार के राजनीतिक सफर में राज्यसभा जाना एक नया अध्याय जुड़ गया है. 10 अप्रैल को राज्यसभा की सदस्यता लेने के साथ ही उनके राजनीतिक जीवन का यह नया चरण शुरू होगा.