सुपौल,  जिले के राघोपुर प्रखंड क्षेत्र में शुक्रवार देर शाम से शुरु हरी तेज आंधी-तूफान, मूसलाधार बारिश और ओलावृष्टि ने किसानों की मेहनत पर पानी फेर दिया। इस प्राकृतिक आपदा से सैकड़ों एकड़ में लगी मकई की फसल पूरी तरह बर्बाद हो गई। प्रारंभिक आकलन के अनुसार, सिर्फ राघोपुर प्रखंड में ही करीब 4 हजार एकड़ से अधिक क्षेत्र में लगी मकई की फसल जमींदोज हो चुकी है।

अचानक हुए इस मौसम परिवर्तन ने हजारों किसानों को गहरे आर्थिक संकट में डाल दिया है। खेतों में लहलहाती फसल पूरी तरह गिरकर नष्ट हो गई, जिससे किसानों के बीच मायूसी का माहौल है। कई किसानों का कहना है कि फसल इतनी क्षतिग्रस्त हो चुकी है कि 


अब वह मवेशियों के चारे के लायक भी नहीं बची। हुलास पंचायत के किसान दिनेश विश्वास, आशीष कुमार और संजय चौधरी ने बताया कि इस बार मकई की फसल काफी अच्छी थी और बेहतर उत्पादन की उम्मीद थी, लेकिन अचानक आए तूफान ने सब कुछ तबाह कर दिया।

डुमरी पंचायत के किसान किसुन मंडल, राधे शर्मा और बिनोद यादव ने कहा कि ओलावृष्टि ने फसल को पूरी तरह नष्ट कर दिया है।

हरिपुर पंचायत के किसानों के अनुसार पूरे पंचायत में 10 से 15 हेक्टेयर भूमि पर फसल का नुकसान हुआ है।फिंगलास पंचायत के किसान प्रभास यादव, सुभाष यादव और बन्देलाल शर्मा ने भी भारी नुकसान की बात कही।

रामबिशनपुर के किसान शंकर राम, दिलीप साह और रामदेव शर्मा ने बताया कि इस आपदा से उनकी आर्थिक स्थिति पूरी तरह डगमगा गई है और अब परिवार चलाना भी मुश्किल हो गया है।

पीड़ित किसानों ने प्रशासन और सरकार से जल्द से जल्द नुकसान का सर्वेक्षण कर उचित मुआवजा देने की मांग की है। किसानों का कहना है कि यदि समय पर मुआवजा नहीं मिला तो उनके सामने परिवार चलाने का संकट खड़ा हो जाएगा।

स्थानीय लोगों ने प्रशासन से प्रभावित क्षेत्रों का जल्द निरीक्षण कर राहत और मुआवजा देने की मांग की है, ताकि किसानों को इस आपदा से उबरने में मदद मिल सके।